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गिद्धौर के 67 विद्यालयों में लटक रहे हैं ताले, शिक्षक हड़ताल पर, पठन-पाठन ठप

न्यूज़ डेस्क |अभिषेक कुमार झा】 :- राज्य सरकार की अकर्मण्यता के कारण नियोजित शिक्षकों के हड़ताल का आज तीसरा दिन है। हड़ताल पर चले जाने के बाद गिद्धौर प्रखंड क्षेत्र के 67 विद्यालयों में शैक्षणिक व्यवस्था पूरी तरह ठप हो गई है। हालांकि स्कूल तक बच्चे तो जरूर पहुंचे, परन्तु विद्यालय में ताला लटका देख बच्चे बैरंग अपने घर की ओर लौटते नजर आए।

बता दें, समान कार्य का समान वेतन, राज्य कर्मी का दर्जा सहित अन्य मांगों को लागू करने बिहार राज्य शिक्षक संघर्ष समन्वय समिति के आह्वान पर विद्यालयों में तालाबंदी कर 17 फरवरी से शिक्षकों का अनिश्चितकालीन हड़ताल गिद्धौर बीआरसी प्रांगण में  जारी है।
सरकार के तानाशाही रवैये पर अपनी तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए संघ के जिला कोषाध्यक्ष राजीव बर्णवाल एवं प्रखंड अध्यक्ष बशिष्ठ यादव ने संयुक्त रूप से कहा कि लोकतंत्र में सभी को अपने हक के लिए आन्दोलन करने का अधिकार है। शांतिपूर्ण तरीके से धरना कर रहे शिक्षकों पर प्राथमिकी दर्ज करना अलोकतांत्रिक है। सरकार से अपने हक की मांग करने के इस लड़ाई में यह हमारी चट्टानी एकता का ही परिचायक है कि प्रारंभिक विद्यालयों में पूर्ण रूप से पठन-पाठन ठप है। सरकार के दमनात्मक कार्रवाई से शिक्षक डरने वाले नहीं हैं। श्री बर्णवाल एवं श्री यादव ने संयुक्त रूप से बताया कि इस बार हम हमारा शिक्षक संघ आर-पार की लड़ाई के लिए कमर कस चुके हैं। जब तक शिक्षकों को वाजिब अधिकार नहीं मिल जाता तब तक हड़ताल से पीछे हटने का सवाल ही नहीं उठता है।
इधर, जिले के विभिन्न प्रखंड मुख्यालयों में शिक्षक संघ प्रदर्शन करते हुए सरकार समान काम का समान वेतन, सेवाशर्त, पुरानी पेंशन स्कीम, राज्यकर्मी का दर्जा, नियमित शिक्षकों की भांति सभी सुविधाएं समेत अपने अन्य मांगों के समर्थन व उनके पूर्ति होने तक जिले के शिक्षकों को निर्भीक होकर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर मजबूती के साथ अपनी आवाज को बुलंद करने में अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। अब इसके दूसरे छोर पर यदि गौर करें तो शिक्षकों की हड़ताल मैट्रिक परीक्षा पर पूर्णतः बेअसर दिख रहा है।रही। मैट्रिक परीक्षा के सफल संचालन के लिए सभी केन्द्रों पर पर्याप्त वीक्षकों की नियुक्ति की गई थी।


- हक और अधिकार की लड़ाई में नौनिहालों के भविष्य पर लगा ग्रहण -

शिक्षक और सरकार के बीच हो रहे हक और अधिकार के मांग की लड़ाई में नौनिहालों के भविष्य पर ग्रहण लग गया है। हड़ताल पर डटे शिक्षकों ने विद्यालय में तालाबंदी कर दी है जिससे कि बच्चों के पठन-पाठन कार्य बाधित है। विद्यालय में पठन-पाठन स्थगित हो जाने से एक ओर जहां बच्चों का भविष्य अधर में जाता दिख रहा है तो वहीं दूसरी ओर बच्चों के अभिभावकों की भी चिंताएं बढ़ती जा रही है।बरहाल, इस वर्चस्ववाद परिस्थितियों में नौनिहालों की पढ़ाई कब तक बाधित रहेगी, इस जवाब भविष्य के गर्भ में है।