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जमुई : पर्युषण पर्व पर हजारों जैन धर्मावलंबियों का लगेगा जमघट

[gidhaur.com | जिला संवाददाता]

जमुई जिले के सिकंदरा प्रखंड अंतर्गत भगवान श्री महावीर स्वामी जी के तीन कल्याणकों की पवित्र धरा क्षत्रिय कुंड लछुआड़ में तीर्थोद्धारक आचार्य श्री नयवर्धन सूरीश्वरजी महाराज के पावन सानिध्य में चातुर्मास का एक इतिहास सर्जक माहौल बना है। जिसमें गुजरात महाराष्ट्र मुंबई राजस्थान जैसे अन्य विभिन्न प्रदेशों से करीब 400 से अधिक जैन श्रद्धालुओं की प्रत्येक दिन भगवान की पूजा भक्ति अर्चना जैसे कार्यों की कड़ी तपस्या एवं विविध साधनाओं से यह तीर्थ भूमि तपोभूमि के स्वरूप को प्रदान की है। ऐसे महान तपोभूमि पर जैन आचार्य श्री नयवर्धन सूरी जी हर दिन दो बार प्रवचन अपने भक्त जनों को सुना रहे हैं। आदित्य वार के दिन तो अगल-बगल के गांवों से एवं स्थानीय जनता भी श्रवण करने के लिए वहां विशेष रूप से आते हैं। इस चातुर्मास के आराधना के दौरान होनेवाले जैन धर्म का सर्वाधिक महिमा संपन्न श्री पर्युषणा महापर्व यानी त्यौहार 6 सितंबर गसे लेकर 13 सितंबर तक शुरू होने जा रहा है।


बता दें कि इस पर्व का महत्व और भगवान श्री महावीर प्रभु के संदेश के विषय पर आधारित 8 दिनों की विशेष लेख श्रेणी आचार्य श्री जयवर्धन सूरी जी महाराज की ओर से प्राप्त हुई है।
पू. प्रवचन प्रभाकर आचार्य देवेश और श्रीमद् विजय नए वर्धन सूरीश्वरजी महाराज ने अजैन जनताओं को अपने दिए गए संदेशों में कहा कि जैन धर्म में आत्मा को सभी कर्मों के बंधन से मुक्त करने के लिए अनेक विधा साधना व आराधनाएं बताई गई हैं। जिसमे हमारी आत्मा का अनादि काल से इस संसार में परिभ्रमण का मुख्य कारण आत्मा पर लगे कर्म हैं। कर्म से प्रधान और दूषित आत्मा अपने स्वाभाविक रूप से हटकर कर्म जनित विषम अवस्थाओं का भोग करते हुए संसार में भटक रहा है। मोक्षलक्षी आराधना के बिना सही आत्म स्वरूप का प्रकट होना संभव ही नहीं है। यह हकीकत है कि इच्छा होते हुए भी संसारी जीव अपने कर्म या संजोग के वश से नियमित विशेष धर्म आराधना नहीं कर सकता है, ऐसे जीव भी धर्म आराधना से वंचित ना रहे इसके लिए ज्ञानी भगवन्तों ने अनेक पर्वों की व्यवस्था की है। हमेशा धर्म आराधना करने वाले जीव भी इन पर्वों के दिनों में विशेष भाव उल्लास के साथ धर्म साधना करते हैं इस प्रकार से पर्व सभी आत्माओं के लिए धर्म प्रेरक बनते हैं।