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ज्येष्ठा नक्षत्र और आयुष्मान योग के युग्म संयोग में होगी विश्वकर्मा पूजा

धर्म/आध्यात्म (अनूप नारायण) : जिसकी सम्पूर्ण सृष्टि और कर्म व्यापार है वह विश्वकर्मा है। सम्पूर्ण सृष्टि में जो भी कर्म सृजनात्मक है, जिन कर्मो से जीव का जीवन संचालित होता है, उन सभी के मूल में विश्वकर्मा है। ऐसे में भगवान विश्वकर्मा का पूजन जहां प्रत्येक व्यक्ति को प्राकृतिक उर्जा देता है, वहीं कामकाज में आनी वाली सारी अड़चनों को दूर करता है। यह पर्व हर साल 17 सितंबर को मनाया जाता है I  इसी दिन निर्माण के देवता विश्वकर्मा का जन्म हुआ था I विश्वकर्मा को देवशिल्पी यानी देवताओं के वास्तुकार  के रूप में पूजा जाता है I

कर्मकांड विशेषज्ञ पं० राकेश झा शास्त्री ने पंचांगों के हवाले से कहा कि कल सोमवार को भाद्रपद मास शुक्लपक्ष में ज्येष्ठा नक्षत्र और आयुष्मान योग के युग्म संयोग में भगवान विश्वकर्मा की पूजा की जाएगी I इस योग में विश्वकर्मा की पूजा करने से रोजी-रोजगार, कारोबार, नौकरी-पेशा में उन्नति होती है I इसके साथ ही इस दिन भगवान शिव की आराधना से इनकी विशेष अनुकंपा की प्राप्ति होगी I

निर्माण के देवता है भगवान विश्वकर्मा:-

ज्योतिषी पं० राकेश झा ने कहा कि भगवान विश्वकर्मा ने सतयुग के स्वर्ग लोक, त्रेता युग में लंका, द्वापर में द्वारिका और कलयुग में हस्तिनापुर की रचना किये है I यहां तक कि सुदामापुरी का निर्माण भी उन्होंने ही किया I  ऐसे में यह पूजा उन लोगों के ज्यादा महत्वपूर्ण है, जो कलाकार, बुनकर, शिल्पकार और व्यापारी हैं I इस दिन ज्यादातर कल-कारखाने बंद रहते हैं और लोग हर्षोल्लास के साथ भगवान विश्वकर्मा की पूजा करते हैं I इस दिन भगवान विश्वकर्मा ने सृष्टि के रचयिता ब्रह्मा के सातवें धर्मपुत्र के रूप में जन्म लिए थे I

विश्वकर्मा पूजा का महत्व:-

भगवान विश्वकर्मा को देवताओं का शिल्पकार , वास्तुशास्त्र का देवता, देवताओं का इंजीनियर और 'मशीन का देवता' कहा जाता है I विष्णु पुराण में विश्वकर्मा को 'देव बढ़ई' कहा गया है I विश्वकर्मा की पूजा करने से व्यापार  में दिन-दूनी रात चौगुनी वृद्धि होती है I साथ ही माता लक्ष्मी के आगमन के आसार में भी वृद्धि होती है I


विश्वकर्मा पूजा शुभ मुहूर्त:-

संक्रांति काल मुहूर्त:-  प्रातः  07:01 बजे से

अभिजीत मुहूर्त:- दोपहर 11:19 बजे से 12:08 बजे तक

गुली काल मुहूर्त:- दोपहर 1:36 बजे से 2:47 बजे तक

राशि के अनुसार करे बाबा विश्वकर्मा की पूजा-

पंडित राकेश झा ने बताया की श्रद्धालु अपनी राशि के अनुसार भगवान विश्वकर्मा की पूजा कर उनकी विशेष कृपा पा सकते है I इसके साथ ही कारोबार, नौकरी-पेशा में भी उन्नति मिलेगी I

मेष- राशि का स्वामी मंगल उच्च का है जिसके कारण पूजा आपके लिए विशेष शुभप्रद कही जाएगी। आज के दिन को और शुभकारी बनाने हेतु केसरिया रंग का वस्त्र धारण कर पूजन करावे।

वृष:- पूजा करते समय यह सुनिचित करे कि भगवान विश्वकर्मा के जप पाठ के बाद श्री कुबेर जी की 11माला जप अवश्य हो जाये। इससे आपकी चल रही ढैय्या की नकारात्मकता न्यून हो जाएगी।

मिथुन:-  कलश स्थापना के लिए जो रंगोली बनाएं उसमें हरे रंग की अधिकता रखे। भगवान गणपति के शतनाम के पाठ के बाद विश्वकर्मा पूजन कराएं और केला गरीबो में बंटवाएं।

कर्क:- इस राशि वालो के लिए यह वर्ष सभी प्रकार से कल्याणकारी परिणाम प्रदान करने वाला साबित होगा। आज भगवान शिव का आशीर्वाद विश्वकर्मा पूजन में प्राप्त करने हेतु गरीबो में सफेद अन्न का वितरण करें।

सिंह:- स्नान करने के बाद भगवान भास्कर को जल अवश्य दें। जल में रोली, लाल फूल, व गुड़ डालना न भूलें। निश्चित तौर पर भगवान विश्वकर्मा जी की पूजा मंगलकारी सिद्ध होगी।

कन्या:- चंद्रमा जो आप के लाभ का स्वामी है, सुख स्थान पर रहेगा। जिसके कारण पूजा से आपके सभी मनोरथ सिद्ध होंगे और काम-काज में वृद्धि होगी। नया रोजगार प्रारंभ होगा।

तुला:- राशि से पराक्रम भाव का शनि आप के सभी अवरोध को स्वतः समाप्त करने वाला कहा जायेगा। राशि से चतुर्थ मंगल यांत्रिक कार्यो, निर्माण यंत्र से विशेष लाभ देने वाला कहा जायेगा। विश्वकर्मा पूजन से आपको विशेष लाभ प्राप्त होगा।

वृश्चिक:-आपके लिए यह विश्वकर्मा पूजा दिवस कार्यक्षेत्र में सफलता देने के साथ-साथ विदेश से संबंधित व्यवसाय में नए रास्ते खोलेगी। पूजा के समय कलश स्थापना लाल रंग की रंगोली पर करें और साबुत लाल मसूर गाय को खिलाएं।

धनु:- पूजा के समय चंद्रमा आपकी राशि पर होगा व बृहस्पति राशि से लाभ भाव मे आकर पुराने सभी बाधाओं को समाप्त करेगा। भगवान विश्वकर्मा की पूजा का विशेष लाभ पाने के लिए श्री गणेश, महादेव व गौरी को वस्त्र अर्पित करें।

मकर:-बीते साल की कठिनाईयों और संघर्ष से मुक्ति पाने के लिए इस साल विधिवत विश्वकर्मा पूजा करें। साथ ही साथ यह भी सुनिश्चित करें कि पवित्र गायत्री मंत्र के साथ कल-कारखाने व सभी उपकरण की शुद्धि हो जाये।

कुम्भ:- पूजन पर बैठने के लिए कुश की आसनी पर बैठने का प्रबंध करें तथा पारिजात के फूल को भगवान विश्वकर्मा को अवश्य अर्पित करें। इस प्रयोग से सभी नकारात्मक शक्तियां समाप्त हो जाएंगी।

मीन:-  विश्वकर्मा पूजा साधना-अराधना कर भगवान विश्वकर्मा के साथ-साथ श्री नारायण का आशीर्वाद अवश्य ग्रहण करें। बाधाएं दूर होंगी और शुभ परिणाम निकलेंगे।