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वेतन के लिए शिक्षक लगाते हैं ऑफिस का चक्कर, बाबुओं की चलती है मनमानी

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शिक्षकों का वेतन बंद व चालू करना अब पैसों का खेल बना है...


[gidhaur.com | चंद्रशेखर सिंह] :-

एक कहावत है कि बाबू बड़ा, न भैया, सबसे बड़ा रुपैया। ठीक इसी के तर्ज पर चल रहा है इन दिनों शिक्षा विभाग। बताया जाता है कि जिले के कई ऐसे शिक्षक हैं जिन्हें फर्जी प्रमाणपत्र पर बहाल होने की शिकायत कर जांच न कर पहले वेतन बंद करने का आदेश दे दिया जाता है और एक ही शिक्षक को दो से तीन बार कभी डीपीओ तो कभी डीईओ तो कभी शिक्षा उपनिदेशक मुंगेर से वेतन बंद करने का आदेश दिया जाता है।

जब वैसे शिक्षक सभी प्रमाण-पत्र के साथ कार्यालय को उपलब्ध करा देते हैं इसके बाद भी महीनों दिन बाबू के कार्यालय का चक्कर काटने को विवश हैं। वैसा ही मामला जिले के अलीगंज प्रखंड के आधार दर्जन शिक्षकों का है। पहले जिला शिक्षा पदाधिकारी ने प्रखंड अंतर्गत मध्य विद्यालय मंगरोहर में पदस्थापित शिक्षक सुरजीत सेन, मध्य विद्यालय खड़गपुर के गावस्कर कुमार, प्राथमिक विद्यालय बेलाटांड की शिक्षिका संध्या सिन्हा, प्रेमन मोची का शैक्षणिक प्रमाण-पत्र फर्जी बताने की शिकायत पर पहले डीईओ ने वेतन बंद कर चालू करने का आदेश दिया तो अब शिक्षा उपनिदेशक मुंगेर ने पत्र भेज वेतन पर रोक लगा दिया है और दर्जन भर शिक्षक छह महीनों से वेतन चालू कराने के लिए कभी जिला शिक्षा कार्यालय तो कभी आरडीडीई मुंगेर वेतन चालू कराने का चक्कर काट रहे हैं।
इधर, शिक्षा उपनिदेशक मुंगेर मो. मंसूर आलम ने बताया कि वेतन शुरू करने के लिए राशि की मांग करने की जानकारी नहीं है। लेकिन ऐसे कुछ मामले हैं। जांच कर जल्द ही वेतन चालू करने का आदेश दिया जाएगा।
बताते चलें कि शिक्षा विभाग में शिक्षकों के वेतन बंद और चालू करने के नाम पर मोटी रकम की उगाही की जा रही है। कई शिक्षकों ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि बाबू के चक्कर कई महीनों से वेतन चालू कराने के लिए चक्कर काट रहा हूं। वेतन चालू कराने के नाम पर मोटी रकम की मांग की जा रही है। बताया जाता है कि शिक्षकों का वेतन बंद करना और पैसे लेकर चालू करना एक नियति बन गई है। कई ऐसे शिक्षक हैं जिन्हें तीन से चार बार वेतन बंद कर चालू किया गया है। शिक्षकों ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि जिला शिक्षा कार्यालय से आदेश मिला तो अब आरडीडीई से रोक लगा दिया जाता है और चालू के नाम पर कार्यालय से मोटी रकम की मांग की जाती है। पैसे नहीं देने पर टाल-मटोल कर काफी परेशान भी किया जाता है। शिक्षकों ने बताया कि चार शिक्षकों का वेतन रोक आरडीडीई कार्यालय से किया गया जिसमें तीन को चालू करने आदेश दे दिया गया है और एक को टाल-मटोल किया जा रहा है। जिले भर के सभी शिक्षकों का शैक्षणिक प्रमाण-पत्र जांच के लिए जमा किए जाने के बाद भी परेशान किया जाता है। बार-बार वेतन बंद कर चालू करना अधिकारियों की कार्यशैली पर प्रश्नचिन्ह लगाता दिख रहा है और शिक्षकों का मानसिक व आर्थिक शोषण किया जा रहा है। वेतन बंद रहने से कई शिक्षकों के परिवार के बीच भूखमरी के कगार पर है।