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चकाई : कागज के पन्नों पर ही हो गया आंगनबाड़ी केंद्र का निर्माण

[चकाई | श्याम सिंह तोमर]

चकाई प्रखंड अंतर्गत कई आंगनबाड़ी केंद्र में भवन का निर्माण कार्य को पूर्ण किए बगैर कागज पर ही निर्माण कार्य दिखाकर लाखों रुपये की राशि की निकासी कर लेने का सनसनीखेज मामला प्रकाश में आया है. पड़ताल में पता चला है कि चकाई प्रखंड में कई आंगनबाड़ी भवन का निर्माण किये बगैर ही राशि की निकासी कर ली गई है. प्रखंड में कुल 232 आंगनबाड़ी केंद्र संचालित की जाती है. इनमें से 70 आंगनबाड़ी केंद्रों का निर्माण पूर्ण तो नही हो पाया  है लेकिन इन अधूरे भवनों में पढाई होती है. जबकि 53 केंद्र ऐसे हैं जो पूर्णरूपेण अधूरा ही रहा गया है जिसके कारण यहां पढ़ाई भी नही हो पाती है. कुल मिलाकर 70 केंद्रों को छोड़कर आंगनबाड़ी केंद्र का संचालन किराये के मकानों या अन्य सरकारी भवनों में की जाती है.
वहीँ रामसिंहडीह ग्राम पंचायत के साथ-साथ प्रखंड स्थित कई पंचायतों  में 20 अक्टूबर 2011 से 2015 तक तेरहवीं वित्त आयोग योजना में बड़े पैमाने पर विकास राशि के गबन का खेल तत्कालीन मुखिया एवं पंचायत सचिव के द्वारा किये जाने का मामला प्रकाश में आया है.


चकाई प्रखंड के रामसिंहडीह पंचायत के मनोज यादव, वैद्यनाथ किस्कु, सुरेश यादव, केदार यादव, बड़की मुर्मू, बच्चु यादव, गणेश यादव, बहादुर यादव, तारणी यादव आदि
दर्जनों ग्रामीणों ने जमुई जिलाधिकारी को दिए लिखित आवेदन में बताया कि वर्ष 2011-15 में तेरहवीं वित्त आयोग के  योजनाओं में रामसिंहडीह पंचायत के योजना संख्या-01/11-12 के तहत ग्राम-काकोरीया में आंगनबाड़ी केंद्र में भवन का निर्माण किया जाना था. जिसकी प्राक्कलित राशि 499100/-थी. हद तो तब हो गई जब इस योजना के नाम पर 477500/-रुपए की निकासी के बाबजूद भी अब तक आंगनबाड़ी केंद्र का निर्माण नही किया गया है. आलम ये है कि अब भी यहां आंगनबाड़ी केंद्र का संचालन किराये के मकान में हो रहा है.वहीं दूसरी योजना संख्या-02/13-14 के तहत बानाडीह गांव में भी आंगनबाड़ी केंद्र में भवन का निर्माण किया जाना था जिसकी प्राक्कलित राशि 498000/-थी.इस योजना के नाम पर 487000/-रुपए अब तक निकाले जा चुके हैं लेकिन भवन निर्माण जमीन के बजाय कागज के पन्नों पर ही हो गया। साथ ही यहां का आंगनबाड़ी केंद्र  सेविका की बर्खास्तगी के बाद लगभग तीन वर्षों से बन्द पड़ा है. बात यहीं तक नहीं थमती. तीसरी योजना संख्या-03/13-14 के तहत ग्राम-बघमरा में भी आंगनबाड़ी केंद्र भवन का निर्माण किया जाना था जिसकी प्राक्कलित राशि 498000/-थी.इस योजना के नाम पर 487000/-रुपए भी निकाले जा चुके लेकिन कार्य अब तक अधूरा  है.


संवाददाता की जांच पड़ताल के दौरान आंगनबाड़ी केंद्र निर्माण में लाखों रुपए का घपला उजागर हुआ है. पदाधिकारियों एवं बिचौलियों की मिलीभगत से लाखों रुपए की निकासी कर ली गयी. कुल मिलाकर तीन आंगनबाड़ी केंद्र में दो आंगनबाड़ी केंद्र जमीन पर नही बने है. ये तो बस कुछ केंद्रों की कहानी है.इस तरह चकाई प्रखंड में कई ऐसे केंद्र हैं जहां भवन निर्माण का कार्य पूरा किये बिना राशि की निकासी कर  बंदरबांट कर लिया गया.

बड़े पैमाने पर हुई विकास राशि का लूट-खसोट का मामला तब उजागर हुआ जब ग्रामीणों ने सूचना अधिकार अधिनियम के तहत वर्ष 2011 से 15 तक के बीच रामसिंहडीह पंचायत में हुए तेरहवीं वित्त आयोग योजना की पूरी जानकारी हासिल की. ग्रामीणों ने जमुई जिलाधिकारी धर्मेंद्र कुमार को हस्ताक्षर युक्त आवेदन देकर आंगनबाड़ी केंद्र निर्माण के नाम पर सरकारी पैसे की हुई लूट की अबिलम्ब जाँच करवाने की मांग की ही ताकि नौनिहालों को छत नसीब होने के साथ-साथ दोषियों पर कार्रवाई हो सके. वहीं सबसे बड़ा सवाल यह है कि नक्सल प्रभावित जमुई जिला में इतनी बड़ी राशि के लूट किये जाने की जानकारी अफसरों तक को नहीं है. अब सवाल यह उठता है कि इतनी बड़ी लूट की जानकारी सरकारी अफसरों को क्यूँ नहीं लग पाई? बिना भवन निर्माण के पैसे की निकासी कैसे हो गई? बिना बड़े पदाधिकारियों के मिली भगत से इतनी बड़ी लूट कैसे संभव हो सकता है?

इस बाबत जब चकाई सीडीपीओ प्रेरणा कुमारी से बात की गई तो उन्होंने बताया  कि मुझे इसकी जानकारी नहीं है लेकिन 70 आंगनबाड़ी केंद्र में पढ़ाने लायक भवन का निर्माण हो चुका है. शेष जगहों पर अधूरा निर्माण के कारण किराये के मकान में या फिर सरकारी भवन में केंद्र का संचालन हो रहा है.

जबकि जिलाधिकारी धर्मेन्द्र कुमार ने बताया कि इस संदर्भ में अभी तक ग्रामीणों का आवेदन  प्राप्त नही हुआ है.अगर मामला सही पाया गया तो दोषियों पर कार्रवाई की जायेगी. श्री कुमार ने कहा कि जहां-जहां भी आंगनबाड़ी केंद्र के निर्माण कार्य में अनियमितता बरती गई है वहां के ग्रामीण आवेदन दें. उन सभी मामलों की जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की जायेगी.