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जोधपुर की पूर्व राजमाता कृष्णा कुमारी का निधन, राजघराने में छाया शोक

ब्रेकिंग (सुशान्त सिन्हा) : जोधपुर राजघराने की पूर्व राजमाता एवं पूर्व सांसद कृष्णा कुमारी का सोमवार रात करीब डेढ़ बजे निधन हो गया। उन्होंने यहां एक निजी अस्पताल में अंतिम सांस ली। कृष्णा कुमारी के निधन की खबर सुनते ही जोधपुर में शोक की लहर दौड़ गई। उनका अंतिम संस्कार शाम चार बजेे जसवंत थड़ा पर किया जाएगा। इससे पूर्व दोपहर 1.30 से 3 बजे तक उनकी पार्थिव देह आमजन के दर्शनार्थ उम्मेद भवन पैलेस में रखी जाएगी। दोपहर करीब साढ़े तीन बजे अंतिम यात्रा जसवंत थड़ा के लिए रवाना होगी।

पूर्व राजमाता कृष्णा कुमारी (93) को हार्ट अटैक के बाद रविवार को गोयल अस्पताल में भर्ती कराया गया था। सोमवार रात को उन्हें फिर हार्ट अटैक आया। पक्षाघात के बाद गोयल अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सक उनके उपचार में जुटे हुए थे। उनके उपचार के लिए वीआईपी कोटेज को ही आईसीयू बनाया गया था। रात एक बजे तक पूर्व राजपरिवार के सूत्रों की ओर से उनकी हालत में सुधार बताया जा रहा था, लेकिन बाद में उनके शरीर के कई अंगों ने काम करना बंद कर दिया था। रात करीब 1.20 बजे अस्पताल से यह दुखद खबर आई कि राजमाता कृष्णाकुमारी नहीं रही। 

दोपहर में आएगी सीएम

मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे पूर्व राजमाता के दर्शनार्थ दोपहर में जोधपुर आएगी। वे दोपहर साढ़े बारह बजे जयपुर से रवाना होकर दोपहर दो बजे जोधपुर आएगी और फिर उम्मेद भवन में राजमाता के दर्शनार्थ जाएगी। उनका दोपहर तीन बजे वापस जयपुर जाने का कार्यक्रम प्रस्तावित है। वहीं दोपहर करीब 2 बजकर 40 मिनट पर दिल्ली की फ्लाइट से पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत जोधपुर पहुंचेंगे और राजमाता के अंतिम संस्कार में शामिल होंगे।

जीवन परिचय

कृष्णा कुमारी का जन्म 10 फरवरी 1926 को ध्रांगध्रा (सौराष्ट्र) गुजरात में हुआ था। उनका विवाह 14 फरवरी 1943 को जोधपुर के तत्कालीन महाराजा हनवंतसिंह के साथ हुआ। उनके पुत्र पूर्व सांसद गजसिंह एवं दो पुत्रियां हैं। उनकी पुत्री चंद्रेश कुमारी भी जोधपुर की सांसद एवं केन्द्रीय मंत्री रह चुकी है। कृष्णा कुमारी ने सन् 1971 का लोकसभा चुनाव निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में लड़ा था। वे 21 हजार से अधिक वोटों से विजयी रही। उन्होंने संसद में जोधपुर समेत पूरे प्रदेश की जनता की आवाज को पुरजोर तरीके से उठाया। अपने राजनीतिक सेवाकाल में उन्होंने जोधपुर जिले के विकास में काफी योगदान दिया था। बालिका शिक्षा के लिए भी उन्होंने भरसक प्रयास किए। उन्होंने जोधपुर में राजमाता कृष्णा कुमारी गल्र्स पब्लिक स्कूल की स्थापना की थी। 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान शेरगढ़ के सर्वाधिक फौजी शहीद होने पर उन्होंने क्षेत्र का दौरा कर शहीदों के परिजनों को ढांढस बंधाया था। इसके साथ ही 1973-74 में खाद्यान्न संकट के समय उन्होंने जोधपुर की जनता की सहायता के लिए भरपूर प्रयास किए थे। इसके साथ ही जोधपुर में हवाई व रेल सेवाओं के विस्तार के लिए भी उन्होंने प्रयास किए थे।

पांच पीढिय़ों को देखा निकट से

मारवाड़ राजघराने में कृष्णा कुमारी ही ऐसी रही, जिन्होंने परिवार की पांच पीढिय़ों को निकट से देखा। पौत्र शिवराजसिंह के साथ पोलो खेलते समय हुए हादसे ने कृष्णा कुमारी को तोड़ कर रख दिया। जीवन में ऐसे कई दौर देख चुकी कृष्णा कुमारी एक बार फिर चट्टान के समान परिवार के साथ खड़ी हो गई। संकट के इस दौर में उन्होंने न केवल अपने बेटे गजसिंह को मजबूती प्रदान की, बल्कि शिवराज के इलाज की पूरी देखरेख की। यही कारण रहा कि शिवराज अब काफी हद तक ठीक हो चुके हैं।

जोधपुर की पूर्व राजमाता एवं पूर्व सांसद कृष्णा कुमारी का सोमवार रात डेढ़ बजे निधन हो गया। उन्होंने यहां एक निजी अस्पताल में अंतिम सांस ली। कृष्णा कुमारी के निधन की खबर सुनते जोधपुर सहित पूरे मारवाड़ में शोक की लहर दौड़ गई। 93 वर्षीय राजमाता कृष्णा कुमारी की अचानक तबीयत बिगडऩे के बाद शहर के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। पक्षाघात के बाद गोयल अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सक उनके उपचार में जुटे हुए थे। उनके उपचार के लिए वीआईपी कोटेज को ही आईसीयू बनाया गया था।

जानकारी के अनुसार पूर्व राजमाता की पार्थिव देह को मंगलवार दोपहर करीब 1 बजे के बाद उम्मेद भवन पैलेस परिसर में जनता के दर्शनार्थ रखा जाएगा। जहा लोग उनके अंतिम दर्शन कर पाएंगे। वही जसवंत थड़ा में उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा।

राजमाता अपने परिवार के साथ

1971 में बनी थी सांसद

कृष्णा कुमारी ने सन् 1971 का लोकसभा चुनाव निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में लड़ा था। वे 21 हजार से अधिक मतो से विजयी रहीं थी। उन्होंने संसद में जोधपुर समेत पूरे प्रदेश की जनता की आवाज को पुरजोर तरीके से उठाया था। अपने राजनीतिक जीवन में उन्होंने जोधपुर जिले के विकास में काफी योगदान दिया था। बालिका शिक्षा व महिला उत्थान के लिए भी उन्होंने भरसक प्रयास किए। उन्होंने जोधपुर में राजमाता कृष्णा कुमारी गल्र्स पब्लिक स्कूल की स्थापना की थी। 1971 के भारत—पाकिस्तान युदृध के दौरान शेरगढ के सर्वाधिक फौजी शहीद होने पर उन्होंने क्षेत्र का दौरा कर शहीदों के परिजनों को ढाढस बंधाया था। इसके साथ ही जोधपुर में हवाई व रेल सेवाओं के विस्तार के लिए भी उन्होंने प्रयास किए थे।

जीवन परिचय

कृष्णा कुमारी का जन्म 10 फरवरी 1926 को ध्रांगध्रा (सौराष्ट्र) गुजरात में हुआ था। उनका विवाह 14 फरवरी 1943 को जोधपुर के तत्कालीन महाराजा हनवंत सिंह के साथ हुआ। उनके पुत्र पूर्व सांसद गज सिंह एवं दो पुत्रियां हैं। उनकी पुत्री चंद्रेश कुमारी भी जोधपुर की सांसद एवं केन्द्रीय मंत्री रह चुकी हैं।