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सिमुलतला में बोले डॉ. सुधांशु कुमार , आधुनिक हिंदी साहित्य के पितामह थे भारतेंदु हरिश्चंद्र

सिमुलतला (गणेश कुमार सिंह) :-
  हिन्दी साहित्य को मध्यकालीन विलासिता के बवंडर से निकालकर आधुनिक भारत की जनचेतना और भावबोध से जोड़नेवाले भारतेंदु हरिश्चंद्र आधुनिक हिन्दी साहित्य के पितामह हैं । वे जितने बड़े पत्रकार थे , उतने ही बड़े कवि और नाटककार थे । मात्र चौंतीस वर्ष चार महीने की उम्र में उन्होंने हिन्दी साहित्य कोश को नाटक , कविता , कहानी आदि से समृद्ध किया ।


उक्त बातें सोमवार को महाकवि राम इकबाल सिंह राकेश साहित्य परिषद के तत्वावधान में सिमुलतला आवासीय विद्यालय में आयोजित भारतेंदु हरिश्चंद्र जयंती के अवसर पर व्यंग्यकार डा. सुधांशु कुमार ने कही। आगे उन्होंने कहा कि भारतेंदु हरिश्चंद्र ने अपनी अल्पायु में ही अपनी पत्रकारिता और साहित्यिक गतिविधियों से जनजागरण का जो बिगुल फूँका उसका ऋणी हिन्दी साहित्य के साथ- साथ यह देश भी रहेगा । शिक्षक गोपाल शरण शर्मा ने कहा कि भारतेंदु युग ने पहली बार हिन्दी साहित्य को नाटक , कहानी , उपन्यास , संस्मरण सहित कई विधाओं से समृद्ध किया । आज हिन्दी साहित्य का जो स्वरूप हमारे सामने है , उसमें भारतेंदु हरिश्चंद्र के योगदान को भूलाया नहीं जा सकता । कुमारी नीतू ने कहा कि भारतेंदु हरिश्चंद्र के नाटकों ने पराधीन भारत के सुप्त जनमानस को झकझोरने का महान कार्य किया ।