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जमुई के लाल सुमन सौरभ को मिला बिहार रत्न अवॉर्ड, जिले भर के युवाओं में खुशी की लहर

पटना/जमुई/न्यूज़ डेस्क (दयानन्द साव) :
राजधानी पटना में हेल्पिंग ह्यूमन  तथा संस्कृति फाउंडेशन के तत्वावधान में विभिन्न सामाजिक क्षेत्रों में अमूल्य योगदान के लिए राज्य भर के 21 लोगों को बिहार रत्न अवार्ड से सम्मानित किया गया। जिसमें जमुई जिले के लाल युवा सोशल एक्टिविस्ट श्री सुमन सौरभ को भी बिहार रत्न अवार्ड से सम्मानित किया गया। इन्हें यह सम्मान इन के सामाजिक कार्य "जीते जी रक्तदान एवं मृत्यु उपरांत देहदान " मुहिम के लिए अमूल्य योगदान के लिए दिया गया।

इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप में विराजमान 3 दिव्यांग बालिकाओं की उपस्थिति में संस्था की सी.ई.ओ. श्रीमती आकांक्षा चित्रांश ने सम्मानित किया।सम्मान का क्षण इतना भावुकता भरा था कि श्री सौरभ ने कहा कि पहली बार मैं इस प्रकार के सम्मान समारोह का गवाह बना ,जब मुख्य अतिथि के रूप में तीन ऐसी बच्चियां थीं, जिनमें पहली बच्ची जिन्हें ईश्वर ने आंखों में रोशनी नहीं दी,दूसरी बच्ची जिन्हें माता पिता और परिवार नहीं था,तीसरी बच्ची वह जो एसिड अटैक की शिकार थी। इन बच्चियों की गौरवपूर्ण उपस्थिति में सम्मान पाना वास्तव में मेरे लिए गौरवपूर्ण क्षण रहा। उन्होंने इस गौरवपूर्ण सम्मान के लिए हेल्पिंग ह्यूमन तथा संस्कृति फाउंडेशन का आभार प्रकट किया।
इस कार्यक्रम में बिहार के कई प्रमुख हस्तियों जिन्होंने बिहार राज्य के होकर भी पूरे देश भर में अपने बेहतर कार्य को लेकर युवाओं के बीच एक नई ऊर्जा का संचार किया जिनमें गंगा बचाओ अभियान के श्री गुड्डू बाबा, पटना के प्रसिद्ध शिक्षक श्री रहमान सर, सीतामढ़ी जिले की आदर्श मुखिया श्रीमती रितु जायसवाल तथा रक्तदान के क्षेत्र में क्रांति के दूत रहे श्री मुकेश हिसारिया जैसे दिग्गजों को बिहार रत्न अवार्ड से सम्मानित किया गया।

इस सम्मान के लिए श्री सुमन अपने मित्रों तथा रक्तदान के क्षेत्र में खास सहयोगी श्री ओम प्रकाश, आलोक कुमार, बमबम लालदास, पियूष कुमार गोरे, अमित कुमार, ऋषभ राणा, राजकुमार, वैभव कुमार मिश्रा, आनंद भगत, अमरनाथ जी के साथ ही साथ अन्य रक्त वीर साथियों का आभार प्रकट करते हुए कहते हैं कि बिना इन साथियों के सहयोग के इतना बड़ा सम्मान पाना काफी कठिन है।
श्री सौरभ जमुई जिले के सिकंदरा प्रखंड के सुदूर ग्रामीण क्षेत्र लछुआड़  गाँव के निवासी हैं। इनके पिता श्री प्रोफेसर विश्वनाथ सिंह (धनराज सिंह कॉलेज सिकंदरा के दर्शन शास्त्र विभाग के विभागाध्यक्ष) तथा माता श्रीमती सरिता देवी ग्रृहिणी हैं।श्री सुमन की इस शानदार उपलब्धि पर इनके माता-पिता सहित समस्त ग्राम वासियों सहित जिलेभर में खुशी की लहर है ।खासकर युवाओं में काफी उत्साह का माहौल है।

कहते हैं सुमन
1998 का वर्ष मेरे सहित परिवार के लिए बड़ा दर्द भरा रहा जब रक्त के अभाव में मैंने अपना भाई को खो दिया ।जो उम्र में मुझसे बड़ा था। उस वक्त यदि रक्त की व्यवस्था हो जाती तो शायद मेरे भाई की जान बच सकती थी ।उस समय मैं छोटा था पर इतना सब से सुना कि मोनू को यदि ब्लड मिल जाता तो उसकी जान बच सकती थी। यह बात उस वक्त मेरे दिमाग में बैठ सा गया था कि खून नहीं मिला यदि मिलता तो मोनू भैया बच जाते। रक्त जरूरत को जब डॉक्टर ने कहा तो परिवार के कुछ लोगों ने भी हाथ खड़े कर दिए ।इसी वजह से मैंने अपने परिवार को रोते हुए देखा और उसी दिन ठान लिया कि एक ऐसा प्रयास करूंगा जिससे रक्त के अभाव में किसी की जान न जाए। इसी क्रम में आगे बढ़ते हुए पढ़ाई के दौरान ही अपने कुछ खास मित्रों के साथ इस अभियान को शुरू किया और कोशिश रही कि रक्त के अभाव में किसी को अपने परिवार को खोना ना पड़े। और वह आज तक निर्बाध रूप से जारी है और आगे भी जारी रहेगा।
श्री सुमन कहते हैं कि उन्हें इस कार्य के लिए दर्जनों सामाजिक संस्थानों से सम्मान पत्र प्राप्त हो चुका है।

प्रेरणास्रोत
श्री सुमन कहते हैं कि जहाँ तक प्रेरणा की बात है तो हरेक वो व्यक्ति मेरे लिए प्रेरणा है जो हर पल इस मुहिम में मेरे साथ खड़े रहे। ये अपनी मन:स्थिति पर सबसे बड़ा प्रभाव का श्रेय बड़ी बहन श्रीमती प्रज्ञा सिंह तथा माता श्रीमती सरिता देवी को देते हैं जिन्होंने इन्हें हर बार टूटते हुए संभाला है।

वर्तमान में ये प्रबोध जन सेवा संस्थान में बतौर सचिव तथा मानव रक्षक रक्तदाता समूह के फाउंडर के रूप में सेवा दे रहे हैं। इसी मुहिम के तहत इन्होंने देहदान का शपथ ले रखा है और लोगों को भी इस पुनीत कार्य के लिए प्रेरित भी करते रहते हैं। इनके इस कार्य के लिए लछुआड़ ग्रामवासियों सहित समस्त जिलेवासियों को इन पर गर्व है।