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आलेख : जन्मदिन और मां की ममता से बना केक


आलेख :- [Edited by-Abhishek.]
मम्मी के दूसरी आवाज मे ही मोनन जाग गया। क्यों ना जागे आज उसका जन्मदिन था। गौशाला से गोबर ले आ, मोनन की मम्मी झाङू लगाते हुए बोली। जरा-सी मुस्कुराहट भरी आवाज सुनकर उसने कहा उठता हूं मम्मी। कुछ देर बाद मोनन गोबर ले आया फिर उससे ओसारा (बरामदे) आदि को लीपा , गया। पक्के के बने दो कमरे में पोछा लगाना...। उस दिन घर के सभी सदस्य जन्मदिन का समान लाने में लगे थे। मम्मी सुन्दर व अनोखी केक बना रही थी। साथ ही जहां शाम को केक कटने की रस्म होनी थी।
 वहां बहुत सारे रंग बिरंगे बैलून सज-धज कर तैयार हो रहा था। मम्मी ने पलंग पर चादर तथा जमीन पर चटाई बिछाई। ...जो उस घर की शोभा बढा दी थी।
... आखिर वो अहम् पल आ गया जिसका इन्तज़ार बच्चे व बड़े कर रहे थे। उस मुहल्ले से आमंत्रित बच्चे ललचाई नजरों से आंखों ही आंखो में दूध से बने केक खाने का प्रोग्राम बना रहे थे, तो कुछ नटखट बच्चे सिर के ऊपर , नज़र के सामने डोल रही लाल, उजले बैलून को, नजर टिका रखा था। या फिर यह कहें कि उसे लेना चाह रहे थे। टेबल पर रखा ट्रे में , केक ठाट वाट से सजा दी गई। घर में आते ही दो मित्रों ने जन्मदिन का मुबारक दिया।और दोस्त को उपहार भी दी। मोनन ने मुस्कराते हुए उसे स्वीकार किया। वहां पर काफी चहल चहल-पहल दिखाई पड़ रही थी। अब सिर्फ केक पर तरह-तरह की डिजाइन वाली मोमबत्तियां लगनी थी। पापा ने अपने बेटे  मोनन से कहा,  "मोमबत्ती ले आओ। उसके कहते ही, मम्मी ने दराज से मोमबत्तियां निकालकर दिये, और रूक सौ रूपये पापा को दे देना। मै थोङी देर मे आती हूँ अब ..खङे क्यो हो ? ले पैसे। पापा को सौ रुपए ये बात मोनन के दिमाग में जगह नही बना पा रहा था। क्या सोच रहा है मम्मी ने मोनन से पूछा ? पापा भला आपसे पैसे क्यो मांगेंगे । मम्मी ने इत्मीनान होकर बताया कि असल में यह रूपये बैलून सजाने वाले को बदले मे देना है तुम्हे तो पता है कि उन्होंने ही ... उसकी मम्मी कुछ और कहते जा रही थी पर ना सुनकर जल्दी से हाथ से पैसे ले लिया। मोमबत्ती एवं पैसे लाकर पापा को दे दिया। पापा ने उस.. सौ रूपये को बैलून सजाने वाले के हाथ मे दे दिये। मोनन कुछ न कहा मगर मुरझाए फूल की तरह मुंह किये हट गया तथा एक कमरे में जा बैठा। जिससे  पापा-दादा और घर के सारे परिजन परेशान  हो गये। सुबह तो सबकुछ ठीक-ठाक था। मम्मी-पापा के पूछने पर कुछ नहीं बताया।
चलो.. न मोनन केक तुम्हारा इन्तज़ार कर रहा है। यह समय मज़ाक करने का नही है- दादा ने कहा। तब मोनन रूंधे हुए गले से कहता है- दादा नहीं काटने हैं केक, "नहीं लेने है उपहार मुझे। दादा ने इसका कारण पूछा? मोनन कहता है कि जब हम उसे दूध देने के बदले अपने किसी जन्मदिन पर केक नही खिलाते तब हमे उनके ' दूध से बने केक ' काटने का कोई अधिकार नहीं है।                          
   मोनन की बातों से प्रभावित होकर घर वालों ने वादा किया कि अब प्रत्येक वर्ष  जन्मदिन पर हम गाय को केक खिलाएगें। मोनन की बात हद तक सही थी। हम और हमारे साथ उस जन्मदिन में आये दो मित्र- अश्विनी,सोनू  प्रण लेता है। आज के बाद हम किसी का जन्मदिन मनवाने जाएगें तो उस बेज़ुबान पशु को केक भी  खिलाने को  कहेंगे या खिला दे। ...तभी जन्मदिन गीत सभी के कानों  में, गुंजी .. मोनन ने मोमबत्तियां फूंकी फिर केक को चाकू से काटी। हाँ हमने देखा अजीब-सी खुशी थी उसके चेहरे पर... उस खुशी का राज समझने वाले उसे दिल से आशीर्वाद दे रहे थे।



#लेखक -: राहुल कुमार, अलीगंज (जमुई)

"[उक्त आलेख लेखक(राहुल कुमार)की स्वरचित रचना है। यह रचना विशेषतः इस पाॅर्टल के लिए लिखी गई है। इनके लिखे गए आलेख न तो कहीं प्रकाशित की गई हैं, और न ही कहीं से उद्धत है। ]"