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फादर ही गॉड फादर है : आकाश सिंह यादव

Gidhaur.com:(पटना):-भोजपुरी फिल्मों में विगत एक दशक से परिपाटी से चल पड़ी है कि गायक नायक के तौर पर ज्यादा सफल रहे हैं रवि किशन के अपवाद को छोड़ दें तो भोजपुरी सिनेमा में विगत 15 वर्षों में उसी का सिक्का चला है जो गायकी के बाद अभिनय के क्षेत्र में आए हैं। लेकिन इस मिथक को तोड़ते हुए भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री में स्टारडम के साथ एक नायक का आगमन हुआ है जो हिंदी सिनेमा से कैरियर की शुरुआत करने के बाद भोजपुरी फिल्मों के तरफ आया है..नाम है आकाश सिंह यादव ।





आकाश को अभिनय अपने पिता भोजपुरी फिल्मों के महानायक कुणाल सिंह से विरासत में मिली है। आकाश की माता जी आरती भट्टाचार्य बांग्ला सिनेमा में एक बड़ा रही है। जब भी भोजपुरी सिनेमा की चर्चा की जाती है तो एक आधार स्तंभ के रूप में महानायक कुणाल सिंह जेहन में याद आते हैं।जाहिर सी बात है कि कुणाल सिंह के पुत्र होने के कारण आकाश सबसे अलग नजर आ रहे हैं ।भोजपुरी फिल्म तेरे जैसे यार कहां से भोजपुरी फिल्मों में अपने करियर की शुरुआत करने वाले आकाश अपनी पहली ही फिल्म से फिल्म समीक्षकों के नजर में आ चुके हैं आकाश की दूसरी भोजपुरी फिल्म भौजी पटनिया जिसमें उनके अपोजिट काजल है ।जल्द ही रिलीज होने वाली है तीसरी फिल्म जो सबसे ज्यादा चर्चा के केंद्र बिंदु में है वह है चोर मचाए शोर इस फिल्म में आकाश भोजपुरी इंडस्ट्री की दो बड़ी हीरोइन रानी चटर्जी और अंजना सिंह के साथ इश्क लड़ाते नजर आएंगे ।बातचीत के क्रम में आकाश ने बताया कि भोजपुरी फिल्मों की तुलना हिंदी फिल्मों से करना बेमानी है भोजपुरी का दर्शक वर्ग सीमित है आज भी भोजपुरी फिल्मों की आत्मा गांवों में ही बसती है आप हिंदी सिनेमा की कॉपी कर कर भोजपुरी सिनेमा का भला नहीं कर सकते और ना ही हिंदी सिनेमा के टिकट के दाम पर भोजपुरी दर्शकों को थिएटर तक खींच सकते है ।



आज भी भोजपुरी का दर्शक अपनी संस्कृति संस्कार अपनी भाषा की फिल्मों में ढूंढता है।आकाश कहते हैं कि एक महानायक के पुत्र होने के नाते उनके ऊपर जिम्मेदारियां बहुत ज्यादा है जब वह हिंदी फिल्मों में सक्रिय थे तो लोग पूछते थे कि आपके पिता भोजपुरी फिल्मों के महानायक हैं तो आप भोजपुरी फिल्में क्यों नहीं करते आज जबकि वह पूरी तैयारी के साथ भोजपुरी फिल्में कर रहे हैं तो लोग उनसे पूछते हैं कि हिंदी फिल्में क्यों नहीं। उनका कहना है कि एक कलाकार के तौर पर चाहे हिंदी फिल्म हो या भोजपुरी फिल्म आपको अपने टैलेंट के दम पर खुद को स्थापित करना होता है उन्हें पता है कि लोगों को उनसे काफी उम्मीदें हैं जिसे वह पूरा करने का प्रयास करते हैं , वह अपनी सभ्यता संस्कृति और संस्कार को रुपहले पर्दे पर उकेरना चाहते हैं। भोजपुरी फिल्मों में कलाकारों की लाबीबाजी पर इनका का कहना है कि एक अच्छी टीम से अच्छी फिल्म बन सकती है फिल्म की सफलता टीम भावना पर निर्भर करती है आप किसी खास लोगों के साथ फिल्में कर कर दर्शकों को मुर्ख नहीं बना सकते प्रतिभासंपन्न लोगों की एक अच्छी टीम है तो किसी फिल्म को सफल बना सकती है।भोजपुरी सिनेमा को लेकर उनके मन में कोई संशय नहीं वह कहते हैं कि भोजपुरी फिल्म उद्योग संभावनाओं से परिपूर्ण है।

इधर के कुछ  वर्षों में जो भोजपुरी के मूल दर्शक हैं वह भोजपुरी फिल्मों से विमुख हुए हैं उन्हें वापस लाने के लिए अच्छी साफ-सुथरी प्रयोगवादी फिल्मे बननी चाहिए क्योंकि भोजपुरी का दर्शक वर्ग आज भी गांव और छोटे शहरों में रहता है तो उनके मनोभाव को ध्यान में रखकर ही फिल्मों का निर्माण होना चाहिए उनका कहना है कि फिल्मों में भाषण नहीं होना चाहिए फिल्में लोग मनोरंजन के लिए देखते हैं अपने पिता कुणाल सिंह की कौन सी फिल्म उन्हें सबसे ज्यादा पसंद है इस सवाल के जवाब में आकाश ने बताया कि वैसे तो उनके पिता की सभी फिल्में यादगार है किंतु उनके पिता द्वारा अभिनीत फिल्म हमार दूल्हा उनकी सबसे पसंदीदा फिल्म है इस फिल्म में डबल रोल में थे आकाश कहते हैं कि इस फिल्म का सीक्वल बने तो वे उसमें काम करना चाहेंगे ऐसी उनकी तमन्ना है। एक सवाल के जवाब में आकाश ने कहा कि आप किसी बड़े स्टार के पुत्र हैं यह फिल्मों में सफल होने के लिए काफी नहीं ऐसे बहुत सारे कलाकार फिल्मों में सफल हुए हैं जिनके माता-पिता की कोई छोटा-मोटा रोजी-रोजगार करते  हैं या किसी कस्बाई इलाके से आते हैं और ऐसे बहुत सारे कलाकारों असफल हुए हैं जिनके माता-पिता अपने दौर के सबसे सफल कलाकार रहे हैं।वे कहते हैं कि इल्म की दौलत सबसे ज्यादा होती है बिना हुनर आप किसी भी क्षेत्र में सफल नहीं हो सकते और खासकर फिल्मों के क्षेत्र में तो बिल्कुल ही नहीं।
 उन्होंने कहा कि बचपन से ही जिस परिवेश में रहे हैं  वहीं से अभिनय उनके अंदर आया है अपने को खुशकिस्मत मानते हैं कि उनके माता-पिता अभिनय क्षेत्र से जुड़े  रहे हैं । भोजपुरी दर्शकों के नाम अपने संदेश में आकाश सिंह यादव ने कहा कि भोजपुरी के दर्शन सिनेमाघरों तक आए फिल्मों को देखने  अगर अच्छी फिल्मों को पसंद करेंगे तो निर्माता-निर्देशकों को उनकी पसंद के अनुसार अच्छी और साफ-सुथरी फिल्में बनानी पड़ेगी जिसे आप पूरे परिवार के साथ थिएटर में बैठकर देख सकते हैं उन्होंने राज्य सरकारों से भी भोजपुरी फिल्मों से हिंदी फिल्मों के बराबर का टेक्स्  ना लेने की अपील की।

अनूप नारायण
 (पटना)