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बिहार में रेलवे की बड़ी पहल, दीवारों पर झलक रही मिथिला की लोक संस्कृति

Gidhaur.com:(पटना):-रेलवे स्टेशन का ख्याल आते ही विज्ञापनों या फिर पान की पिक और गन्दगी वाले दीवाल सामने आ जाता है,लेकिन ऐसे हालत में कोई यदि यह कहता है की रेलवे स्टेशन सिर्फ ट्रेन की सवारी करने के लिए लोग नहीं जायेंगे बल्कि स्टेशन परिसर अब “आर्ट गैलरी “ के रूप में जानी जाएँगी तो चौक जाना लाजमी है।

भारतीय रेल कुछ ऐसा ही कर रहा है बिहार के विभिन्न रेलवे स्टेशनों पर,स्टेशन परिसर की गन्दी और बेजान दीवारों को अब विभिन्न चित्रकला के कलाकार मूर्त रूप दे रहे है, खूबसूरती ऐसी की नजरे नहीं हटती है।
यकीन न हो तो इस रिपोर्ट को देखे ..






पटना जंक्शन को भी मिथिला पेंटिंग से सजाया जा रहा है। बेजान दीवारों पर विभिन्न कंपनियों के होडिंग और बैनर की जगह खुबसूरत मिथिला पेंटिंग से सवांरा जा रहा है।पटना जक्शन पर भी हर दिवार पर मिथिला पेंटिंग के कलाकार अपनी कुची से रंग भर रहे है .मिथिला पेंटिंग रामायान, महाभारत के अलावे मिथिला के कई पर्व त्योहार व शुभ कायरें में प्रयोग होने वाला चित्र बनाये जा रहें हैं। जानकारी के अनुसार मुख्य थीम रामायाण जिसके तहत सीता जन्म, राम सीता वाटिका मिलन, धनुष भंग, जयमाला और विदाई के अलावे कृष्ण लीला, वासुदेव का जन्म के बाद यमुना पार कर मथुरा को ले जाना, माखन चोरी, कालिया मर्दन, कृष्ण रास, राधा कृष्ण प्रेमा लाप का अतिसुन्दर मिथिला पेंटिंग के माध्यम से चित्र बनाया जा रहा है।

 इसके अलावा विद्यापति ग्राम जीवन का विकास, ग्रामीण हाट, ग्रामीण खेल, गुली-डंडा, कितकित, पिढ़ो, मिथिला लोक नृत्य, पर्व त्योहार, झिझिया, सामा-चकेबा, छठ पर्व के अलावे कई ऐसे थीम यानी चित्र बनाये जा रहे हैं जो आलोकिक व आश्चर्यजनक है। पटना जंक्शन पर अपनी टीम के साथ आई मधुबनी चित्रकला में कई पुरस्कार प्राप्त लक्ष्मी देवी बताती है,की यह बिलकुल नया अनुभव है। आमतौर पर चित्रकला शांत वातावरण में बनाते थे लेकिन यहाँ पर स्टेशन पर अपनी टीम के साथ दीवारों पर पेंटिंग करते हुए भी अच्छा अनुभव हो रहा है . अब तो ऐसा लगता है की जैसे कैनवास पर ही बना रहे है . लक्ष्मी अपने बीस साथियों की टीम के साथ पटना जंक्शन को नया लुक देने में जुटी है . लक्ष्मी के अलावा भी कई अन्य संघटनो को इस काम में लगाया गया है .
दानापुर रेल मंडल के डीआरएम् रंजन प्रकाश ठाकुर के अनुसार पटना जंक्शन को जहा मिथिला पेंटिंग से संवारा जा रहा है वही राजेंद्र नगर स्टेशन को पटना की एक और प्रसिद्ध चित्रकला शैली “टिकुली आर्ट “से सजाया जायेगा . उन्होंने बताया की इस प्रयोग से मिथिला पेंटिंग को जहा एक नइ पहचान मिलेगी वही दूसरी तरफ कलाकारों को भी एक बड़ा प्लेटफोर्म मिल रहा है उन्हें रोजगार मिल रहा है . पटना जंक्शन और राजेंद्र नगर ही नहीं बल्कि अन्य स्टेशनों को भी इसी तरह विलुप्त होती चित्रकलाओ से सजाने की योजना है।

बिहार का मधुबनी स्टेशन ,एक ऐसा स्टेशन जो कुछ माह पहले तक देश भर के रेलवे स्टेशनों में सबसे गंदे स्टेशन के रूप में जाना जाता था .लेकिन आज इस छोटे से स्टेशन की पहचान बदल चुकी है .आज बिहार का यह छोटा सा स्टेशन अपनी खूबसूरती और कलाकृति के लिए अलग पहचान बना चूका है। दरअसल आज पूरा स्टेशन परिसर मधुबनी की पहचान मिथिला पेंटिंग से चमक उठा है। यह कोई स्टेशन परिसर नहीं बल्कि सचमुच एक “आर्ट गैलरी “का रूप ले चूका है। दरअसल भारत सरकार के रेल मंत्रालय ने मिथिला को विश्व स्तर पर सम्मान दिलाने के लिए एक नई योजना बनाकर देश के सभी रेलवे स्टेशन पर मिथिला पेंटिंग कर सम्मान दिलाने का काम का काम किया है। इसी दरम्यान भारत सरकार के नये रेल मंत्री पीयुष गोयल ने मधुबनी पेंटिंग को मधुबनी स्टेशन के नाम से विख्यात करने के लिए एक नई योजना बनाई।

मधुबनी स्टेशन के करीब सात हजार स्क्वायर फीट में मिथिला पेंटिंग की गई है जिसको कुल 46 छोटे-बड़े थीम में बांट कर सौ से अधिक मिथिला पेंटिंग कलाकार के द्वारा श्रम दान के माध्यम से मिथिला पेंटिंग बनाया गया है।
 अनूप नारायण
(पटना)
 28-04-2018