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बड़ी खबर : नीतीश कुमार ने दिया बिहार के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा


बुधवार की देर शाम बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। ज्ञात हो की जदयू विधानमंडल दल की बैठक पहले शुक्रवार को बुलाई गई थी लेकिन फिर इसे आज ही दो दिन पूर्व बुला लिया गया। इस बैठक के बाद नीतीश कुमार ने फैसला लेते हुए राज्यपाल से मिलने का समय माँगा जिसके बाद राजभवन की ओर से उन्हें तुरंत का समय दे दिया गया और वो बैठक ख़त्म करते ही राज्यपाल केसरी नाथ त्रिपाठी से मिलने राजभवन निकल गए। वहां उन्होंने राज्यपाल को अपना इस्तीफा सौंपा जिसे स्वीकार कर लिया गया। इस्तीफे के बाद राजभवन से निकलकर मीडिया से बात करते हुए नीतीश कुमार ने कहा कि हमने गठबंधन धर्म निभाने की पूरी कोशिश की। इस माहौल में मेरे लिए काम करना मुश्किल था। जहाँ तक संभव हो सका चलाया। मेरे लिए सरकार चलाना संभव नहीं था। अंतरात्मा की आवाज सुनी। मैंने सबसे रास्ता ढूंढने को कहा था। मैं अपना रुख नहीं बदल सकता। लालू चाहते थे की संकट में मैं रक्षा करूँ। इस्तीफे से पहले लालू जी को बताया। ये संकट खुद लाया गया संकट था। मेरी अपनी सोच है अपनी सोच नहीं बदल सकता। तेजस्वी को आरोपों पर सफाई देना जरुरी था। वो इस्तीफा देते तो और ऊँचे चले जाते। कोविंद के समर्थन पर मुझे निशाना बनाया। मैंने राज्यपाल को इस्तीफा सौंपा। राज्यपाल ने मेरा इस्तीफा स्वीकारा। बीजेपी से समर्थन के सवाल पर बोले नितीश - आगे क्या होगा देखते रहिये। 

यहाँ यह ध्यान देने योग्य कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अपनी पाक-साफ़ छवि और भ्रष्टाचार के खिलाफ स्पष्ट नीति के साथ अतीत में भी भ्रष्टाचार के मामलों में इस्तीफा लेते रहे हैं। लेकिन आज दिन में ही राजद द्वारा बुलाई गई विधानमंडल दल की बैठक और यादव परिवार सहित राजद के अड़ियल रवैये और तेजस्वी के इस्तीफा नहीं देने की बात तय होने के बाद उन्होंने खुद ही इस्तीफा दे दिया। 

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के इस्तीफे के साथ ही लगभग पंद्रह दिनों से बिहार में चल रहे सियासी खींचतान का अंत हो गया। इसके साथ ही जदयू-कांग्रेस-राजद की 20 माह पुरानी महागठबंधन की सरकार का अंत हो गया। सीबीआई की एफआईआर में नामजद डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव के इस्तीफे के लिए भाजपा लगातार मांग करती रही और विधानमंडल के मॉनसून सत्र को बाधित करने का अल्टीमेटम दिया था। लेकिन आज राजद विधानमंडल की बैठक में यह साफ़ होने के बाद की तेजस्वी इस्तीफा नहीं देंगे, नीतीश कुमार के पास दो ही विकल्प था कि या तो वह तेजस्वी को बर्खास्त करें या फिर खुद इस्तीफा दें। जदयू ने भी कई बार मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस की बात कही।  ऐसे में नीतीश ने खुद ही इस्तीफा दे दिया। 

नीतीश कुमार अपनी भ्रष्टाचार  विरोधी और ईमानदार नेता वाली छवि के लिए जाने जाते हैं। उनके इस्तीफे के बाद बिहार में नई सरकार के लिए उनके भाजपा के साथ जाने के कयास भी लगाए जा रहे हैं। 
(सुशान्त साईं सुन्दरम)
gidhaur.com | 26/07/2017, बुधवार