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मंगलवार, 14 जुलाई 2026

टीबी मुक्त भारत अभियान को रफ्तार, जमुई में 429 मरीजों की पहचान कर उपचार शुरू

जमुई/बिहार। प्रधानमंत्री के "टीबी मुक्त भारत अभियान" के तहत जिले को पूर्णतः क्षय रोग (टीबी) मुक्त बनाने की दिशा में स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन ने अपनी मुहिम तेज कर दी है। इसी क्रम में बिहार सरकार के मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत की अध्यक्षता में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई, जिसमें राज्यभर में संचालित "टीबी मुक्त बिहार" अभियान की प्रगति की विस्तृत समीक्षा की गई। बैठक में जमुई के जिला पदाधिकारी ने ऑनलाइन भाग लेते हुए जिले में चल रहे अभियान की उपलब्धियों, अब तक की प्रगति तथा आगामी कार्ययोजना से मुख्य सचिव को अवगत कराया।

जिले में 24 मार्च 2026 से प्रारंभ हुआ "टीबी मुक्त जमुई" अभियान आगामी 14 अगस्त 2026 तक लगातार संचालित किया जाएगा। अभियान का मुख्य उद्देश्य जिले के प्रत्येक संभावित मरीज की समय पर पहचान कर उन्हें शीघ्र उपचार उपलब्ध कराना तथा टीबी संक्रमण की श्रृंखला को पूरी तरह समाप्त करना है। जिला पदाधिकारी स्वयं इस अभियान की नियमित समीक्षा कर रहे हैं ताकि स्वास्थ्य विभाग की सभी टीमें पूरी सक्रियता और गंभीरता के साथ निर्धारित लक्ष्य को समय पर पूरा कर सकें।

स्वास्थ्य विभाग द्वारा जिले में कुल 1 लाख 72 हजार लोगों की स्क्रीनिंग का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इस लक्ष्य के अनुरूप 12 जुलाई 2026 तक 58,388 लोगों का विवरण निक्षय पोर्टल पर अपलोड किया जा चुका है। अभियान के दौरान संदिग्ध मरीजों की पहचान कर उनकी आधुनिक तकनीक से जांच भी कराई जा रही है। अब तक 1,049 लोगों की TrueNAAT एवं माइक्रोस्कोपी जांच तथा 3,152 लोगों का चेस्ट एक्स-रे कराया गया है। इन जांचों के आधार पर 429 टीबी मरीजों की पहचान की गई है, जिन्हें तत्काल उपचार से जोड़ते हुए नियमित दवा उपलब्ध कराई जा रही है।

पिछले एक सप्ताह (6 जुलाई से 12 जुलाई) के दौरान अभियान में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की गई। स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने 43,085 लोगों की स्क्रीनिंग की तथा 40,147 लोगों का निक्षय पोर्टल पर पंजीकरण किया। इस अवधि में 376 TrueNAAT एवं माइक्रोस्कोपी जांच तथा 641 चेस्ट एक्स-रे किए गए, जिनके माध्यम से 25 नए टीबी मरीजों की पहचान कर उन्हें तुरंत उपचार के दायरे में शामिल किया गया। अधिकारियों का कहना है कि लगातार चल रहे सर्वेक्षण और जांच अभियान से जिले में छिपे हुए मरीजों की पहचान आसान हो रही है।
जिला पदाधिकारी ने जिलेवासियों से इस अभियान में सक्रिय भागीदारी निभाने की अपील करते हुए कहा कि टीबी एक गंभीर लेकिन पूरी तरह से इलाज योग्य बीमारी है। यदि समय पर इसकी पहचान हो जाए और मरीज नियमित रूप से दवाइयों का सेवन करे, तो वह पूर्णतः स्वस्थ हो सकता है। उन्होंने बताया कि सरकार द्वारा सभी सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में टीबी की जांच, दवाइयां और उपचार पूरी तरह नि:शुल्क उपलब्ध कराया जा रहा है। इसके साथ ही निक्षय पोषण योजना के तहत मरीजों को पौष्टिक आहार के लिए वित्तीय सहायता भी दी जाती है।

उन्होंने लोगों से आग्रह किया कि यदि किसी व्यक्ति को दो सप्ताह से अधिक समय तक लगातार खांसी, बुखार, वजन कम होना या रात में अत्यधिक पसीना आने जैसे लक्षण दिखाई दें तो इसे नजरअंदाज न करें। ऐसे लोगों को तुरंत नजदीकी सरकारी अस्पताल अथवा स्वास्थ्य विभाग द्वारा लगाए जा रहे शिविरों में ले जाकर नि:शुल्क जांच कराएं। उन्होंने कहा कि बीमारी को छिपाने से समस्या बढ़ती है, जबकि समय पर जांच और उपचार से टीबी को पूरी तरह हराया जा सकता है।

जिला प्रशासन ने विश्वास जताया है कि जनसहभागिता, समय पर जांच और नियमित उपचार के माध्यम से जमुई को जल्द ही टीबी मुक्त जिला बनाने का लक्ष्य हासिल किया जा सकेगा। प्रशासन ने सभी नागरिकों से इस जनस्वास्थ्य अभियान में सहयोग करने और टीबी के प्रति जागरूकता फैलाने की अपील की है।

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