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मंगलवार, 14 जुलाई 2026

जमुई : विश्व उम्मीद दिवस पर ‘चाय पर चर्चा’ का हुआ आयोजन

जमुई/बिहार। विश्व उम्मीद दिवस के अवसर पर रविवार को नगर परिषद क्षेत्र के महाराजगंज मोहल्ला में "मानव जीवन में आशा और उम्मीद का महत्व" विषय पर एक विशेष ‘चाय पर चर्चा’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में न्यायिक, शैक्षणिक एवं सामाजिक क्षेत्र से जुड़े कई प्रतिष्ठित लोगों ने भाग लिया और उम्मीद, विश्वास तथा सकारात्मक सोच को मानव जीवन, न्याय व्यवस्था और समाज के विकास का मूल आधार बताया। वक्ताओं ने कहा कि आशा और उम्मीद ही वह शक्ति है, जो कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी मनुष्य को आगे बढ़ने का साहस देती है।

कार्यक्रम में मुख्य रूप से उपस्थित स्थानीय व्यवहार न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता एवं सरकारी अधिवक्ता जी.पी. प्रभात कुमार भगत ने कहा कि "उम्मीद न्यायपालिका की आत्मा है।" उन्होंने कहा कि प्रत्येक पीड़ित व्यक्ति न्यायालय की चौखट पर इसी विश्वास और उम्मीद के साथ पहुंचता है कि उसे निष्पक्ष न्याय मिलेगा। न्याय व्यवस्था का उद्देश्य केवल अपराधियों को दंडित करना नहीं है, बल्कि समाज में कानून के प्रति विश्वास और न्याय की आशा को बनाए रखना भी है। यदि लोगों का न्यायपालिका पर भरोसा बना रहता है, तभी लोकतंत्र मजबूत होता है।

वरिष्ठ अधिवक्ता रामचंद्र रैदास ने कहा कि पूरी न्याय प्रणाली उम्मीद और विश्वास की बुनियाद पर खड़ी है। आम नागरिक चाहे कितनी भी कठिन परिस्थितियों में क्यों न हो, उसके मन में यह विश्वास रहता है कि अंततः न्यायालय उसे न्याय अवश्य दिलाएगा। यही विश्वास लोकतांत्रिक व्यवस्था की सबसे बड़ी ताकत है।

कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित राजकीय डिग्री महाविद्यालय, अलीगंज के प्राचार्य डॉ. गौरी शंकर पासवान ने उम्मीद के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि "उम्मीद सपनों की पहली सीढ़ी है।" उन्होंने कहा कि प्रत्येक उपलब्धि की शुरुआत उम्मीद से होती है। उम्मीद मानव जीवन की संजीवनी है, जो व्यक्ति के भीतर नई ऊर्जा, आत्मविश्वास और सकारात्मक सोच का संचार करती है। उन्होंने कहा कि आशा और विश्वास मानसिक शक्ति के सबसे बड़े अस्त्र हैं तथा यही जीवन को निरंतर आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं।

डॉ. पासवान ने कहा कि उम्मीद कभी हारती नहीं, बल्कि वह केवल मनुष्य के धैर्य की परीक्षा लेती है। जो व्यक्ति धैर्य और विश्वास बनाए रखता है, अंततः सफलता उसी के कदम चूमती है। उन्होंने कहा कि जहां उम्मीद जीवित रहती है, वहीं भविष्य सुरक्षित रहता है। उन्होंने आर्थिक दृष्टिकोण से भी उम्मीद के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि किसी भी देश की अर्थव्यवस्था का सबसे बड़ा इंजन केवल पूंजी नहीं, बल्कि लोगों की उम्मीद होती है। जब नागरिकों को अपने भविष्य पर विश्वास होता है, तभी वे निवेश करते हैं, उद्योग स्थापित करते हैं और विकास की नई संभावनाओं का सृजन होता है।
वरिष्ठ अधिवक्ता मुरारी प्रसाद ने कहा कि उम्मीद न्याय का प्रथम सोपान है और विश्वास उसका सबसे मजबूत आधार। आशा और उम्मीद ही मनुष्य को विपरीत परिस्थितियों में भी सत्य, न्याय और नैतिकता के मार्ग पर अडिग रहने की प्रेरणा देती है। उन्होंने कहा कि यदि व्यक्ति के भीतर उम्मीद जीवित है, तो वह किसी भी चुनौती का सामना कर सकता है।

के.के.एम. कॉलेज के अर्थशास्त्र विभाग के सहायक प्राध्यापक सरदार राम ने कहा कि उम्मीद संभावनाओं का अनंत आकाश है। यह केवल मानसिक शक्ति ही नहीं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक विकास का भी प्रमुख आधार है। उन्होंने कहा कि आशा हर उपचार की सबसे प्रभावी मानसिक दवा है और सकारात्मक सोच व्यक्ति को स्वस्थ एवं ऊर्जावान बनाए रखती है। समाज और राष्ट्र की प्रगति भी नागरिकों की आशावादी सोच पर निर्भर करती है।

कार्यक्रम में पुस्तकालयाध्यक्ष रामचरितमानस ने कहा कि प्रत्येक पुस्तक पाठक के मन में नई उम्मीद, नई सोच और सकारात्मक दृष्टिकोण का दीप जलाती है। ज्ञान मनुष्य के व्यक्तित्व को समृद्ध बनाता है और उसे जीवन में आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है।

चाय पर चर्चा के दौरान उपस्थित अन्य बुद्धिजीवियों एवं गणमान्य लोगों ने भी अपने विचार साझा करते हुए कहा कि उम्मीद वह अदृश्य शक्ति है, जो निराशा के घोर अंधकार में भी प्रकाश की किरण बनकर मनुष्य को आगे बढ़ने का साहस देती है। वक्ताओं ने कहा कि आशा, विश्वास और सकारात्मक सोच ही मानव जीवन को सार्थक बनाते हैं तथा एक बेहतर, शांतिपूर्ण और समृद्ध समाज के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

कार्यक्रम का समापन इस संकल्प के साथ हुआ कि समाज में निराशा के स्थान पर आशा, सकारात्मक सोच और विश्वास का वातावरण विकसित करने के लिए ऐसे जागरूकता कार्यक्रम आगे भी निरंतर आयोजित किए जाएंगे।

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