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मंगलवार, 14 जुलाई 2026

बिहार के गांवों में हर घर पर लगेगा टैक्स! ग्राम पंचायतें वसूलेंगी सालाना औसतन 1200 रुपये

पटना/बिहार। राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को जल्द ही ग्राम पंचायतों को विभिन्न नागरिक सुविधाओं के लिए सालाना टैक्स देना पड़ सकता है। राज्य सरकार इस दिशा में बड़ा कदम उठाने की तैयारी में है। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत राज्य की सभी ग्राम पंचायतें प्रत्येक घर से औसतन 1200 रुपये प्रतिवर्ष कर वसूलेंगी। इस राशि का उपयोग गांवों में साफ-सफाई, पेयजल, स्ट्रीट लाइट और अन्य बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनाने में किया जाएगा।

जानकारी के अनुसार, 16वें केंद्रीय वित्त आयोग की अनुशंसाओं के अनुरूप पंचायती राज विभाग ने इस संबंध में प्रस्ताव तैयार किया है। वित्त विभाग ने भी इस प्रस्ताव को अपनी मंजूरी दे दी है। अब इस पर राज्य मंत्रिमंडल (कैबिनेट) की अंतिम स्वीकृति मिलते ही नई व्यवस्था पूरे राज्य में लागू की जा सकती है।

ग्राम पंचायतों को आत्मनिर्भर बनाने की पहल
केंद्रीय वित्त आयोग का उद्देश्य ग्राम पंचायतों को आर्थिक रूप से अधिक मजबूत और आत्मनिर्भर बनाना है। आयोग का मानना है कि पंचायतों के पास अपनी आय के स्थायी स्रोत होने चाहिए, ताकि वे स्थानीय स्तर पर विकास कार्यों और नागरिक सुविधाओं का बेहतर संचालन कर सकें। यदि पंचायतें स्थानीय स्तर पर कर संग्रह नहीं करती हैं, तो भविष्य में वित्त आयोग से मिलने वाली अनुदान राशि पर भी इसका असर पड़ सकता है।

इन सेवाओं के लिए देना होगा टैक्स
नई व्यवस्था लागू होने के बाद ग्रामीणों से कई प्रकार के स्थानीय कर और उपयोग शुल्क लिए जाएंगे। इनमें मुख्य रूप से—
  • होल्डिंग टैक्स,
  • सफाई शुल्क,
  • पेयजल आपूर्ति शुल्क,
  • स्ट्रीट लाइट रखरखाव शुल्क,
  • होर्डिंग एवं बैनर शुल्क,
  • तथा अन्य स्थानीय सेवाओं से जुड़े कर शामिल होंगे।
इसके अलावा 'हर घर नल का जल' योजना के तहत उपलब्ध कराए जा रहे पेयजल की आपूर्ति के लिए भी अनिवार्य उपयोग शुल्क वसूले जाने का प्रावधान किया गया है।

आवासीय और व्यावसायिक भवनों के लिए अलग होगी दर
रकार के प्रस्ताव के अनुसार सभी भवनों पर एक समान कर नहीं लगेगा। आवासीय भवनों पर अपेक्षाकृत कम टैक्स, जबकि व्यावसायिक भवनों पर अधिक कर लगाया जाएगा। टैक्स की दर भवन के उपयोग, आकार, स्थान और व्यवसाय की प्रकृति के आधार पर तय होगी।

मुख्य सड़क किनारे स्थित भवनों, बाजार क्षेत्रों में बने मकानों तथा व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर अपेक्षाकृत अधिक कर लगाया जा सकता है, जबकि सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित सामान्य आवासीय भवनों पर कम कर निर्धारित किए जाने की संभावना है।

कैबिनेट की मंजूरी के बाद होगी अधिसूचना जारी
फिलहाल प्रस्ताव को वित्त विभाग की मंजूरी मिल चुकी है। अब राज्य कैबिनेट की स्वीकृति मिलने के बाद इसकी आधिकारिक अधिसूचना जारी की जाएगी। इसके बाद ग्राम पंचायतों को कर निर्धारण, वसूली और स्थानीय विकास कार्यों के लिए राशि के उपयोग संबंधी विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे।

नई व्यवस्था लागू होने के बाद बिहार के ग्रामीण क्षेत्रों में भी नगर निकायों की तर्ज पर स्थानीय कर व्यवस्था लागू होगी, जिससे पंचायतों की आय बढ़ेगी और स्थानीय स्तर पर विकास योजनाओं के संचालन में वित्तीय मजबूती मिलने की उम्मीद है।

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