गिद्धौर/जमुई। गिद्धौर प्रखंड में सनातन संस्कृति सेवा समिति के तत्वावधान में 2 से 10 फरवरी तक आयोजित होने जा रहे नौ दिवसीय विराट महायज्ञ को लेकर क्षेत्र में जबरदस्त उत्साह देखा जा रहा है। महायज्ञ की सभी तैयारियां अब अंतिम चरण में पहुंच चुकी हैं। इसी क्रम में समिति की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें आयोजन की रूपरेखा, व्यवस्थाओं और कार्यक्रमों की विस्तृत समीक्षा की गई।
समिति के अनुसार महायज्ञ की शुरुआत 1 फरवरी को भव्य कलश यात्रा से होगी। इस विशाल कलश यात्रा की तैयारियां जोरों पर हैं, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शामिल होने की उम्मीद है। कलश यात्रा के साथ ही पूरे इलाके में धार्मिक और सांस्कृतिक वातावरण बन जाएगा। आयोजन स्थल पंच मंदिर एवं दुर्गा मंदिर के समीप नदी किनारे का मैदान निर्धारित किया गया है, जहां 1 फरवरी से मेला जैसा नजारा देखने को मिलेगा।
इस विराट धार्मिक आयोजन को लेकर समिति की ओर से देश और प्रदेश की कई प्रमुख हस्तियों को आमंत्रण भेजा गया है। आमंत्रित अतिथियों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत, केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान, बिहार सरकार की मंत्री श्रेयसी सिंह, सांसद अरुण भारती, झाझा विधायक दामोदर रावत तथा बिहार राज्य धार्मिक न्यास परिषद के अध्यक्ष प्रो. रणबीर नंदन सहित कई अन्य राजनीतिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक क्षेत्र की प्रमुख हस्तियां शामिल हैं। समिति को उम्मीद है कि इन विशिष्ट अतिथियों की उपस्थिति से आयोजन की गरिमा और भी बढ़ेगी।
समिति के कोषाध्यक्ष बिट्टू कुमार ने बताया कि महायज्ञ को सफल बनाने के लिए समिति के सदस्यों द्वारा सहयोग राशि का संकलन किया जा रहा है। साथ ही आसपास के गांवों से श्रद्धालु स्वेच्छा से खाद्यान्न एवं अन्य आवश्यक सामग्री भी उपलब्ध करा रहे हैं। उन्होंने बताया कि 2 से 10 फरवरी तक प्रतिदिन संध्या काल में रामकथा का आयोजन किया जाएगा, वहीं रामलीला मंचन भी आकर्षण का केंद्र रहेगा।
नौ दिवसीय विराट महायज्ञ के दौरान श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए जा रहे हैं। स्थानीय प्रशासन लगातार आयोजन स्थल का निरीक्षण कर रहा है और शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठा रहा है।
बैठक के दौरान समिति के सदस्यों ने एकजुट होकर समर्पण और सेवाभाव से कार्यक्रम को सफल बनाने का संकल्प लिया। सभी ने कहा कि यह महायज्ञ न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक होगा, बल्कि सामाजिक एकता और सांस्कृतिक चेतना को भी मजबूत करेगा।







