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रविवार, 4 जनवरी 2026

गिद्धौर के लाल डीयू के सहायक प्राध्यापक उत्तम कुमार का काव्य संग्रह ‘स्रष्टा’ प्रकाशित

गिद्धौर/जमुई (Gidhaur/Jamui), 4 जनवरी 2026, रविवार : गिद्धौर निवासी एवं दिल्ली विश्वविद्यालय के सत्यवती कॉलेज (सांध्य) में हिंदी विभाग के सहायक प्राध्यापक उत्तम कुमार के प्रथम काव्य संग्रह ‘स्रष्टा’ का प्रकाशन साहित्य जगत में चर्चा का विषय बना हुआ है। काव्य संग्रह के प्रकाशित होते ही जिले सहित राज्य और देशभर के साहित्यप्रेमियों, बुद्धिजीवियों एवं शुभचिंतकों ने उन्हें बधाइयाँ और शुभकामनाएँ दी हैं।

उत्तम कुमार ने बताया कि ‘स्रष्टा’ की सभी कविताएँ उनके जीवन के गहरे आत्मिक अनुभवों से जुड़ी हुई हैं। इस संग्रह में कल्पना का नहीं, बल्कि आत्मानुभूति का प्रमुख स्थान है। उन्होंने कहा कि संग्रह की पहली कविता ‘मौन’ नवरात्रि के दौरान नौ दिनों के मौन व्रत का प्रतिफल है, जो साधना और आत्मसंयम से उपजी काव्य-रचना है। इसी तरह ‘जम से पड़ा झमेला’, ‘कला पुरुष’, ‘आत्मराग’, ‘अस्सी घाट’ जैसी कविताएँ भी गहन आत्ममंथन और जीवन-संघर्ष की उपज हैं।

कवि के अनुसार, इस काव्य संग्रह में एक संवेदनशील हृदय को न समझे जाने की पीड़ा, आत्मधिक्कार और आत्म-परिष्कार—दोनों भाव स्पष्ट रूप से दृष्टिगोचर होते हैं। आचार्य रामचंद्र शुक्ल के शब्दों में कहें तो यह ‘विरुद्धों का आत्मसामंजस्य’ है। कुछ कविताओं में आसपास के सामाजिक परिवेश की झलक है, तो कुछ में प्रकृति के नैसर्गिक सौंदर्य को बालसुलभ दृष्टि से देखने का प्रयास किया गया है।

लेखक उत्तम कुमार का परिचय
सत्यवती कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय की सहायक प्राध्यापक डॉ. मनोरमा मिश्रा ने लिखा है –
उत्तम कुमार जैसा नाम अपने आप में स्नेह और उम्मीद से भरा है। कहा जाता है कि पूत के पाँव पालने में ही दिख जाते हैं, लेकिन नियति की कठोरता ने उन्हें संघर्षों से होकर गुजरने पर विवश किया। उनकी जीवन-पीड़ा और टीस कविता में ढलकर एक सशक्त अभिव्यक्ति बन गई। उन्होंने निराला की पंक्तियों का उल्लेख करते हुए कहा कि उत्तम कुमार ने संघर्षों से हार न मानने की जिजीविषा को अपनी कविताओं में जीवंत किया है।

सत्यवती कालेज में अंग्रेजी की प्राध्यापिका एवं वर्ष 2020 में साहित्य एकेडमी अवार्ड से सम्मानित अंतरराष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त कवयित्री डॉ. अनामिका ने पुस्तक की भूमिका लिखी है। जिसमें वे लिखती हैं -
परिवारजनों की लगातार असामयिक मृत्यु, मणिकर्णिका घाट का मरघट वैराग्य, वहीं कहीं एक विकट कौंध उस जीवन - दायिनी की जिसे प्रेम कहते हैं - विरुद्धों का यह सामंजस्य भी इनकी कविता का ताना - बाना अलग तरह से बुनता है। जिसने एक भी असामयिक मौत करीब से देखी हो और एक अधूरा , प्रायः इकतरफ़ा प्रेम किया हो, वह रातों-रात सयाना तो हो ही जाता है। इस सयानेपन की आहट अनेक कविताओं में है।
उत्तम कुमार की शैक्षणिक व साहित्यिक यात्रा
उत्तम कुमार का जन्म 1992 में बिहार के जमुई जिले में हुआ। उनकी प्रारंभिक शिक्षा जमुई में हुई। इसके बाद उन्होंने पटना कॉलेज से स्नातक, हिंदू कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय से परास्नातक, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र से भारतीय साहित्य में उपाधिपत्र प्राप्त किया। वे नेट-जेआरएफ उत्तीर्ण हैं तथा दिल्ली विश्वविद्यालय से पीएच.डी. शोधरत हैं। उनके लेख, शोध-लेख एवं समीक्षाएँ विभिन्न राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुकी हैं। वर्तमान में वे सत्यवती कॉलेज (सांध्य), दिल्ली विश्वविद्यालय में हिंदी विभाग के सहायक प्राध्यापक के रूप में कार्यरत हैं। मूल रूप से वे जमुई जिले के गंगरा गांव के निवासी हैं। साहित्य जगत में उत्तम कुमार अपने उपनाम "कलापुरुष" के नाम से भी जाने जाते हैं।

काव्य संग्रह 'स्रष्टा’ को मिला है अंतरराष्ट्रीय सम्मान
उत्तम कुमार के काव्य संग्रह ‘स्रष्टा’ को अमेरिकी पोएटिक सोसाइटी द्वारा एमिली डिकिंसन अवॉर्ड से सम्मानित किया गया है, जो उनके साहित्यिक योगदान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिली बड़ी पहचान मानी जा रही है। यह काव्य संग्रह बुक लीफ पब्लिशिंग द्वारा प्रकाशित किया गया है और अमेज़न तथा बुक लीफ की वेबसाइट पर हार्डकॉपी और ई-बुक दोनों रूपों में उपलब्ध है।

कुल मिलाकर, ‘स्रष्टा’ केवल एक काव्य संग्रह नहीं, बल्कि आत्मानुभूति, संघर्ष, साधना और संवेदना का सजीव दस्तावेज है, जिसने जमुई जिले को एक बार फिर साहित्यिक मानचित्र पर गौरवान्वित किया है।

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