जमुई/बिहार। गिद्धौर की ऐतिहासिक शारदीय दुर्गा पूजा सह लक्ष्मी पूजा को भव्य और आकर्षक स्वरूप देने के लिए पूजा समिति का जनसंपर्क अभियान तेज हो गया है। इसी क्रम में मंगलवार को समिति के पदाधिकारियों ने जमुई पहुंचकर जिले की नामी-गिरामी हस्तियों, प्रतिष्ठित व्यवसायियों और गणमान्य लोगों से मुलाकात की तथा पूजा आयोजन के लिए सहयोग राशि प्राप्त की। इस दौरान सुप्रसिद्ध हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. नीरज साह सहित कई प्रतिष्ठित लोगों ने धार्मिक आयोजन में अपना सहयोग दिया।
जमुई के प्रतिष्ठित लोगों से मिला सहयोग
गिद्धौर शारदीय दुर्गा पूजा सह लक्ष्मी पूजा समिति के पदाधिकारियों ने जमुई के सुप्रसिद्ध हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. नीरज साह, कॉन्ट्रैक्टर विवेक भालोटिया, प्रवीण भालोटिया, अशोक सिंह तथा खैरमा निवासी मनोज साव से संपर्क कर सहयोग राशि प्राप्त की। समिति के इस अभियान का उद्देश्य जिले के प्रबुद्ध नागरिकों, व्यवसायियों और समाज के गणमान्य लोगों की सहभागिता से गिद्धौर के ऐतिहासिक पूजा आयोजन को भव्य बनाना है।
सहयोग राशि संग्रह के दौरान समिति के कार्यकारी अध्यक्ष राजीव कुमार साव उर्फ पिंकू, सचिव सुबोध कुमार सिंह उर्फ काजू, कोषाध्यक्ष सुबोध कुमार केशरी, उप सचिव राजेश कुमार उर्फ पाजो जी एवं उप सचिव प्रभाकर कुमार चिंटू मौजूद रहे।
ऐतिहासिक दुर्गा पूजा की तैयारियां तेज
गिद्धौर की दुर्गा पूजा अपनी ऐतिहासिक परंपरा और धार्मिक महत्ता के लिए प्रसिद्ध है। नागी, नकटी और उलाई नदियों के संगम तट पर स्थित मां दुर्गा के मंदिर में चंदेल राजाओं के समय से जुड़ी परंपराओं के अनुरूप पूजा-अर्चना की जाती रही है। प्रत्येक वर्ष इस धार्मिक आयोजन में गिद्धौर सहित आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं।
जनसहयोग से भव्य होगा पूजा और मेले का आयोजन
दुर्गा पूजा के साथ शरद पूर्णिमा पर मां महालक्ष्मी की पूजा और मेले के आयोजन को लेकर समिति के सदस्य लगातार तैयारियों में जुटे हैं। इसके लिए गिद्धौर और आसपास के क्षेत्रों के साथ जमुई में भी सहयोग राशि संग्रह किया जा रहा है। समिति का प्रयास है कि श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े इस ऐतिहासिक आयोजन को सामूहिक सहयोग से भव्य एवं व्यवस्थित बनाया जाए।
जमुई की प्रतिष्ठित हस्तियों से प्राप्त सहयोग को आयोजन की तैयारियों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। समिति के पदाधिकारी विभिन्न लोगों से संपर्क कर रहे हैं, ताकि जनभागीदारी के माध्यम से गिद्धौर की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपरा को आगे बढ़ाया जा सके।

