- जमुई की बलुई मिट्टी में स्वीट कॉर्न की खेती को बताया लाभकारी
- उन्नत प्रजातियों और वैज्ञानिक तकनीक अपनाने पर दिया जोर
जमुई/बिहार। जिले के किसानों की आमदनी बढ़ाने और ग्रामीण युवाओं के लिए स्वरोजगार के नए अवसर सृजित करने के उद्देश्य से मीठे मक्के (स्वीट कॉर्न) की खेती को बढ़ावा देने पर जोर दिया जा रहा है। कृषि विज्ञान केंद्र, जमुई के अध्यक्ष डॉ. सुधीर कुमार सिंह ने सगुण वाटिका में आयोजित रबी कर्मशाला में किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि मीठे मक्के की खेती किसानों के लिए आमदनी का एक बेहतर माध्यम साबित हो सकती है।
बलुई मिट्टी में आसानी से हो सकती है खेती
डॉ. सुधीर कुमार सिंह ने बताया कि जमुई जिले की बलुई मिट्टी में स्वीट कॉर्न की खेती आसानी से की जा सकती है। किसानों को बेहतर उत्पादन के लिए वैज्ञानिक कृषि तकनीकों को अपनाना चाहिए। उन्होंने खेत की तैयारी, उर्वरकों के संतुलित उपयोग और बेड बनाकर बुवाई करने की तकनीक पर विस्तार से जानकारी दी।
उन्नत प्रजातियों के चयन पर दिया जोर
उन्होंने बताया कि प्रति एकड़ खेती के लिए 8 से 10 टन गोबर की खाद के साथ नाइट्रोजन 50 किलो, फास्फोरस 25 किलो और पोटाश 15 से 17 किलो तक उपयोग करने की सलाह दी। बेहतर उत्पादन के लिए शुगर-75, माधुरी, प्रिया, मिठास, मेरिट-4513 और एसबीआई-6881 जैसी प्रजातियों का चयन किया जा सकता है। बुवाई के लिए प्रति एकड़ लगभग चार किलो बीज पर्याप्त बताया गया।
एक एकड़ में 30 से 32 हजार भुट्टों के उत्पादन की संभावना
डॉ. सिंह के अनुसार, स्वीट कॉर्न की खेती से प्रति एकड़ लगभग 30 से 32 हजार भुट्टों का उत्पादन प्राप्त हो सकता है। बाजार में इसकी मांग और कीमत सामान्य मक्के की तुलना में अधिक होने से किसानों को बेहतर आर्थिक लाभ मिलने की संभावना रहती है।
युवाओं के लिए रोजगार का भी बनेगा माध्यम
उन्होंने बताया कि बाजार में उबले हुए मीठे मक्के का एक भुट्टा सामान्यतः 40 से 50 रुपये तक बिकता है। ऐसे में इसकी खेती के साथ भुट्टों की बिक्री ग्रामीण युवाओं के लिए स्वरोजगार का नया अवसर बन सकती है। डॉ. सुधीर कुमार सिंह ने किसानों और कर्मशाला में शामिल प्रतिभागियों से जिले में स्वीट कॉर्न की खेती को बढ़ावा देने तथा वैज्ञानिक पद्धति अपनाकर कृषि से होने वाली आमदनी बढ़ाने की अपील की।

