हस्त प्रक्षालन रोगों से बचाव का प्रभावी हथियार : डॉ. गौरी शंकर पासवान - gidhaur.com : Gidhaur - गिद्धौर - Gidhaur News - Bihar - Jamui - जमुई - Jamui Samachar - जमुई समाचार

Breaking

Responsive Advertisement

Responsive Advertisement

Responsive Advertisement

गुरुवार, 15 अक्टूबर 2026

हस्त प्रक्षालन रोगों से बचाव का प्रभावी हथियार : डॉ. गौरी शंकर पासवान

  • विश्व हाथ धुलाई दिवस पर राजकीय डिग्री महाविद्यालय, अलीगंज में परिचर्चा आयोजित
  • स्वच्छता के प्रति जागरूकता का लिया संकल्प

अलीगंज/जमुई। विश्व हाथ धुलाई दिवस के अवसर पर राजकीय डिग्री महाविद्यालय, इस्लामनगर अलीगंज में गुरुवार को “मानव जीवन में हस्त प्रक्षालन के महत्त्व एवं स्वास्थ्य संरक्षण में इसकी भूमिका” विषय पर परिचर्चा आयोजित की गई। कार्यक्रम में हाथों की स्वच्छता को स्वस्थ जीवनशैली का अभिन्न अंग बताते हुए विद्यार्थियों को नियमित रूप से हाथ धोने और दूसरों को भी इसके लिए जागरूक करने का संदेश दिया गया।

साबुन और पानी से हाथ धोना संक्रमण से बचाव का सरल उपाय
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. गौरी शंकर पासवान ने कहा कि हस्त प्रक्षालन रोगों से बचाव का प्रभावी हथियार है। हाथों की स्वच्छता व्यक्तिगत स्वास्थ्य के साथ-साथ सामाजिक स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए भी आवश्यक है। साबुन और स्वच्छ पानी से सही तरीके से हाथ धोने की आदत अनेक संक्रामक बीमारियों के प्रसार को रोकने में सहायक होती है। उन्होंने कम से कम 20 सेकंड तक साबुन और पानी से हाथ धोने की सलाह दी।

उन्होंने कहा, “हाथों को स्वच्छ रखना है बुद्धिमानी, स्वस्थ जीवन की यही है निशानी।” बीमारी के उपचार से बेहतर उसकी रोकथाम है और नियमित रूप से हाथ धोना इस दिशा में एक सरल एवं प्रभावी कदम है।

विद्यार्थियों ने स्वच्छता को दिनचर्या में शामिल करने पर दिया जोर
कार्यक्रम की अध्यक्षता समाजशास्त्र के सहायक प्राध्यापक डॉ. राकेश कुमार ने की। परिचर्चा में प्रो. कामेश्वर कुमार, प्रिया कुमारी, अंजलि सार्थक, अनामिका कुमारी, अंशु कुमारी, अभिषेक कुमार और श्रेय शेखर ने भी अपने विचार रखे। वक्ताओं ने हस्त प्रक्षालन को स्वस्थ जीवनशैली और सामाजिक जागरूकता का महत्त्वपूर्ण हिस्सा बताया।

स्वच्छता से स्वस्थ समाज का निर्माण
कार्यक्रम में सुशील कुमार, राकेश कुमार, पूर्व मुखिया सरवन कुमार सहित कई छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। परिचर्चा के माध्यम से विद्यार्थियों को स्वयं स्वच्छता अपनाने, परिवार एवं समाज में जागरूकता फैलाने और रोगों की रोकथाम में अपनी भूमिका निभाने का संदेश दिया गया।

Responsive Advertisement