- अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस की पूर्व संध्या पर समग्र सेवा संस्था ने किया सम्मान समारोह का आयोजन
- महिला थानाध्यक्ष अमीषा रतन ने बालिकाओं को किया प्रेरित
जमुई/बिहार। अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस की पूर्व संध्या पर शनिवार को समग्र सेवा संस्था की ओर से सावित्रीबाई फुले शिक्षा सम्मान कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में भीमबांध, चोरमारा और गुरमाहा जैसे अति नक्सल प्रभावित क्षेत्रों की 150 से अधिक बालिकाओं ने भाग लिया। इस अवसर पर विपरीत परिस्थितियों और तमाम चुनौतियों के बावजूद अपनी पढ़ाई जारी रखते हुए बिहार मुक्त विद्यालयी शिक्षण एवं परीक्षा बोर्ड (बीबीओएसई) से दसवीं की परीक्षा उत्तीर्ण करने वाली समग्र सेवा संस्था की 61 बालिकाओं को सम्मानित किया गया। महिला थाना प्रभारी अमीषा रतन ने बालिकाओं को किताबें, कॉपियां, कलम, अनुवाद पुस्तकें और प्रशस्ति पत्र प्रदान कर उनका उत्साहवर्धन किया।
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य शिक्षा से वंचित रह जाने वाली बालिकाओं को दोबारा शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने, उनके संघर्ष को सम्मान देने और आगे की पढ़ाई के लिए प्रोत्साहित करना था। सम्मान प्राप्त करने वाली बालिकाओं ने कठिन परिस्थितियों के बीच अपनी शैक्षणिक यात्रा पूरी कर यह संदेश दिया कि दृढ़ इच्छाशक्ति और सही मार्गदर्शन के बल पर मुश्किल से मुश्किल लक्ष्य भी हासिल किया जा सकता है।
'सबसे बड़ा श्रृंगार आपकी पढ़ाई है'
कार्यक्रम की मुख्य अतिथि महिला थाना प्रभारी अमीषा रतन ने सम्मानित बालिकाओं की मेहनत और उपलब्धियों की सराहना करते हुए उन्हें आगे की पढ़ाई जारी रखने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने महान समाज सुधारक और देश की पहली महिला शिक्षिकाओं में शामिल सावित्रीबाई फुले के जीवन तथा महिला शिक्षा के क्षेत्र में उनके ऐतिहासिक योगदान के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि सावित्रीबाई फुले ने अपने समय में अनेक सामाजिक बाधाओं का सामना करते हुए महिलाओं और बालिकाओं की शिक्षा के लिए महत्वपूर्ण कार्य किया। उनका जीवन आज भी हर उस लड़की के लिए प्रेरणा है, जो कठिन परिस्थितियों के बावजूद अपने सपनों को पूरा करना चाहती है।
अमीषा रतन ने बालिकाओं को संबोधित करते हुए कहा, ''सबसे बड़ा श्रृंगार आपकी पढ़ाई है।'' उन्होंने कहा कि शिक्षा केवल परीक्षा पास करने या प्रमाणपत्र हासिल करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आत्मनिर्भर बनने, अपने अधिकारों को समझने और जीवन में सही निर्णय लेने की ताकत देती है।
उन्होंने भीमबांध, चोरमारा और गुरमाहा जैसे अति नक्सल प्रभावित क्षेत्रों की बालिकाओं के संघर्ष की विशेष रूप से सराहना की। उन्होंने कहा कि जिन परिस्थितियों में इन बच्चियों ने अपनी पढ़ाई जारी रखी और दसवीं की परीक्षा उत्तीर्ण की, वह अपने आप में सराहनीय उपलब्धि है। इनकी सफलता न केवल इनके परिवारों, बल्कि पूरे गांव और समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उन्होंने बालिकाओं से अपनी शिक्षा जारी रखने, आत्मविश्वास बनाए रखने और अपने सपनों को साकार करने के लिए निरंतर प्रयास करने की अपील की।
शिक्षा से बदलेगा भविष्य, बाल विवाह के खिलाफ आवाज उठाने का आह्वान
समग्र सेवा संस्था के सचिव मकेश्वर ने भी बालिकाओं को संबोधित करते हुए शिक्षा के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यक्ति को सही और गलत के बीच अंतर समझने की क्षमता प्रदान करती है। पढ़ाई के माध्यम से बालिकाएं अपने अधिकारों के प्रति जागरूक बन सकती हैं और अपने भविष्य के लिए बेहतर निर्णय ले सकती हैं। शिक्षित बालिका न केवल अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकती है, बल्कि अपने परिवार और समाज के विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
उन्होंने बालिकाओं से अपनी पढ़ाई को प्राथमिकता देने और किसी भी परिस्थिति में शिक्षा से पीछे नहीं हटने की अपील की। साथ ही बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीतियों के विरुद्ध जागरूक होने और इसके खिलाफ आवाज उठाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि बाल विवाह बालिकाओं की शिक्षा, स्वास्थ्य और उज्ज्वल भविष्य के रास्ते में बड़ी बाधा है। समाज में बदलाव लाने के लिए जरूरी है कि बालिकाएं जागरूक बनें और अपने साथ-साथ दूसरी बच्चियों को भी शिक्षा के लिए प्रेरित करें।
बाल विवाह नहीं करने और इसे रोकने का लिया संकल्प
कार्यक्रम के दौरान बालिकाओं ने अपनी पढ़ाई के दौरान आने वाली कठिनाइयों, सामाजिक चुनौतियों और व्यक्तिगत संघर्षों को साझा किया। उनके अनुभवों से यह सामने आया कि शिक्षा हासिल करने के लिए कई बालिकाओं को प्रतिकूल परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है। इसके बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और अपनी मेहनत से दसवीं की परीक्षा उत्तीर्ण कर एक महत्वपूर्ण मुकाम हासिल किया।
इस अवसर पर उपस्थित सभी बालिकाओं ने संकल्प लिया कि वे स्वयं बाल विवाह नहीं करेंगी और अपने आसपास भी किसी को बाल विवाह नहीं करने देंगी। उन्होंने समाज में जागरूकता फैलाने तथा बालिकाओं की शिक्षा को बढ़ावा देने में अपनी भूमिका निभाने का भी संकल्प लिया। कार्यक्रम में बालिकाओं को यह संदेश दिया गया कि शिक्षा, जागरूकता और सामूहिक प्रयासों के माध्यम से ही बाल विवाह जैसी कुरीतियों को समाप्त किया जा सकता है।
सोनिया कुमारी ने मुख्य अतिथि को किया सम्मानित
कार्यक्रम के दौरान चोरमारा की बालिका सोनिया कुमारी ने मुख्य अतिथि अमीषा रतन को चादर और स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मानित किया। इस पहल ने कार्यक्रम में शामिल बालिकाओं की ओर से अतिथि के प्रति सम्मान और आभार की भावना को प्रदर्शित किया।
समग्र सेवा संस्था की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम ने ग्रामीण और कठिन परिस्थितियों में रहने वाली बालिकाओं की शैक्षणिक उपलब्धियों को पहचान देने के साथ ही उन्हें भविष्य में आगे बढ़ने का प्रोत्साहन दिया। कार्यक्रम में संस्था की कार्यकर्ता मिशा, अमरेश, अर्पिता, बबलू, प्रवीण और सौरव सहित अन्य कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
सावित्रीबाई फुले शिक्षा सम्मान के माध्यम से बालिकाओं को यह संदेश दिया गया कि शिक्षा उनके आत्मसम्मान, स्वतंत्रता और बेहतर भविष्य की सबसे मजबूत नींव है। इन बालिकाओं की उपलब्धियां यह साबित करती हैं कि अवसर और प्रोत्साहन मिलने पर कठिन परिस्थितियों में रहने वाली बेटियां भी अपनी मेहनत से नई राह बना सकती हैं।


