- जिलाधिकारी ने फसल कटनी प्रयोगों के नियमित निरीक्षण और डिजिटल पोर्टल पर समयबद्ध आंकड़े अपलोड करने का दिया निर्देश
जमुई/बिहार। कृषि सांख्यिकी व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने, आंकड़ों की शुद्धता एवं विश्वसनीयता सुनिश्चित करने और संबंधित पदाधिकारियों व कर्मियों की तकनीकी दक्षता बढ़ाने के उद्देश्य से जिला स्तरीय एक दिवसीय आवृत्तिचर्या-सह-प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कृषि वर्ष 2026-27 के तहत आयोजित इस कार्यक्रम में कृषि सांख्यिकी से जुड़े विभिन्न कार्यों के प्रभावी क्रियान्वयन पर विस्तार से चर्चा की गई।
योजना एवं विकास विभाग के अर्थ एवं सांख्यिकी निदेशालय, बिहार सरकार से प्राप्त दिशा-निर्देशों के आलोक में आयोजित कार्यक्रम का उद्घाटन जिलाधिकारी ने किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि सटीक, गुणवत्तापूर्ण और समयबद्ध कृषि आंकड़े प्रभावी नीतिगत निर्णयों तथा कृषि क्षेत्र के समग्र विकास का आधार हैं। कृषि उत्पादन, खाद्य सुरक्षा, आर्थिक विकास और किसानों के हित में योजनाओं के निर्माण एवं क्रियान्वयन के लिए विश्वसनीय कृषि सांख्यिकी का संकलन बेहद महत्वपूर्ण है।
डिजिटल पोर्टल और तकनीकी प्रक्रियाओं की दी गई जानकारी
प्रशिक्षण के दौरान आईसीएस (ICS), टीआरएस (TRS), ई-स्टैटिस्टिक्स पोर्टल, जीसीईएस ऐप एवं पोर्टल, सीसीई ऐप तथा भूमि उपयोग सांख्यिकी (लैंड यूज स्टैटिस्टिक्स) समेत विभिन्न डिजिटल प्लेटफॉर्म की कार्यप्रणाली की जानकारी दी गई। इसके साथ ही कृषि सांख्यिकी से संबंधित तकनीकी एवं व्यावहारिक पहलुओं पर प्रशिक्षण प्रदान किया गया।
विशेष रूप से फसल कटनी प्रयोगों के संचालन, उनसे संबंधित फोटोग्राफ एवं अन्य आंकड़ों के संकलन तथा ऑनलाइन पोर्टल पर डेटा अपलोड करने की प्रक्रिया को समझाया गया। प्रशिक्षण का उद्देश्य संबंधित कर्मियों को डिजिटल माध्यमों के उपयोग में दक्ष बनाना और कृषि आंकड़ों के संकलन की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी एवं विश्वसनीय बनाना था।
फसल कटनी प्रयोगों के नियमित निरीक्षण का निर्देश
जिलाधिकारी ने संबंधित पदाधिकारियों को निर्देश दिया कि फसल कटनी प्रयोगों का संचालन निर्धारित तकनीकी मानकों के अनुरूप सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने आंकड़ों का समय पर संकलन एवं प्रेषण करने के साथ फसल कटनी प्रयोगों और क्षेत्र सर्वेक्षणों का अधिकतम निरीक्षण करने पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि कृषि आंकड़ों की गुणवत्ता एवं विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए नियमित पर्यवेक्षण और प्रभावी अनुश्रवण आवश्यक है। क्षेत्र स्तर पर किसी भी प्रकार की लापरवाही से आंकड़ों की शुद्धता प्रभावित हो सकती है, जिसका असर कृषि उत्पादन के आकलन पर पड़ सकता है। इसलिए सभी संबंधित कर्मियों को निर्धारित प्रक्रियाओं का पूरी गंभीरता से पालन करना चाहिए।
राजस्व और कृषि विभाग के बीच समन्वय पर बल
जिलाधिकारी ने राजस्व एवं कृषि विभाग के पदाधिकारियों और कर्मियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने का निर्देश दिया। उन्होंने एक ही विषय से संबंधित आंकड़ों में एकरूपता बनाए रखने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि विभिन्न स्तरों से प्राप्त आंकड़ों का प्रमाणिक और विश्वसनीय होना अनिवार्य है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रखंड स्तर से प्राप्त फसल आच्छादन क्षेत्र (क्रॉप कवरेज एरिया) और उपज (यील्ड) के आंकड़ों के आधार पर विभिन्न फसलों के उत्पादन का आकलन किया जाता है। इन आंकड़ों का उपयोग राज्य एवं केंद्र सरकार द्वारा सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी), खाद्य नीति, खाद्य सुरक्षा और निर्यात-आयात नीति से जुड़े महत्वपूर्ण निर्णय लेने में किया जाता है।
ऐसे में कृषि सांख्यिकी के संकलन में सटीकता, पारदर्शिता और प्रमाणिकता बनाए रखना सभी संबंधित पदाधिकारियों एवं कर्मियों की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।
प्रशिक्षण में मिली जानकारी को धरातल पर लागू करने का निर्देश
जिलाधिकारी ने सभी संबंधित पदाधिकारियों को प्रशिक्षण के दौरान प्राप्त तकनीकी जानकारी का उपयोग क्षेत्र स्तर पर प्रभावी ढंग से करने तथा कृषि सांख्यिकी के संकलन एवं प्रेषण में निर्धारित दिशा-निर्देशों का पूर्ण अनुपालन सुनिश्चित करने को कहा।
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य कृषि सांख्यिकी प्रणाली के विभिन्न पहलुओं से संबंधित जानकारी उपलब्ध कराना, डिजिटल प्लेटफॉर्म के उपयोग को बढ़ावा देना तथा संबंधित पदाधिकारियों एवं कर्मियों के कौशल और कार्यक्षमता में वृद्धि करना था। प्रशासन की ओर से कृषि आंकड़ों की गुणवत्ता बेहतर बनाने और निर्धारित समयसीमा के भीतर विश्वसनीय आंकड़े उपलब्ध कराने पर विशेष जोर दिया गया।

