जमुई/बिहार। जिले में विकास की संभावनाओं को नई दिशा देने, प्रशासनिक प्रयासों को आमजन तक पहुंचाने और जनहित के मुद्दों के समाधान में मीडिया की भागीदारी को मजबूत बनाने के उद्देश्य से शनिवार को समाहरणालय स्थित संवाद कक्ष में ‘मीडिया एवं प्रशासन : विश्वास के साझेदार, विकास के सहयात्री’ विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। जिला प्रशासन की ओर से आयोजित इस कार्यशाला में पर्यटन, उद्योग, आधारभूत संरचना, खेल सुविधाओं, सामाजिक विकास और भविष्य की योजनाओं को लेकर विस्तार से चर्चा हुई। कार्यक्रम में जिला पदाधिकारी ने बीते एक वर्ष के दौरान जिले में किए गए विकास कार्यों और प्रशासनिक पहलों की जानकारी साझा की। साथ ही जमुई की बदलती तस्वीर को लोगों तक पहुंचाने और विकास की संभावनाओं को व्यापक पहचान दिलाने में मीडिया की भूमिका की सराहना की।
कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य प्रशासन और मीडिया के बीच विश्वास, पारदर्शिता और निरंतर संवाद को बढ़ावा देना रहा। वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि विकास योजनाओं को सफल बनाने के लिए प्रशासनिक प्रयासों के साथ-साथ जनभागीदारी भी जरूरी है। मीडिया जनता की समस्याओं, अपेक्षाओं और सुझावों को प्रशासन तक पहुंचाने के साथ विकास कार्यों की जानकारी आम लोगों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। बीते एक वर्ष में जिले में हुए बदलावों और विभिन्न पहलों को मीडिया के माध्यम से मिली पहचान का उल्लेख करते हुए जिला प्रशासन ने भविष्य में भी सकारात्मक एवं तथ्यपरक संवाद बनाए रखने की आवश्यकता बताई।
नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में बदलाव से लेकर पर्यटन विकास तक की चर्चा
जिला पदाधिकारी ने अपने एक वर्ष के कार्यकाल के अनुभव साझा करते हुए जिले के सुदूरवर्ती और पूर्व में नक्सल प्रभावित रहे क्षेत्रों में आए बदलावों का उल्लेख किया। उन्होंने चोरमारा एवं आसपास के इलाकों में लोकतांत्रिक भागीदारी बढ़ाने, शांतिपूर्ण निर्वाचन प्रक्रिया सुनिश्चित करने और विकास योजनाओं को आगे बढ़ाने के लिए किए गए प्रयासों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि इन क्षेत्रों में विकास की संभावनाओं को मजबूत करने के लिए आधारभूत सुविधाओं का विस्तार और स्थानीय लोगों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ना आवश्यक है।
इस दौरान भीमबांध इको टूरिज्म सर्किट के विकास की दिशा में किए जा रहे प्रयासों पर विशेष चर्चा हुई। बरहट, लक्ष्मीपुर और चोरमारा सहित विभिन्न क्षेत्रों में पर्यटन सुविधाओं के विकास के लिए भूमि चिह्नित करने की प्रक्रिया और प्रस्तावित योजनाओं की जानकारी दी गई। प्रशासन की मंशा इन क्षेत्रों की प्राकृतिक संपदा और विशिष्ट भौगोलिक पहचान को योजनाबद्ध तरीके से विकसित कर पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा देना है। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार और आजीविका के अवसर बढ़ने के साथ सड़क, आवागमन और अन्य बुनियादी सुविधाओं के विस्तार की संभावनाएं भी बन सकती हैं।
धार्मिक और प्राकृतिक स्थलों को जोड़कर विकसित होगा पर्यटन कॉरिडोर
जमुई में पर्यटन की व्यापक संभावनाओं को रेखांकित करते हुए जिला पदाधिकारी ने गिद्धेश्वर वन्य क्षेत्र, गिद्धेश्वर मंदिर, नौलखा गढ़, परासी पहाड़, गरही डैम, लछुआर, कुंडघाट और महादेव सिमरिया जैसे प्रमुख प्राकृतिक एवं धार्मिक स्थलों को जोड़कर समेकित पर्यटन कॉरिडोर विकसित करने की प्रस्तावित योजना की जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि जिले के इन स्थलों की प्राकृतिक सुंदरता, धार्मिक महत्ता और ऐतिहासिक विशेषताओं को ध्यान में रखते हुए पर्यटन सुविधाओं के विकास की दिशा में काम किया जा रहा है। परासी पहाड़ और गरही डैम के आसपास चिह्नित भूमि पर पर्यटकों के लिए आवश्यक सुविधाएं विकसित करने की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई। इन योजनाओं का उद्देश्य पर्यटकों के लिए बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ जिले के विभिन्न पर्यटन स्थलों को एक व्यापक पहचान देना है।
कार्यशाला में खेल भवन और श्रीकृष्ण सिंह स्टेडियम के जीर्णोद्धार की योजना का भी उल्लेख किया गया। इसके अतिरिक्त झाझा के कुम्हैनी डैम समेत जिले के अन्य प्राकृतिक और धार्मिक स्थलों की पर्यटन क्षमता को विकसित करने पर प्रशासन की प्रतिबद्धता सामने रखी गई। वक्ताओं ने माना कि पर्यटन स्थलों का योजनाबद्ध विकास स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति देने और जिले की पहचान को व्यापक बनाने में सहायक हो सकता है।
चकाई में औद्योगिक विकास के लिए लगभग नौ हजार एकड़ भूमि चिह्नित
कार्यशाला के दौरान जिले में औद्योगिक विकास और निवेश की संभावनाओं पर भी विस्तार से चर्चा हुई। हाल ही में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के चकाई भ्रमण के दौरान औद्योगिक विकास को लेकर दिए गए निर्देशों और उनसे जुड़ी कार्ययोजनाओं की जानकारी मीडिया प्रतिनिधियों के साथ साझा की गई।
जिला पदाधिकारी ने चकाई क्षेत्र में चिह्नित लगभग नौ हजार एकड़ भूमि और वहां उपलब्ध औद्योगिक संभावनाओं का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि जिले में उद्योगों के विकास और निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। औद्योगिक गतिविधियों के विस्तार से स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा करने और क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने की संभावनाएं हैं।
उन्होंने पर्यटन और उद्योग को जिले की अर्थव्यवस्था के विकास के महत्वपूर्ण क्षेत्रों के रूप में रेखांकित किया। उनके अनुसार, दोनों क्षेत्रों में योजनाबद्ध तरीके से काम करने, आधारभूत सुविधाओं को मजबूत बनाने और निवेश की संभावनाओं को आगे बढ़ाने से जमुई के विकास को नई दिशा मिल सकती है।
विकास के लिए प्रशासन, मीडिया और समाज का साझा मंच बनाने की पहल
जिला पदाधिकारी ने जिले के समग्र विकास के लिए प्रशासन, मीडिया प्रतिनिधियों और समाज के प्रबुद्ध नागरिकों को साथ लेकर एक प्रभावी साझा मंच गठित करने की इच्छा व्यक्त की। उन्होंने कहा कि जिले की समस्याओं की पहचान, उनके समाधान और विकास योजनाओं को अधिक प्रभावी बनाने के लिए सभी पक्षों के बीच नियमित संवाद जरूरी है।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि विकास योजनाओं में आमजन की आकांक्षाओं और आवश्यकताओं को शामिल किया जाना चाहिए। प्रशासन जनता के हित में योजनाओं को धरातल पर उतारने के लिए कार्य करता है, लेकिन योजनाओं की उपयोगिता और प्रभाव को बेहतर बनाने के लिए स्थानीय लोगों के अनुभवों एवं सुझावों को समझना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
इस संदर्भ में मीडिया को प्रशासन और जनता के बीच महत्वपूर्ण सेतु बताते हुए उन्होंने कहा कि मीडिया जनसमस्याओं को सामने लाने, विकास योजनाओं की जानकारी लोगों तक पहुंचाने और प्रशासन को व्यावहारिक सुझाव उपलब्ध कराने में अहम योगदान दे सकता है। साझा मंच के माध्यम से जिले के विकास से जुड़े मुद्दों पर नियमित चर्चा और सामूहिक प्रयासों को बढ़ावा देने की संभावनाओं पर भी बल दिया गया।
स्टेडियम में क्रिकेट की सुविधाएं विकसित करने का सुझाव
कार्यशाला के दौरान आयोजित संवाद सत्र में मीडिया प्रतिनिधियों ने जिले के विकास से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर अपने विचार और सुझाव रखे। दैनिक जागरण के जिला ब्यूरो प्रमुख संजय सिंह ने नक्सलवाद के प्रभाव में कमी के बाद जिले में आए बदलावों का उल्लेख करते हुए खेल सुविधाओं को मजबूत बनाने की आवश्यकता पर ध्यान आकृष्ट कराया।
उन्होंने श्रीकृष्ण सिंह स्टेडियम के मैदान का जीर्णोद्धार कराने, मैदान में घास लगाने और क्रिकेट के लिए समर्पित मैदान विकसित करने का सुझाव दिया। जिला पदाधिकारी ने स्टेडियम के जीर्णोद्धार की दिशा में किए जा रहे प्रयासों की जानकारी देते हुए उनके सुझाव को सकारात्मक रूप से लिया।
अन्य मीडिया प्रतिनिधियों ने भी जिले के पर्यटन स्थलों के विकास, प्राकृतिक एवं धार्मिक धरोहरों को बेहतर सुविधाओं से जोड़ने और शहरी क्षेत्रों में जाम की समस्या जैसे महत्वपूर्ण विषय उठाए। संवाद के दौरान जनहित से जुड़े मुद्दों पर प्रशासन का ध्यान आकृष्ट कराया गया और उनके समाधान की दिशा में आवश्यक पहल करने की जरूरत बताई गई।
इस सत्र ने यह स्पष्ट किया कि मीडिया की भूमिका केवल सरकारी योजनाओं और विकास कार्यों की जानकारी प्रकाशित करने तक सीमित नहीं है, बल्कि स्थानीय समस्याओं को सामने लाने और उनके समाधान के लिए रचनात्मक सुझाव देने में भी उसकी महत्वपूर्ण भागीदारी है।
डॉक्यूमेंट्री के माध्यम से दिखाई गई जमुई के विकास की तस्वीर
कार्यशाला के दौरान जिला प्रशासन की ओर से एक विशेष डॉक्यूमेंट्री का प्रसारण भी किया गया। इसमें जमुई की बदलती तस्वीर, विकास की विभिन्न पहलों और प्रशासन तथा जनता के बीच बेहतर संवाद स्थापित करने में मीडिया की भूमिका को रेखांकित किया गया।
डॉक्यूमेंट्री के माध्यम से जिले में हुए बदलावों और विकास यात्रा में सकारात्मक पत्रकारिता के योगदान को सामने लाने का प्रयास किया गया। इसका उद्देश्य प्रशासन और मीडिया के बीच विश्वास एवं सहयोग को मजबूत करना और जिले की संभावनाओं से अधिक से अधिक लोगों को परिचित कराना था।
कार्यक्रम के समापन पर उप विकास आयुक्त ने जिला प्रशासन की ओर से सामाजिक एवं आर्थिक विकास में मीडिया के योगदान की सराहना की। उन्होंने भविष्य में भी विकास से जुड़े मुद्दों पर तथ्यपरक, संवेदनशील और जिम्मेदार संवाद बनाए रखने की आवश्यकता पर बल दिया। साथ ही कार्यशाला में शामिल सभी मीडिया प्रतिनिधियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए प्रशासन और मीडिया के बीच सहयोग एवं पारदर्शिता की परंपरा को और मजबूत करने की अपेक्षा जताई।
वरीय अधिकारियों और मीडिया प्रतिनिधियों की रही उपस्थिति
कार्यशाला में पुलिस अधीक्षक, उप विकास आयुक्त, अपर समाहर्ता (विभागीय जांच), जिला पंचायत राज पदाधिकारी, जिला परिवहन पदाधिकारी, जमुई एवं झाझा के अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी सहित जिले के विभिन्न विभागों के वरीय पदाधिकारी उपस्थित रहे। इसके अलावा प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और सोशल मीडिया से जुड़े जिले के मीडिया प्रतिनिधियों ने भी कार्यक्रम में भाग लिया।
कार्यशाला के माध्यम से पर्यटन, उद्योग, खेल सुविधाओं और आधारभूत संरचना के विकास को लेकर जिले की भावी योजनाओं पर विचार-विमर्श हुआ। साथ ही प्रशासन और मीडिया के बीच नियमित संवाद तथा जनहित से जुड़े मुद्दों पर साझा प्रयासों की आवश्यकता सामने आई। जिले के विकास की संभावनाओं को साकार करने के लिए प्रशासनिक पहल, मीडिया की सक्रिय भागीदारी और आमजन के सहयोग को महत्वपूर्ण बताया गया।

