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मंगलवार, 18 अगस्त 2026

पतसंडा के ऐतिहासिक काली मंदिर में वार्षिक सलोनी पूजा संपन्न, चंदेल राजाओं के दौर से जुड़ा है इतिहास

गिद्धौर/जमुई (Gidhaur/Jamui), 18 अगस्त 2026, मंगलवार : प्रखंड अंतर्गत पतसंडा पंचायत के राजपूत टोला स्थित ऐतिहासिक काली मंदिर में मंगलवार को वार्षिक सलोनी पूजा श्रद्धा और भक्तिभाव के साथ संपन्न हुई। पूजा को लेकर मंदिर परिसर में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ जुटी रही। पतसंडा सहित आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में लोग पहुंचे और मां काली की पूजा-अर्चना कर आशीर्वाद लिया।

स्थानीय लोगों के अनुसार इस प्राचीन मंदिर का इतिहास गिद्धौर राज रियासत से जुड़ा हुआ है। बताया जाता है कि वर्ष 1893 में गिद्धौर राज रियासत के महाराजा रावणेश्वर सिंह ने मंदिर का निर्माण कराया था। वर्ष 1923 में उनके निधन के बाद तत्कालीन महाराजा चंद्र मौलेश्वर सिंह ने मंदिर के स्वरूप में बदलाव कराया। राज परिवार की ओर से नियमित पूजा-पाठ की जिम्मेदारी पंडित हरि गौरी मिश्रा, सोमनाथ मिश्र और विश्वनाथ मिश्र को सौंपी गई थी।
समय के साथ यह मंदिर ‘काली मंडा’ के नाम से प्रसिद्ध हो गया। मंदिर के रखरखाव और जीर्णोद्धार का कार्य अब स्थानीय ग्रामीणों के सहयोग से किया जा रहा है। ग्रामीणों के प्रयास से वर्षों पुरानी पूजा परंपरा आज भी निरंतर जारी है।

मंदिर के पुजारी ने बताया कि प्रत्येक वर्ष सावन माह के शुक्ल पक्ष में सोमवार या मंगलवार को वार्षिक सलोनी पूजा आयोजित की जाती है। स्थानीय स्तर पर ग्रामीण पूजा के नाम से प्रसिद्ध इस आयोजन में श्रद्धालु मां काली से मन्नत मांगते हैं और अपनी आस्था प्रकट करते हैं।

बुजुर्ग ग्रामीणों के अनुसार पूजा के अवसर पर बकरे की बलि देने की परंपरा भी वर्षों से चली आ रही है। सलोनी पूजा के प्रति ग्रामीणों की गहरी आस्था और विश्वास के कारण यह ऐतिहासिक काली मंदिर आज भी क्षेत्र के प्रमुख धार्मिक एवं आस्था केंद्रों में शामिल है।

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