गंगरा/गिद्धौर (Gangra/Gidhaur), 27 अगस्त 2026, गुरुवार : जमुई जिले की धरती पर आस्था, संकल्प और सामाजिक चेतना की एक अनोखी मिसाल सामने आई है। गंगरा गांव के श्रवण दिव्यांग शिक्षक चुन-चुन कुमार ने अपने गांव की विशिष्ट पहचान को संरक्षित रखने और प्रसिद्ध बाबा कोकिलचंद धाम के विकास की कामना के साथ लगातार दूसरे वर्ष दो दिवसीय दंडवत साधना पूरी की। उन्होंने बाबा कोकिलचंद धाम को धार्मिक पर्यटन के मानचित्र पर प्रमुख स्थान दिलाने तथा नशामुक्त गंगरा गांव को आदर्श ग्राम घोषित कराने की मांग को अपने संकल्प से जोड़ते हुए यह कठिन साधना की।
सर्व मनोकामना सिद्धि के प्रतीक माने जाने वाले बाबा कोकिलचंद धाम, गंगरा की पहचान एक ऐतिहासिक, धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहर के रूप में है। स्थानीय लोगों के अनुसार गंगरा गांव लंबे समय से शराब से दूरी बनाए रखने की परंपरा के लिए भी जाना जाता है। गांव की इस पहचान को सामाजिक आदर्श के रूप में स्थापित करने और धाम के धार्मिक महत्व को व्यापक पहचान दिलाने के लिए बाबा कोकिलचंद विचार मंच लगातार प्रयासरत है।
23 अगस्त को शुरू हुई साधना, 24 अगस्त को धाम पहुंचकर हुई पूर्ण
बाबा कोकिलचंद धाम मंदिर न्यास के सचिव सह बाबा कोकिलचंद विचार मंच के संयोजक चुन-चुन कुमार ने बताया कि उनकी दंडवत साधना 23 अगस्त 2026 की सुबह 7:15 बजे बाबा मारण जामु-काबर, झाझा से शुरू हुई। लगातार दो दिनों की कठिन यात्रा के बाद 24 अगस्त को दोपहर 1:15 बजे वे बाबा कोकिलचंद धाम मंदिर, गंगरा पहुंचे, जहां साधना निर्विघ्न संपन्न हुई।
बताया गया कि बाबा कोकिलचंद धाम के विकास और गंगरा को आदर्श ग्राम के रूप में पहचान दिलाने की मांग को लेकर पूर्व में जिला प्रशासन, स्थानीय विधायक, सांसद तथा बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री को दो बार ज्ञापन सौंपा जा चुका है। पर्यटन विभाग के सुझाव पर वर्ष 2023 में धाम का बिहार राज्य धार्मिक न्यास पर्षद, पटना से विधिवत निबंधन भी कराया गया था। मंदिर न्यास के कार्यकारी अध्यक्ष अनुमंडल पदाधिकारी, जमुई हैं।
साधना पूर्ण होने पर सामूहिक रुद्राभिषेक
दंडवत साधना की पूर्णता के बाद समाज में सुख, शांति, आरोग्य एवं समृद्धि की कामना के साथ सावन की अंतिम सोमवारी, 24 अगस्त की शाम 4:30 बजे बाबा कोकिलचंद धाम प्रांगण में तृतीय ग्राम सामूहिक रुद्राभिषेक का आयोजन किया गया। धार्मिक अनुष्ठान में गंगरा सहित आसपास के दर्जनों गांवों के श्रद्धालुओं ने भाग लिया।
अनुष्ठान में यज्ञाचार्य के रूप में परमानंद पाण्डेय मौजूद रहे, जबकि चुन-चुन कुमार एवं उनकी धर्मपत्नी मुख्य यजमान बने। रुद्राभिषेक के दौरान पूरा धाम वैदिक मंत्रोच्चार और भगवान शिव के जयकारों से गूंजता रहा।
बाबा कोकिलचंद के त्रिसूत्र को जीवंत रखने का प्रयास
बाबा कोकिलचंद धाम की परंपरा और सामाजिक संदेश को आगे बढ़ाने के लिए बाबा कोकिलचंद विचार मंच पिछले दो दशकों से सक्रिय है। मंच बाबा कोकिलचंद के त्रिसूत्र—शराब से दूर रहना, अन्न की रक्षा करना और नारी का सम्मान करना—को जनजीवन में उतारने के लिए विभिन्न सामाजिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियां संचालित करता रहा है।
मंच की ओर से सामूहिक दीपावली, वृक्षारोपण, नेमान उत्सव, सम्मान समारोह, नशामुक्ति जागरूकता अभियान तथा मंदिर निर्माण जैसे कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता रहा है।
कार्यक्रम को सफल बनाने में उपेंद्र सिंह, सुबोध सिंह, शम्भू सिंह, अशोक सिंह, प्रो. राजीव पाण्डेय, शशिधर सिंह, सतन यादव, विष्णु पाण्डेय, रविन्द्र सिंह, मणि सिंह, राजेंद्र सिंह, पंकज सिंह, शंकर कुमार, सुनील सिंह, अमित कुमार, आशीष कुमार सिन्हा सहित दर्जनों महिलाओं, युवाओं, बच्चों एवं ग्रामीणों ने सक्रिय योगदान दिया।
दंडवत साधना और सामूहिक रुद्राभिषेक के माध्यम से गंगरा गांव ने एक बार फिर आस्था के साथ सामाजिक संकल्प का संदेश दिया। अब स्थानीय लोगों की निगाहें बाबा कोकिलचंद धाम के धार्मिक पर्यटन के रूप में विकास और नशामुक्त गंगरा को आदर्श ग्राम के रूप में पहचान मिलने की दिशा में आगे की पहल पर टिकी हैं।







