- दूसरे वर्ष आयोजित होगी दो दिवसीय आध्यात्मिक साधना
- 23 अगस्त को जामु खरैया से होगी शुरुआत
- 24 अगस्त को रुद्राभिषेक के साथ गंगरा में समापन
गंगरा/गिद्धौर (Gangra/Gidhaur), 22 अगस्त 2026, शनिवार : बाबा कोकिलचन्द विचार मंच के संयोजक एवं बाबा कोकिलचन्द धाम मंदिर के सचिव चुन चुन कुमार द्वारा बाबा कोकिलचन्द धाम मंदिर निर्माण की कामना और बाबा कोकिलचन्द की सांस्कृतिक परंपरा के संरक्षण के उद्देश्य से लगातार दूसरे वर्ष दो दिवसीय दण्डवत साधना का आयोजन किया जा रहा है।
इस धार्मिक एवं आध्यात्मिक साधना को लेकर क्षेत्र के श्रद्धालुओं और बाबा कोकिलचन्द के अनुयायियों में उत्साह देखा जा रहा है। साधना के दौरान चुन चुन कुमार दण्डवत करते हुए निर्धारित यात्रा पूरी करेंगे, जिसका समापन बाबा कोकिलचन्द धाम, गंगरा में होगा।
गंगा स्नान के साथ हुई धार्मिक अनुष्ठान की शुरुआत
दो दिवसीय दण्डवत साधना से पूर्व शनिवार, 22 अगस्त को चुन चुन कुमार ने गंगा स्नान कर धार्मिक अनुष्ठान और साधना की तैयारियों का शुभारंभ किया। इसके बाद 23 और 24 अगस्त को दो दिवसीय दण्डवत साधना आयोजित की जाएगी।
बाबा मारण स्थान से शुरू होगी दण्डवत यात्रा
रविवार, 23 अगस्त को दण्डवत साधना की शुरुआत झाझा प्रखंड अंतर्गत बाबा मारण स्थान, जामु खरैया गांव से होगी। यहां से चुन चुन कुमार दण्डवत करते हुए अपनी धार्मिक यात्रा आरंभ करेंगे। दो दिनों तक चलने वाली यह कठिन साधना 24 अगस्त को बाबा कोकिलचन्द धाम, गंगरा में पहुंचकर संपन्न होगी।
आयोजकों के अनुसार, यह साधना केवल व्यक्तिगत धार्मिक आस्था का विषय नहीं है, बल्कि बाबा कोकिलचन्द की संस्कृति, परंपरा और उनके विचारों को जन-जन तक पहुंचाने का भी एक प्रयास है।
सावन की अंतिम सोमवारी पर विशेष पूजन और रुद्राभिषेक
दण्डवत साधना के समापन के अवसर पर सावन की अंतिम सोमवारी के उपलक्ष्य में बाबा कोकिलचन्द धाम में विशेष धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इस अवसर पर विशेष पूजन, रुद्राभिषेक एवं महाआरती का आयोजन होगा।
श्रद्धालुओं के लिए यह अवसर आस्था और भक्ति के साथ-साथ बाबा कोकिलचन्द धाम की सांस्कृतिक एवं धार्मिक परंपराओं से जुड़ने का विशेष अवसर होगा।
20 वर्षों के संघर्ष और सांस्कृतिक संरक्षण की यात्रा
चुन चुन कुमार का कहना है कि यह साधना उनकी लगभग 20 वर्षों की संघर्ष यात्रा और बाबा कोकिलचन्द से जुड़े आदर्शों के प्रति समर्पण का हिस्सा है। उनका प्रयास बाबा कोकिलचन्द धाम के विकास, मंदिर निर्माण तथा क्षेत्र में आदर्श गांव की अवधारणा को आगे बढ़ाने से भी जुड़ा हुआ है।
उन्होंने कहा कि बाबा कोकिलचन्द की संस्कृति और विचारों को संरक्षित रखते हुए आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना आवश्यक है। इसी उद्देश्य से बाबा कोकिलचन्द धाम मंदिर निर्माण की कामना के साथ यह विशेष दण्डवत साधना आयोजित की जा रही है।
श्रद्धालुओं से अधिकाधिक संख्या में पहुंचने की अपील
बाबा कोकिलचन्द विचार मंच के संयोजक एवं मंदिर सचिव चुन चुन कुमार ने क्षेत्र के श्रद्धालुओं, बाबा कोकिलचन्द के अनुयायियों तथा आम लोगों से इस धार्मिक आयोजन में उपस्थित होकर इसे सफल बनाने की अपील की है।
उन्होंने सभी से आग्रह किया है कि वे दो दिवसीय दण्डवत साधना तथा सावन की अंतिम सोमवारी के अवसर पर आयोजित विशेष पूजन, रुद्राभिषेक और महाआरती में भाग लेकर धार्मिक आयोजन की गरिमा बढ़ाएं।







