जमुई/बिहार। राज्य के प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों में शुमार सिमुलतला आवासीय विद्यालय को राष्ट्रीय स्तर पर और अधिक सशक्त एवं आधुनिक बनाने की दिशा में जिला प्रशासन ने बड़ा कदम उठाया है। जिलाधिकारी-सह-अध्यक्ष, विद्यालय प्रबंध समिति की अध्यक्षता में विद्यालय प्रबंध समिति की 29वीं उच्चस्तरीय बैठक संपन्न हुई, जिसमें शैक्षणिक गुणवत्ता, प्रशासनिक पारदर्शिता, तकनीकी सुरक्षा, छात्र कल्याण, पर्यावरण संरक्षण तथा भविष्य की विकास योजनाओं पर व्यापक चर्चा करते हुए कई महत्वपूर्ण एवं दूरदर्शी निर्णय लिए गए। बैठक में पूर्व में माननीय शिक्षा मंत्री, बिहार सरकार द्वारा दिए गए दिशा-निर्देशों की विस्तृत समीक्षा भी की गई तथा उनके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए विस्तृत कार्ययोजना तैयार की गई।
बैठक में सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया कि भविष्य में विद्यालय परिसर में होने वाले सभी निर्माण एवं विकास कार्य केवल विद्यालय प्रबंध समिति की अंतिम स्वीकृति के बाद ही कराए जाएंगे, ताकि संस्थान की गुणवत्ता, गरिमा एवं पारदर्शिता बनी रहे। विद्यालय निधि से होने वाले खर्चों की निष्पक्ष निगरानी सुनिश्चित करने के लिए एक विशेष जांच समिति गठित करने का भी निर्णय लिया गया, जो वित्तीय प्रक्रियाओं की नियमित समीक्षा करेगी।
शिक्षा व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से बैठक में कई महत्वपूर्ण शैक्षणिक सुधारों पर सहमति बनी। विद्यालय के पाठ्यक्रम को राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षाओं के अनुरूप अधिक व्यावहारिक एवं आधुनिक बनाया जाएगा। शिक्षकों की दक्षता बढ़ाने के लिए ग्रीष्मकालीन एवं शीतकालीन अवकाश के दौरान देश के प्रतिष्ठित विषय विशेषज्ञों द्वारा विशेष प्रशिक्षण एवं ओरिएंटेशन कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। साथ ही आवश्यकता पड़ने पर नियमित शिक्षकों की प्रतिनियुक्ति सुनिश्चित की जाएगी ताकि पठन-पाठन की गुणवत्ता प्रभावित न हो।
विद्यालय में जवाबदेही की संस्कृति विकसित करने के लिए शिक्षकों का वार्षिक मूल्यांकन किया जाएगा तथा उनके कार्य निष्पादन के आधार पर ही सेवा विस्तार का निर्णय लिया जाएगा। प्रत्येक शिक्षक के लिए प्रति सप्ताह न्यूनतम 33 कक्षाएं लेना अनिवार्य होगा। इसके अलावा कक्षा छह एवं कक्षा ग्यारह में प्रवेश के लिए आयोजित होने वाली प्रवेश परीक्षा के स्तर को और अधिक उच्च बनाने हेतु विशेषज्ञों के सहयोग से विशेष प्रश्न-निर्देशिका (क्वेश्चन गाइडलाइन) तैयार करने का भी निर्णय लिया गया, जिससे केवल वास्तविक प्रतिभाओं का चयन सुनिश्चित हो सके।
इस बैठक की सबसे विशेष पहल यह रही कि पहली बार छात्र एवं छात्राओं के प्रतिनिधियों को भी बैठक में आमंत्रित किया गया, ताकि नीति निर्माण में विद्यार्थियों की प्रत्यक्ष भागीदारी सुनिश्चित हो और उनकी वास्तविक समस्याओं को समझकर समाधान निकाला जा सके। चूंकि अधिकांश विद्यार्थी अपने परिवार से दूर आवासीय वातावरण में रहते हैं, इसलिए उनके मानसिक, भावनात्मक एवं सामाजिक विकास को प्राथमिकता देते हुए त्रिस्तरीय छात्र सहायता प्रणाली विकसित करने का निर्णय लिया गया। इसके तहत नियमित शिक्षक-अभिभावक बैठक, करियर काउंसलिंग सत्र तथा अध्ययन में कमजोर विद्यार्थियों के लिए विशेष कक्षाओं का संचालन किया जाएगा।
बैठक में विद्यालय की सुरक्षा व्यवस्था को पूरी तरह हाई-टेक बनाने पर भी विशेष बल दिया गया। जिलाधिकारी ने पूरे परिसर में आधुनिक आईपी आधारित सीसीटीवी निगरानी प्रणाली स्थापित करने का निर्देश दिया। इस व्यवस्था की विशेषता यह होगी कि सभी आवश्यक सुरक्षा एवं गोपनीयता मानकों का पालन करते हुए अभिभावकों को भी लाइव मॉनिटरिंग की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी, जिससे वे अपने बच्चों की सुरक्षा और विद्यालय परिसर की गतिविधियों पर सहज निगरानी रख सकेंगे।
पर्यावरण संरक्षण को विद्यालय की प्राथमिकताओं में शामिल करते हुए जिलाधिकारी ने 'ग्रीन कैंपस' की व्यापक कार्ययोजना तैयार करने का निर्देश दिया। इसके अंतर्गत परिसर में ऊर्जा ऑडिट, जल ऑडिट तथा वर्षा जल संचयन प्रणाली को अनिवार्य रूप से लागू किया जाएगा। साथ ही खेल गतिविधियों को और अधिक सक्रिय बनाने, विद्यार्थियों के लिए नियमित शैक्षणिक भ्रमण आयोजित करने तथा सुरक्षित एवं सुलभ परिवहन सुविधा उपलब्ध कराने का भी निर्णय लिया गया।
विद्यालय को राष्ट्रीय स्तर के बौद्धिक केंद्र के रूप में विकसित करने के उद्देश्य से परिसर में भव्य 'स्वामी विवेकानंद अतिथिशाला' के निर्माण का भी प्रस्ताव स्वीकृत किया गया। इस अतिथिशाला के माध्यम से देश के प्रसिद्ध शिक्षाविदों, वैज्ञानिकों एवं विशेषज्ञों का नियमित आगमन सुनिश्चित होगा, जिससे विद्यार्थियों को ज्ञानवर्धक संवाद एवं प्रेरणा प्राप्त होगी। साथ ही विद्यालय के पूर्व छात्रों (एलुमनाई) को संस्थान के विकास से जोड़ने के लिए परिसर में उनके लिए समर्पित कार्यालय एवं अतिथिशाला उपलब्ध कराने पर भी सहमति बनी।
प्रबंध समिति ने एक अभिनव पहल करते हुए सिमुलतला आवासीय विद्यालय की उत्कृष्ट शैक्षणिक संस्कृति का लाभ पूरे जमुई जिले के सरकारी विद्यालयों तक पहुंचाने का भी निर्णय लिया। इसके अंतर्गत जिले के अन्य सरकारी विद्यालयों के विद्यार्थियों को सिमुलतला की शिक्षण पद्धति से परिचित कराया जाएगा तथा समय-समय पर खेल, कला, साहित्य एवं शैक्षणिक प्रतियोगिताओं के माध्यम से दोनों संस्थानों के विद्यार्थियों के बीच संवाद और ज्ञान का आदान-प्रदान कराया जाएगा। इस पहल का उद्देश्य जिले के सरकारी विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को बढ़ावा देना और विद्यार्थियों में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा की भावना विकसित करना है।
बैठक में विशेषज्ञ के रूप में ओएसडी (शैक्षणिक) डॉ. शंकर कुमार, प्रख्यात शिक्षाविद डॉ. ज्ञानदेव मणि त्रिपाठी, प्रतिनिधि डॉ. निमिषा नोबा, बाल मनोवैज्ञानिक नवीन, जिला शिक्षा पदाधिकारी धनंजय कुमार पासवान, सिमुलतला आवासीय विद्यालय के प्राचार्य शुभम शेखर सहित जिला प्रशासन के कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। सभी सदस्यों ने विद्यालय को देश के अग्रणी आवासीय शिक्षण संस्थानों की श्रेणी में स्थापित करने के लिए सामूहिक प्रयास और समयबद्ध कार्यान्वयन पर जोर दिया।







