जमुई/बिहार। जमुई साइबर थाना पुलिस ने अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी गिरोह के एक सक्रिय सदस्य को गिरफ्तार कर बड़ी सफलता हासिल की है। आरोपी के मोबाइल फोन से दर्जनों क्यूआर कोड, बैंक स्टेटमेंट तथा पाकिस्तान के कंट्री कोड (+92) वाले व्हाट्सएप नंबरों के साक्ष्य बरामद हुए हैं। प्रारंभिक जांच में 37 लाख 40 हजार रुपये के संदिग्ध लेनदेन का खुलासा हुआ है। मामले को गंभीरता से लेते हुए पुलिस ने डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर जांच तेज कर दी है।
गुरुवार को साइबर थाना परिसर में आयोजित प्रेस वार्ता में साइबर डीएसपी अभिषेक कुमार ने बताया कि पुलिस अधीक्षक के तकनीकी प्रकोष्ठ एवं साइबर थाना पुलिस को मिली गुप्त सूचना के आधार पर 22 जुलाई को टाउन थाना क्षेत्र के दौलतपुर निवासी वीरू मंडल (पिता- सुरेश मंडल) को उसके घर से गिरफ्तार किया गया। तलाशी के दौरान उसके पास से एक मोबाइल फोन एवं तीन सिम कार्ड बरामद किए गए। जब्त मोबाइल की जांच में कई बैंक खातों के स्टेटमेंट, दर्जनों क्यूआर कोड तथा 37.40 लाख रुपये के संदिग्ध लेनदेन से जुड़े दस्तावेज मिले।
पुलिस के अनुसार इन लेनदेन के संबंध में शिकायतें भी दर्ज हैं। प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी अंतरराज्यीय साइबर गिरोह के लिए क्यूआर कोड उपलब्ध कराने और उन्हें विभिन्न स्थानों तक पहुंचाने का काम करता था। पूछताछ में आरोपी ने बताया कि गिरोह के सदस्य दूसरे राज्यों से उसे क्यूआर कोड भेजते थे। इन क्यूआर कोड के माध्यम से साइबर ठगी के शिकार लोगों से ऑनलाइन भुगतान कराया जाता था। भुगतान की रसीद गिरोह के संचालकों को भेजी जाती थी, जिसके बाद ठगी की रकम नए बैंक खातों में स्थानांतरित कर दी जाती थी। नए खातों में राशि भेजे जाने से शुरुआती स्तर पर शिकायत दर्ज नहीं हो पाती थी। बाद में गिरोह के सदस्य आपस में राशि का बंटवारा कर लेते थे।
साइबर डीएसपी ने बताया कि जांच के दौरान हरियाणा के एक व्यक्ति की भूमिका भी सामने आई है, जो आरोपी को क्यूआर कोड उपलब्ध कराता था। इसके अलावा आरोपी के मोबाइल से पाकिस्तान के कंट्री कोड (+92) से संचालित व्हाट्सएप नंबरों के साक्ष्य भी मिले हैं। इस संबंध में सभी तकनीकी एवं कानूनी पहलुओं की गहन जांच की जा रही है। पुलिस ने इस मामले में प्राथमिकी दर्ज कर ली है। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि जमुई जिले में इस अंतरराष्ट्रीय साइबर गिरोह के अन्य सदस्य सक्रिय हैं या नहीं। डिजिटल साक्ष्यों का विश्लेषण जारी है और जांच आगे बढ़ने के साथ इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की गिरफ्तारी की संभावना भी जताई जा रही है।
साइबर पुलिस ने आम लोगों से अपील की है कि किसी भी अनजान व्यक्ति द्वारा भेजे गए क्यूआर कोड पर भुगतान न करें तथा किसी भी संदिग्ध ऑनलाइन गतिविधि की सूचना तत्काल साइबर हेल्पलाइन 1930 या स्थानीय पुलिस को दें। पुलिस का मानना है कि यह कार्रवाई साइबर अपराध के एक बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश करने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगी।







