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सोमवार, 27 जुलाई 2026

मां नेतुला मंदिर के सुचारू प्रबंधन के लिए नई न्यास समिति गठित, न्यास पर्षद ने जारी की अधिसूचना

  • सिकंदरा के प्रसिद्ध मां नेतुला मंदिर के संचालन की जिम्मेदारी 10 सदस्यीय समिति को
  • एसडीओ होंगे अध्यक्ष; पांच वर्षों तक करेगी मंदिर का प्रबंधन
सिकंदरा/जमुई। जिले के सिकंदरा प्रखंड अंतर्गत ग्राम कुमार स्थित प्रसिद्ध एवं आस्था के प्रमुख केंद्र मां नेतुला मंदिर के सुचारू संचालन, पारदर्शी प्रबंधन, संपत्तियों की सुरक्षा तथा समग्र विकास को लेकर बिहार राज्य धार्मिक न्यास पर्षद ने महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। पर्षद के अध्यक्ष प्रो. रणवीर नंदन द्वारा जारी अधिसूचना संख्या-984, दिनांक 23 जुलाई 2026 के तहत मंदिर के लिए पांच वर्षों के लिए नई स्थायी 10 सदस्यीय न्यास समिति का गठन किया गया है। समिति की अध्यक्षता अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीओ), जमुई करेंगे।

बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 के तहत निबंधित मां नेतुला मंदिर (निबंधन संख्या-4192/12) के लिए इससे पूर्व वर्ष 2013 में 11 सदस्यीय न्यास समिति का गठन किया गया था, जिसका पांच वर्षीय कार्यकाल काफी पहले समाप्त हो चुका था। कार्यकाल समाप्त होने के बावजूद नई समिति के गठन में विलंब तथा पूर्व समिति पर लगाए गए कुछ आरोपों के कारण पर्षद द्वारा वर्ष 2025 में स्पष्टीकरण भी मांगा गया था। इसी दौरान मंदिर प्रबंधन को लेकर कुछ लोगों द्वारा फर्जी हस्ताक्षर कर भ्रम फैलाने की शिकायत भी पर्षद के समक्ष पहुंची थी।

इसी बीच पटना उच्च न्यायालय में लंबित सीडब्ल्यूजेसी संख्या-17322/2022 में दिए गए निर्देशों के आलोक में बिहार राज्य धार्मिक न्यास पर्षद ने नई समिति के गठन की प्रक्रिया शुरू की। पर्षद ने जिला पदाधिकारी, जमुई को सार्वजनिक विज्ञापन जारी कर इच्छुक व्यक्तियों से आवेदन आमंत्रित करने का निर्देश दिया था। साथ ही अंतरिम व्यवस्था के तहत अनुमंडल पदाधिकारी, जमुई को अस्थायी न्यासधारी नियुक्त किया गया।

जिला पदाधिकारी, जमुई द्वारा 15 जुलाई 2026 को पर्षद को 32 आवेदकों की सूची उनके आवेदन एवं चरित्र प्रमाण-पत्र के साथ भेजी गई। स्थानीय विधायक ने भी समिति में सदस्य के रूप में सहयोग देने की सहमति प्रदान की। उपलब्ध अभिलेखों, मंदिर के आय-व्यय विवरण, पूर्व समिति के कार्यों तथा न्यायालय के निर्देशों पर विचार करने के बाद पर्षद ने 32 नामों में से नौ सदस्यों का चयन करते हुए एसडीओ जमुई की अध्यक्षता में दस सदस्यीय स्थायी न्यास समिति का गठन किया।

एसडीओ होंगे अध्यक्ष, सिकंदरा विधायक भी समिति में शामिल
नई समिति में अनुमंडल पदाधिकारी, जमुई को अध्यक्ष बनाया गया है। इसके अलावा अरविन्द कुमार को उपाध्यक्ष, अनुज कुमार को सचिव तथा उमा शंकर सिंह को कोषाध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई है। सिकंदरा के विधायक प्रफुल कुमार मांझी को भी समिति का सदस्य बनाया गया है। इसके अतिरिक्त मनीष कुमार, शिव शंकर, शशांक सिंह, मनोरंजन कुमार एवं राजेन्द्र प्रसाद सिंह को सदस्य के रूप में शामिल किया गया है। सभी सदस्य ग्राम कुमार, थाना सिकंदरा, जिला जमुई के निवासी हैं।

हर तीन महीने पर्षद को देना होगा आय-व्यय का हिसाब
अधिसूचना में स्पष्ट किया गया है कि न्यास समिति मंदिर की सभी आय एवं व्यय का विस्तृत विवरण प्रत्येक तीन माह पर बिहार राज्य धार्मिक न्यास पर्षद को उपलब्ध कराएगी। पर्षद भी प्रत्येक तिमाही में इसकी समीक्षा करेगा। मंदिर की सभी वित्तीय गतिविधियां पूर्ण पारदर्शिता के साथ संचालित होंगी तथा बैंक खाते का संचालन अध्यक्ष अथवा सचिव एवं कोषाध्यक्ष के संयुक्त हस्ताक्षर से किया जाएगा।

दान और चढ़ावे की होगी पारदर्शी व्यवस्था
मंदिर परिसर में निर्धारित स्थानों पर भेंटपात्र लगाए जाएंगे। दान एवं चढ़ावे की राशि अधिकृत सदस्यों की उपस्थिति में खोली जाएगी, उसका विधिवत लेखा तैयार कर राष्ट्रीयकृत बैंक में जमा कराया जाएगा। प्रत्येक दानदाता को अधिकृत रसीद उपलब्ध कराई जाएगी तथा उसका पंजीकरण भी अनिवार्य रूप से किया जाएगा।
पूजा व्यवस्था, स्वच्छता और श्रद्धालुओं की सुविधाओं पर विशेष जोर
नई न्यास समिति मंदिर में नियमित पूजा-अर्चना, राग-भोग, अतिथि सेवा एवं अन्य धार्मिक परंपराओं का सुचारू संचालन सुनिश्चित करेगी। मंदिर परिसर की स्वच्छता, पवित्रता एवं गरिमा बनाए रखने के साथ-साथ महिला श्रद्धालुओं की सुविधाओं पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा। समिति पुजारियों की नियुक्ति एवं उनके मानदेय का निर्धारण भी करेगी।

श्रद्धालुओं के शोषण पर सख्त रोक
पर्षद ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि मंदिर परिसर में किसी भी श्रद्धालु का शोषण नहीं होगा और पूजा या धार्मिक अनुष्ठानों के नाम पर जबरन वसूली पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगी। यदि कोई सदस्य न्यास की संपत्ति का दुरुपयोग करता है या निजी लाभ के लिए उसका उपयोग करता है तो उसकी सदस्यता समाप्त कर विधिसम्मत कार्रवाई की जाएगी।

मंदिर की जमीन बेचने या लीज पर देने का अधिकार नहीं
अधिसूचना में यह भी स्पष्ट किया गया है कि न्यास समिति अथवा उसका कोई भी पदाधिकारी मंदिर की भूमि या अन्य संपत्ति का हस्तांतरण, विक्रय, पट्टा, लीज अथवा किसी भी प्रकार का दुरुपयोग नहीं कर सकेगा। ऐसा किया जाना पूर्णतः अवैध माना जाएगा और संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

विकास कार्यों के लिए पर्षद की मंजूरी होगी अनिवार्य
मंदिर परिसर में किसी भी नए निर्माण अथवा विकास कार्य से पहले न्यास समिति को बैठक में प्रस्ताव पारित कर बिहार राज्य धार्मिक न्यास पर्षद की स्वीकृति प्राप्त करनी होगी। पर्षद की अनुमति के बाद ही किसी प्रकार का निर्माण कार्य कराया जा सकेगा। साथ ही समिति की संरचना में संशोधन, परिवर्तन अथवा रिक्त पदों की पूर्ति का अधिकार भी पर्षद के पास सुरक्षित रहेगा।

इस अधिसूचना के साथ मां नेतुला मंदिर के प्रशासनिक एवं वित्तीय प्रबंधन को नई व्यवस्था के तहत संचालित करने का मार्ग प्रशस्त हो गया है। माना जा रहा है कि इससे मंदिर की व्यवस्थाओं में पारदर्शिता बढ़ेगी, श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी तथा मंदिर के समग्र विकास को नई गति प्राप्त होगी।

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