जमुई/बिहार। प्रधानमंत्री के 'टीबी मुक्त भारत अभियान' को सफल बनाने की दिशा में जमुई जिला प्रशासन एवं स्वास्थ्य विभाग लगातार सक्रिय भूमिका निभा रहा है। इसी कड़ी में शुक्रवार को जिला स्वास्थ्य समिति, जमुई के तत्वावधान में सदर अस्पताल परिसर में विशेष परामर्श सह पोषण सहायता वितरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम में जिला पदाधिकारी एवं सिविल सर्जन की उपस्थिति में उपचाररत 50 टीबी मरीजों को निक्षय पोषण योजना के तहत पोषण सहायता राशि एवं प्रोटीन युक्त फूड बास्केट प्रदान किए गए। साथ ही मरीजों को बीमारी से शीघ्र स्वस्थ होने के लिए आवश्यक चिकित्सीय एवं पोषण संबंधी विस्तृत परामर्श भी दिया गया। कार्यक्रम के दौरान चिकित्सकों ने सभी मरीजों के स्वास्थ्य की समीक्षा करते हुए उनकी उपचार प्रक्रिया, दवा सेवन की स्थिति तथा पोषण संबंधी आवश्यकताओं की जानकारी ली। मरीजों को संतुलित एवं पौष्टिक आहार लेने, चिकित्सकों के निर्देशों का पालन करने तथा नियमित रूप से दवा का सेवन जारी रखने की सलाह दी गई।
अधिकारियों ने कहा कि दवा के साथ उचित पोषण मिलने से टीबी मरीजों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है और उपचार का सकारात्मक प्रभाव तेजी से दिखाई देता है। इस अवसर पर जिला पदाधिकारी ने कहा कि टीबी पूरी तरह से ठीक होने वाली बीमारी है। यदि समय रहते इसकी पहचान हो जाए और मरीज बिना किसी व्यवधान के निर्धारित अवधि तक नियमित दवा का सेवन करे, तो वह पूर्णतः स्वस्थ जीवन जी सकता है।
उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल मरीजों का इलाज करना ही नहीं, बल्कि उन्हें पोषण एवं सामाजिक सहयोग भी उपलब्ध कराना है ताकि कोई भी मरीज आर्थिक या सामाजिक कारणों से उपचार से वंचित न रहे। उन्होंने समाज के सक्षम नागरिकों, जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों तथा स्वयंसेवी संस्थाओं से 'निक्षय मित्र' बनकर टीबी मरीजों के पोषण एवं देखभाल में सहयोग देने की अपील की। उन्होंने कहा कि जनभागीदारी से ही वर्ष 2025 तक भारत को टीबी मुक्त बनाने के लक्ष्य को मजबूती मिलेगी और प्रत्येक मरीज को बेहतर उपचार एवं पोषण उपलब्ध कराया जा सकेगा।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सिविल सर्जन, जमुई ने कहा कि जिले के सभी सरकारी अस्पतालों एवं स्वास्थ्य केंद्रों में टीबी की जांच, उपचार एवं आवश्यक दवाएं पूरी तरह निःशुल्क उपलब्ध हैं। उन्होंने मरीजों को विशेष रूप से सलाह दी कि वे उपचार के दौरान किसी भी परिस्थिति में दवा का सेवन बीच में बंद न करें, क्योंकि ऐसा करने से बीमारी दोबारा गंभीर रूप ले सकती है तथा दवाओं का प्रभाव भी कम हो सकता है। उन्होंने बताया कि सरकार द्वारा संचालित निक्षय पोषण योजना के माध्यम से मरीजों को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जा रही है ताकि वे पौष्टिक भोजन ग्रहण कर सकें और शीघ्र स्वस्थ हो सकें। स्वास्थ्य विभाग समय-समय पर मरीजों की निगरानी भी कर रहा है, जिससे उपचार प्रक्रिया प्रभावी ढंग से संचालित हो सके।
कार्यक्रम के अंत में जिला प्रशासन एवं स्वास्थ्य विभाग ने आम लोगों से अपील की कि यदि किसी व्यक्ति को दो सप्ताह से अधिक लगातार खांसी, बुखार, तेजी से वजन घटना, भूख कम लगना या रात में अत्यधिक पसीना आने जैसे लक्षण दिखाई दें, तो इसे नजरअंदाज न करें और तुरंत अपने नजदीकी सरकारी स्वास्थ्य केंद्र में जाकर निःशुल्क टीबी जांच कराएं। अधिकारियों ने कहा कि समय पर जांच, नियमित उपचार, संतुलित पोषण और समाज का सहयोग ही टीबी उन्मूलन का सबसे प्रभावी उपाय है।







