झाझा/जमुई। प्रखंड के धमना गांव स्थित ऐतिहासिक एवं प्राचीन मां दक्षेश्वर काली मंदिर में आयोजित होने वाली प्रसिद्ध वार्षिक सालोनी काली पूजा का शुभारंभ वैदिक मंत्रोच्चार, विधिवत पूजा-अर्चना एवं नौ दिवसीय कलश स्थापना के साथ श्रद्धा और उल्लास के माहौल में हो गया। पूजा के आरंभ होते ही मंदिर परिसर में भक्तों का तांता लग गया और पूरा इलाका मां काली की भक्ति में सराबोर हो उठा। दूर-दराज के गांवों से लेकर जमुई जिले के विभिन्न क्षेत्रों से श्रद्धालु बड़ी संख्या में मंदिर पहुंचकर मां दक्षेश्वर काली के चरणों में शीश नवाकर सुख, शांति एवं समृद्धि की कामना कर रहे हैं।
मां दक्षेश्वर काली मंदिर की यह वार्षिक पूजा न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक परंपराओं का भी प्रतीक मानी जाती है। स्थानीय लोगों के अनुसार, पूजा अवधि के दौरान धमना पंचायत सहित आसपास के सात गांवों में नौ दिनों तक सात्विक वातावरण बनाए रखने की परंपरा वर्षों से चली आ रही है। इस दौरान लोग मांस, मदिरा, लहसुन और प्याज के सेवन से परहेज करते हैं तथा पूरी तरह से धार्मिक अनुष्ठानों और मां काली की आराधना में लीन रहते हैं।
मंदिर के यजमान जयनारायण पांडेय ने बताया कि मां दक्षेश्वर काली के प्रति लोगों की अटूट श्रद्धा और विश्वास है। ऐसी मान्यता है कि सच्चे मन से मां के दरबार में आने वाले श्रद्धालुओं की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। विशेष रूप से संतान प्राप्ति की कामना लेकर आने वाली महिलाओं के बीच इस मंदिर की विशेष मान्यता है और हर वर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचकर मां का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।
वार्षिक पूजा को लेकर मंदिर परिसर और आसपास का क्षेत्र आकर्षक रोशनी एवं सजावट से जगमगा उठा है। पूजा के साथ-साथ यहां लगने वाला मेला भी लोगों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। बच्चों और युवाओं के मनोरंजन के लिए ब्रेक डांस, तारा मंच, रेल छुक-छुक गाड़ी सहित कई आधुनिक एवं पारंपरिक झूले लगाए गए हैं, जिनका आनंद लेने के लिए प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोग पहुंच रहे हैं। मेले में विभिन्न प्रकार की दुकानों के सजने से ग्रामीण क्षेत्र में उत्सव जैसा माहौल बना हुआ है।
धमना पंचायत के मुखिया प्रतीक संतु शर्मा ने बताया कि इस वर्ष पूजा को और भी भव्य एवं आकर्षक स्वरूप देने की तैयारी की गई है। उन्होंने बताया कि वृंदावन से आए कलाकारों द्वारा नौ दिनों तक धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों की विशेष प्रस्तुतियां दी जाएंगी, जिससे श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक वातावरण के साथ सांस्कृतिक विरासत की झलक भी देखने को मिलेगी। इसके अलावा श्रद्धालुओं को मां काली की भव्य प्रतिमा के दर्शन के साथ विभिन्न देवी-देवताओं के आकर्षक एवं विराट स्वरूपों का भी दर्शन करने का अवसर प्राप्त होगा।
उन्होंने बताया कि पूजा एवं मेले के सफल आयोजन के लिए सभी आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। सुरक्षा, स्वच्छता और श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए पूजा समिति एवं स्थानीय ग्रामीणों द्वारा विशेष व्यवस्था की गई है। नौ दिनों तक चलने वाले इस धार्मिक महोत्सव को लेकर पूरे क्षेत्र में उत्साह और श्रद्धा का माहौल बना हुआ है तथा मां दक्षेश्वर काली के जयकारों से वातावरण भक्तिमय हो उठा है।







