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सोमवार, 22 जून 2026

जमुई : विश्व बुजुर्ग दुर्व्यवहार जागरूकता दिवस पर विधिक जागरूकता शिविर आयोजित

जमुई/बिहार। विश्व बुजुर्ग दुर्व्यवहार जागरूकता दिवस के अवसर पर सोमवार को जिला विधिक सेवा प्राधिकार, जमुई के तत्वावधान में विधिक जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। शिविर का संचालन चीफ लीगल एड डिफेंस काउंसिल गौरी शंकर तांती द्वारा किया गया। कार्यक्रम में लीगल एड डिफेंस काउंसिल, जमुई से जुड़े अन्य अधिवक्ताओं ने भी सहभागिता निभाई और उपस्थित लोगों को वरिष्ठ नागरिकों के अधिकारों, संरक्षण एवं कल्याण से संबंधित विभिन्न कानूनी प्रावधानों की जानकारी दी।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए गौरी शंकर तांती ने कहा कि वर्तमान समय में समाज में बुजुर्गों के प्रति बढ़ते दुर्व्यवहार और उपेक्षा की घटनाएं चिंता का विषय हैं। उन्होंने कहा कि माता-पिता और बुजुर्गों ने अपने जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा परिवार और समाज के निर्माण में समर्पित किया है, इसलिए उनके प्रति सम्मान, प्रेम और संवेदनशीलता बनाए रखना नई पीढ़ी का नैतिक दायित्व है। उन्होंने कहा कि किसी भी सभ्य समाज की पहचान इस बात से होती है कि वहां बुजुर्गों को कितना सम्मान और सुरक्षा प्रदान की जाती है।

उन्होंने कहा कि बुजुर्गों के संरक्षण के लिए देश में कई महत्वपूर्ण कानूनी प्रावधान मौजूद हैं, जिनके तहत उन्हें भरण-पोषण, स्वास्थ्य सेवाएं, सामाजिक सुरक्षा तथा सम्मानजनक जीवन जीने का अधिकार प्राप्त है। वरिष्ठ नागरिकों के अधिकारों की रक्षा के लिए सरकार और न्यायिक संस्थाओं द्वारा लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने लोगों से आग्रह किया कि वे अपने परिवार के बुजुर्गों के अनुभव, ज्ञान और योगदान का सम्मान करें तथा उनके साथ संवेदनशील और मानवीय व्यवहार करें।

गौरी शंकर तांती ने कहा कि बुजुर्गों के प्रति कृतज्ञता की भावना रखना प्रत्येक व्यक्ति का कर्तव्य है। जीवन में आगे बढ़ने की दौड़ में हमें उन लोगों के योगदान को नहीं भूलना चाहिए जिन्होंने हमें जीवन, संस्कार और पहचान दी है। उन्होंने कहा कि जिस घर में बुजुर्ग सम्मान और खुशी के साथ रहते हैं, वह घर वास्तव में समृद्ध और संस्कारित माना जाता है।
उन्होंने समाज में बुजुर्गों के प्रति हो रही हिंसा, उपेक्षा और मानसिक प्रताड़ना पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि यह सामाजिक जीवन का एक अत्यंत दुखद और काला पक्ष है, जिसका किसी भी सभ्य समाज में कोई स्थान नहीं होना चाहिए। परिवार और समाज को मिलकर ऐसी प्रवृत्तियों को समाप्त करने के लिए आगे आना होगा।

इस अवसर पर उन्होंने राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (नालसा) द्वारा संचालित "वरिष्ठ जन अधिकार, सशक्तिकरण और गरिमा" अभियान की भी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस अभियान का उद्देश्य वरिष्ठ नागरिकों को उनके कानूनी अधिकारों, कल्याणकारी योजनाओं, सुरक्षा उपायों, आत्मसम्मान तथा न्याय तक पहुंच के संबंध में जागरूक करना है। इसके माध्यम से बुजुर्गों को समाज में सम्मानजनक जीवन जीने के लिए आवश्यक कानूनी सहायता और मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जा रहा है।
कार्यक्रम में उपस्थित लोगों को बताया गया कि जिला विधिक सेवा प्राधिकार द्वारा वरिष्ठ नागरिकों को निःशुल्क विधिक सहायता, कानूनी परामर्श तथा आवश्यकतानुसार न्यायालय में मुकदमा लड़ने के लिए अधिवक्ता की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाती है। साथ ही बुजुर्गों से संबंधित मामलों के त्वरित समाधान के लिए विधिक सेवा प्राधिकार लगातार कार्य कर रहा है।

विधिक जागरूकता शिविर के दौरान उपस्थित लोगों से बुजुर्गों के सम्मान, सुरक्षा और अधिकारों की रक्षा के लिए आगे आने तथा समाज में सकारात्मक वातावरण बनाने का आह्वान किया गया। कार्यक्रम में वरिष्ठ नागरिकों के कल्याण और उनके प्रति संवेदनशीलता बढ़ाने की आवश्यकता पर विशेष बल दिया गया।

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