जमुई/बिहार। जमुई में जिला विधिक सेवा प्राधिकार के निर्देश पर व्यवहार न्यायालय परिसर में समस्त मजिस्ट्रेट कोर्ट के पीठासीन पदाधिकारियों की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक का उद्देश्य 9 मई 2026 को आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत में निष्पादित मामलों की समीक्षा करना तथा आगामी 12 सितंबर 2026 को प्रस्तावित राष्ट्रीय लोक अदालत को सफल बनाने के लिए व्यापक रणनीति तैयार करना था।
यह बैठक प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह जिला विधिक सेवा प्राधिकार के अध्यक्ष संदीप सिंह के निर्देश पर आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी दिलीप कुमार राय ने की, जबकि जिला विधिक सेवा प्राधिकार की सचिव मंजू कुमारी भी उपस्थित रहीं।
बैठक के दौरान हाल ही में संपन्न राष्ट्रीय लोक अदालत में निस्तारित मामलों की विस्तार से समीक्षा की गई। न्यायिक पदाधिकारियों ने इस बात पर चर्चा की कि किन प्रकार के मामलों का सफलतापूर्वक निष्पादन हुआ और किन मामलों में अपेक्षित परिणाम नहीं मिल सके। साथ ही आगामी राष्ट्रीय लोक अदालत में अधिक से अधिक मामलों के निष्पादन को सुनिश्चित करने के लिए विभिन्न उपायों पर मंथन किया गया।
बैठक में विशेष रूप से ऐसे मामलों के चयन पर जोर दिया गया, जिन्हें लोक अदालत के माध्यम से आपसी सहमति से सुलझाया जा सकता है। इसके अंतर्गत पक्षकारों को समय रहते सूचना देना, विवादित पक्षों के बीच प्री-सीटिंग आयोजित करना तथा समझौते के माध्यम से मामलों का निष्पादन सुनिश्चित करना प्रमुख बिंदु रहे। न्यायिक अधिकारियों ने यह भी चर्चा की कि लोक अदालत के प्रचार-प्रसार के लिए व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाया जाए, ताकि अधिक से अधिक लोग इसका लाभ उठा सकें।
मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी दिलीप कुमार राय ने बैठक में कहा कि राष्ट्रीय लोक अदालत न्याय प्रणाली का एक प्रभावी माध्यम है, जहां लंबित मामलों का त्वरित और सौहार्दपूर्ण समाधान संभव है। उन्होंने सभी न्यायिक पदाधिकारियों से आग्रह किया कि वे अपने-अपने न्यायालयों में लंबित मामलों की समीक्षा कर ऐसे वादों की पहचान करें, जिन्हें आगामी लोक अदालत में निस्तारित किया जा सकता है।
जिला विधिक सेवा प्राधिकार की सचिव मंजू कुमारी ने कहा कि आगामी 12 सितंबर को प्रस्तावित राष्ट्रीय लोक अदालत को सफल बनाने के लिए अभी से सक्रिय तैयारी शुरू करना आवश्यक है। उन्होंने सभी न्यायिक पदाधिकारियों से अपील की कि वे अधिक से अधिक मामलों के निष्पादन का लक्ष्य लेकर कार्य करें और आम जनता को भी इसके प्रति जागरूक करें। उन्होंने कहा कि लोक अदालत का मुख्य उद्देश्य लोगों को सुलभ, त्वरित और कम खर्चीला न्याय उपलब्ध कराना है।
बैठक में यह भी चर्चा हुई कि कुछ ऐसे मामले, जो पिछली लोक अदालत में निष्पादित नहीं हो सके, उनके कारणों का विश्लेषण किया जाए। संबंधित पीठासीन पदाधिकारियों से फीडबैक लिया गया और भविष्य में इन कमियों को दूर करने के उपाय सुझाए गए। न्यायिक पदाधिकारियों को निर्देश दिया गया कि वे आमजन को मामलों के निष्पादन में आवश्यक सहयोग प्रदान करें तथा जहां संभव हो, जुर्माना राशि में छूट देकर समझौते को प्रोत्साहित करें, ताकि लोक अदालत का उद्देश्य सार्थक रूप से पूरा हो सके।
बैठक में एसीजेएम प्रथम गौतम कुमार, अनुमंडल न्यायिक दंडाधिकारी अनुभव रंजन, न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी मेधा मनीषा, निवेदिता कुमारी, सौम्या सुमन, शशि शेखर, ज्ञान प्रकाश, अतुल रत्ना तथा गौरव कुमार सहित अन्य न्यायिक पदाधिकारी उपस्थित रहे।
बैठक के समापन पर सभी अधिकारियों ने यह संकल्प लिया कि आगामी राष्ट्रीय लोक अदालत को अधिक प्रभावी और सफल बनाने के लिए समन्वित प्रयास किए जाएंगे, ताकि लंबित मामलों का शीघ्र निस्तारण हो सके और आम जनता को न्याय सुलभ हो।







