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मंगलवार, 5 मई 2026

गिद्धौर : उलाई नदी का अस्तित्व संकट में, अवैध गतिविधियों से बढ़ी चिंता, खेती-जलस्रोत पर गहरा असर

गिद्धौर/जमुई (Gidhaur/Jamui), 5 मई 2026, मंगलवार : प्रखंड क्षेत्र की जीवनरेखा मानी जाने वाली उलाई नदी इन दिनों गंभीर संकट से गुजर रही है। कभी कल-कल बहने वाली यह नदी अब धीरे-धीरे सिमटती जा रही है, जिससे इसके अस्तित्व पर ही खतरा मंडराने लगा है। नदी के सिकुड़ने का सीधा असर स्थानीय खेती, जलस्तर और जनजीवन पर देखने को मिल रहा है।

ग्रामीणों के अनुसार, क्षेत्र में जलस्तर लगातार नीचे जा रहा है। कई घरों में लगे चापाकलों (हैंडपंप) ने पानी देना बंद कर दिया है, जिससे पेयजल संकट गहराने लगा है। वहीं किसानों का कहना है कि सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी नहीं मिलने के कारण फसल उत्पादन प्रभावित हो रहा है।

वन, पर्यावरण एवं नदी संरक्षण समिति के अध्यक्ष कुणाल कुमार सिंह ने इस स्थिति के लिए अवैध गतिविधियों को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने बताया कि नदी के बीचों-बीच अवैध रूप से मिट्टी भरकर सड़क बना दी गई है, जिसके जरिए बालू लदे ट्रकों का आवागमन कराया जा रहा है। इतना ही नहीं, इन वाहनों से अवैध उगाही भी की जा रही है। उनका आरोप है कि यह सब प्रशासन की नाक के नीचे हो रहा है, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही है।
कुणाल कुमार सिंह ने आगे कहा कि नदी से अनियंत्रित बालू खनन के कारण पानी का ठहराव खत्म हो गया है, जिससे जलस्रोत तेजी से सिमटते जा रहे हैं। इसका असर न केवल पर्यावरण पर पड़ रहा है, बल्कि आम लोगों के दैनिक जीवन पर भी गहरा प्रभाव डाल रहा है।

वहीं सामाजिक कार्यकर्ता सुशांत साईं सुंदरम ने नदी की बदहाल स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा कि एक समय था जब इस नदी में तेज धारा बहती थी और बारिश के मौसम में जलस्तर इतना बढ़ जाता था कि कोजवे पुल के ऊपर से पानी गुजरता था। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी जेन जी ने तो इस नदी को बहते हुए देखा ही नहीं है। अब यह नदी धीरे-धीरे नाले का रूप लेती जा रही है, जो आने वाले समय में पर्यावरण और मानव जीवन के लिए गंभीर खतरा बन सकती है।
इस पूरे मामले को लेकर ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। लोगों ने प्रशासन से अवैध खनन और अतिक्रमण पर तत्काल रोक लगाने तथा नदी के संरक्षण के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो उलाई नदी का नाम केवल इतिहास के पन्नों में ही रह जाएगा।

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