जमुई/बिहार (Jamui/Bihar), 17 मई 2026, रविवार : बिहार के जमुई जिले से एक ऐसी अनोखी शादी सामने आई है, जिसकी चर्चा अब गांव से लेकर सोशल मीडिया तक तेजी से हो रही है। खैरा थाना क्षेत्र के डुमरकोला गांव में 65 वर्षीय चपट मांझी और 62 वर्षीय आशा देवी ने समाज की परवाह किए बिना महादेव सिमरिया मंदिर में विधि-विधान के साथ विवाह रचा लिया। उम्र के इस पड़ाव पर दोनों का यह फैसला लोगों के बीच चर्चा का केंद्र बना हुआ है। कोई इसे सच्चे प्रेम और सहारे की मिसाल बता रहा है, तो कोई इस शादी को लेकर हैरानी जता रहा है।
बताया जाता है कि चपट मांझी और आशा देवी एक-दूसरे को कई वर्षों से जानते थे। दोनों के घर आमने-सामने हैं और करीब एक वर्ष से दोनों एक-दूसरे के सहारे जीवन बिता रहे थे। गांव में उनके रिश्ते को लेकर तरह-तरह की बातें और तानेबाजी होने लगी थी। सामाजिक दबाव और लगातार हो रही चर्चाओं से परेशान होकर दोनों ने अपने रिश्ते को सार्वजनिक रूप से स्वीकार करते हुए शादी करने का निर्णय लिया।
जानकारी के अनुसार, चपट मांझी की पत्नी का निधन करीब 15 वर्ष पूर्व हो गया था। उनका एक बेटा और बहू हैं, जो बाहर रहकर काम करते हैं। पत्नी के निधन के बाद चपट मांझी अकेले जीवन गुजार रहे थे। बढ़ती उम्र और बीमारी के कारण उन्हें रोजमर्रा के कामों में काफी परेशानी होती थी। इसी दौरान आशा देवी उनकी देखभाल करने लगीं। धीरे-धीरे दोनों के बीच अपनापन बढ़ता गया और दोनों ने साथ जीवन बिताने का फैसला कर लिया।
चपट मांझी ने बताया कि यह उनकी चौथी शादी है। उन्होंने कहा कि उनकी पिछली तीनों पत्नियों का निधन हो चुका है। उन्होंने यह भी कहा कि जीवन के इस अंतिम पड़ाव में उन्हें एक ऐसे साथी की जरूरत थी, जो उनका ख्याल रख सके और सुख-दुख में साथ दे सके।
वहीं आशा देवी ने बताया कि उनके पति की मौत करीब दो वर्ष पहले हो चुकी थी। उनकी एक बेटी है, लेकिन वह उनकी देखभाल नहीं करती। अकेलेपन और असहाय स्थिति में जीवन बिताना उनके लिए बेहद कठिन हो गया था। उन्होंने कहा कि चपट मांझी की बीमारी और घरेलू कार्यों में मदद करते-करते दोनों के बीच विश्वास और लगाव बढ़ा। हालांकि गांव के लोग उनके रिश्ते को लेकर तरह-तरह की बातें करते थे, जिसके बाद दोनों ने समाज के सामने अपने रिश्ते को वैध रूप देने का निर्णय लिया।
इस शादी को लेकर चपट मांझी के बेटे अजय मांझी ने नाराजगी जाहिर की है। उनका कहना है कि इस उम्र में शादी करना उचित नहीं था। उन्होंने यह भी कहा कि अब परिवार दोनों को अपने साथ नहीं रखेगा। हालांकि गांव के कई लोगों ने इस विवाह का समर्थन किया है।
ग्रामीण सुधीर यादव सहित कई लोगों ने कहा कि जब दोनों ने अपनी मर्जी और सहमति से शादी की है, तो समाज को उनके फैसले का सम्मान करना चाहिए। ग्रामीणों ने लोगों से अपील की कि अब दोनों को तानों और आलोचनाओं से परेशान न किया जाए, बल्कि उन्हें सम्मानपूर्वक जीवन जीने दिया जाए।
डुमरकोला गांव में हुई यह अनोखी शादी अब सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रही है। लोग इस विवाह को लेकर अपनी-अपनी प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। कई लोग इसे अकेलेपन के खिलाफ साहसिक कदम और जीवन के अंतिम पड़ाव में सहारे की जरूरत का उदाहरण बता रहे हैं।
यह विवाह समाज को एक महत्वपूर्ण संदेश भी देता है कि उम्र चाहे कोई भी हो, इंसान को जीवन में अपनापन, सम्मान और साथ की जरूरत हमेशा रहती है। अकेलेपन से बेहतर है कि इंसान सहमति, सम्मान और विश्वास के साथ अपना जीवन बिताए।







