गिद्धौर/जमुई (Gidhaur/Jamui), 30 अप्रैल 2026, गुरुवार : प्रखंड क्षेत्र के महुली स्थित उत्क्रमित मध्य विद्यालय (अनुसूचित जाति) में असामाजिक तत्वों द्वारा की गई तोड़फोड़ की घटना ने शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विद्यालय के प्रभारी प्रधानाध्यापक द्वारा जिला शिक्षा पदाधिकारी को भेजे गए आवेदन में बताया गया है कि विद्यालय परिसर में स्थित रसोई घर के सबमर्सिबल पाइप को अज्ञात लोगों ने जानबूझकर क्षतिग्रस्त कर दिया है, जिससे मध्याह्न भोजन योजना बाधित हो गई है।
विद्यालय प्रशासन के अनुसार, इस घटना के बाद से बच्चों के लिए भोजन बनाना कठिन हो गया है। पानी की आपूर्ति बाधित होने के कारण रसोई व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित हो चुकी है, जिसका सीधा असर छात्रों पर पड़ रहा है।
बताया गया कि यह कोई पहली घटना नहीं है। विद्यालय में पहले भी इस प्रकार की घटनाएं हो चुकी हैं। सबसे बड़ी समस्या विद्यालय परिसर की सुरक्षा को लेकर सामने आई है। हाल ही में संवेदक द्वारा विद्यालय की चहारदीवारी का निर्माण तो कर दिया गया है, लेकिन अब तक मुख्य गेट नहीं लगाया गया है।
गेट नहीं होने से बढ़ी असामाजिक गतिविधियां
गेट के अभाव में विद्यालय परिसर असुरक्षित बना हुआ है। शाम 4 बजे के बाद से रात 10 बजे तक असामाजिक तत्वों का विद्यालय में आना-जाना लगा रहता है। इससे न केवल विद्यालय की संपत्ति को नुकसान पहुंच रहा है, बल्कि छात्र-छात्राओं और शिक्षकों में भय का माहौल भी बना हुआ है।
विद्यालय के शिक्षकों ने बताया कि इस तरह की घटनाओं से पठन-पाठन का वातावरण प्रभावित हो रहा है और बच्चों की सुरक्षा को लेकर भी गंभीर चिंता बनी हुई है।
जांच और कार्रवाई की मांग
प्रभारी प्रधानाध्यापक ने जिला शिक्षा पदाधिकारी से मामले की गंभीरता को देखते हुए स्थल जांच कराने और दोषियों के विरुद्ध आवश्यक कार्रवाई करने की मांग की है। साथ ही विद्यालय परिसर में सुरक्षा व्यवस्था सुदृढ़ करने, मुख्य गेट लगाने तथा क्षतिग्रस्त सबमर्सिबल पाइप को शीघ्र ठीक कराने की अपील की है।
इस संबंध में आवेदन की प्रतिलिपि जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (प्रारंभिक शिक्षा), समग्र शिक्षा जमुई, मध्याह्न भोजन योजना पदाधिकारी, प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी गिद्धौर तथा थाना अध्यक्ष गिद्धौर को भी भेजी गई है।
शिक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
इस घटना ने एक बार फिर ग्रामीण क्षेत्रों में विद्यालयों की सुरक्षा और बुनियादी सुविधाओं की कमी को उजागर कर दिया है। यदि समय रहते आवश्यक कदम नहीं उठाए गए, तो इसका खामियाजा सीधे तौर पर बच्चों की शिक्षा और उनके भविष्य पर पड़ सकता है।






