गिद्धौर/जमुई (Gidhaur/Jamui), 30 अप्रैल 2026, गुरुवार : गिद्धौर स्थित श्री रावणेश्वर सिंह संस्कृत महाविद्यालय में गुरुवार को एक गरिमामय विदाई सह सम्मान समारोह का आयोजन किया गया, जिसमें प्रभारी प्राचार्य सह ज्योतिषाचार्य डॉ. विभूति नाथ झा को उनकी सेवानिवृत्ति के अवसर पर भावभीनी विदाई दी गई। इस दौरान महाविद्यालय परिसर भावनात्मक माहौल से भर गया, जहां उपस्थित कर्मियों और बुद्धिजीवियों ने उनके दीर्घकालीन योगदान को याद करते हुए सम्मान प्रकट किया।
डॉ. झा ने 01 सितंबर 1985 से महाविद्यालय में अपनी सेवा प्रारंभ की थी और लगभग 40 वर्षों तक शिक्षा के क्षेत्र में समर्पित भाव से कार्य करते हुए उन्होंने न सिर्फ संस्थान को मजबूती दी, बल्कि असंख्य छात्रों के जीवन को दिशा प्रदान की। उनके कार्यकाल को सादगी, अनुशासन और कर्तव्यनिष्ठा का प्रतीक बताया गया।
समारोह के दौरान पुस्तकालय सहायक प्रमोद कुमार, सेवानिवृत्त कर्मी मनोहर रावत तथा परिचारी राधेश्याम झा ने अपने संबोधन में डॉ. झा के व्यक्तित्व और कार्यशैली की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने सीमित संसाधनों के बावजूद महाविद्यालय के विकास और छात्रों के उज्ज्वल भविष्य के लिए निरंतर प्रयास किए। प्रमोद कुमार ने भावुक शब्दों में कहा, “शिक्षक कभी सेवानिवृत्त नहीं होते, यह केवल एक सरकारी प्रक्रिया है। उनका ज्ञान और मार्गदर्शन सदैव समाज को दिशा देता रहता है।”
कार्यक्रम में महाविद्यालय सचिव कुमार त्रिपुरारी सिंह ने दूरभाष के माध्यम से डॉ. झा को उनके सेवानिवृत्त जीवन के लिए शुभकामनाएं देते हुए उनके स्वस्थ एवं सुखद भविष्य की कामना की।
अपने संबोधन में डॉ. विभूति नाथ झा ने कहा कि उन्होंने हमेशा महाविद्यालय और छात्रों के हित को सर्वोपरि रखते हुए कार्य किया। उन्होंने यह भी बताया कि अपने सेवाकाल के दौरान उन्होंने लगभग ढाई वर्षों तक कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय में उप कुलसचिव के पद पर भी अपनी सेवाएं दीं। उन्होंने आश्वस्त किया कि भविष्य में भी महाविद्यालय को जब भी उनकी आवश्यकता होगी, वे हर संभव सहयोग के लिए तत्पर रहेंगे।
इस अवसर पर महाविद्यालय के कर्मीगण, स्थानीय बुद्धिजीवी एवं समाजसेवी उपस्थित रहे। सभी ने मिलकर डॉ. झा को पुष्पगुच्छ, अंगवस्त्र एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया और उनके दीर्घ, स्वस्थ एवं सुखमय जीवन की कामना की।






