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गुरुवार, 12 मार्च 2026

जमुई सदर अस्पताल के उपाधीक्षक समेत तीन डॉक्टर निलंबित, हिरासत में मौत के पीएम में छेड़छाड़

जमुई/बिहार। बिहार के जमुई जिले में पुलिस हिरासत में हुई एक संदिग्ध मौत के मामले में पोस्टमार्टम रिपोर्ट में कथित तौर पर तथ्य छिपाने और लापरवाही बरतने के आरोप में स्वास्थ्य विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है। इस मामले में जमुई सदर अस्पताल के उपाधीक्षक सहित तीन चिकित्सा पदाधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। स्वास्थ्य विभाग की यह कार्रवाई कई वर्षों पुराने मामले में सामने आए गंभीर अनियमितताओं के आधार पर की गई है।

जानकारी के अनुसार, चकाई थाना क्षेत्र के नेहालडीह निवासी सिद्ध कोड़ा उर्फ मुंशी दा की 22 फरवरी 2020 को पुलिस हिरासत में मौत हो गई थी। घटना के बाद किए गए पोस्टमार्टम की रिपोर्ट को लेकर लंबे समय से सवाल उठ रहे थे। आरोप है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट तैयार करते समय संबंधित चिकित्सकों ने मृतक के शरीर पर मौजूद कई महत्वपूर्ण चोटों और परिस्थितियों को रिपोर्ट में दर्ज नहीं किया, जिससे पूरे मामले की निष्पक्षता पर संदेह उत्पन्न हुआ।

जाँच में सामने आया चौंकाने वाला खुलासा
इस मामले की जांच न्यायिक दंडाधिकारी, जमुई द्वारा कराई गई। जांच रिपोर्ट में कई गंभीर अनियमितताएं उजागर हुईं। रिपोर्ट के अनुसार मृतक के नाक, कान और मुँह से खून निकलने के स्पष्ट संकेत थे तथा शरीर के विभिन्न हिस्सों पर कटे और चोट के निशान भी पाए गए थे। हालांकि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में इन महत्वपूर्ण तथ्यों का उल्लेख नहीं किया गया।

इसके अतिरिक्त जांच में यह भी पाया गया कि पोस्टमार्टम की प्रक्रिया के दौरान निर्धारित नियमों का पालन नहीं किया गया। सामान्यतः पोस्टमार्टम के समय किसी स्वतंत्र व्यक्ति को गवाह के रूप में दर्ज किया जाना चाहिए, लेकिन इस मामले में ऐसा नहीं किया गया। साथ ही मृत्यु के वास्तविक कारणों को भी स्पष्ट रूप से दर्ज नहीं किया गया, जिससे संदेह और गहरा हो गया।

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के हस्तक्षेप के बाद कार्रवाई
मामले की गंभीरता को देखते हुए यह प्रकरण राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) तक पहुंचा। आयोग ने पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए 29 अक्टूबर 2025 को आदेश जारी किया और रिपोर्ट में कथित हेरफेर करने वाले चिकित्सा पदाधिकारियों के खिलाफ कड़ी अनुशासनिक कार्रवाई करने का निर्देश दिया।
एनएचआरसी के निर्देश के बाद बिहार सरकार के स्वास्थ्य विभाग ने मामले की समीक्षा की और 10 मार्च 2026 को संबंधित अधिकारियों के निलंबन की अधिसूचना जारी कर दी।

तीन चिकित्सकों पर गिरी गाज
स्वास्थ्य विभाग द्वारा जिन अधिकारियों को निलंबित किया गया है, उनमें जमुई सदर अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ. सैयद नौशाद अहमद, चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. देवेंद्र कुमार और चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. नागेंद्र कुमार शामिल हैं। इन तीनों पर बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के तहत कार्रवाई की गई है।

सरकार की ओर से स्पष्ट संकेत दिया गया है कि न्यायिक प्रक्रिया और चिकित्सकीय दायित्वों में किसी भी प्रकार की लापरवाही या तथ्य छिपाने की कोशिश को गंभीर अपराध माना जाएगा और दोषी पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

निलंबन अवधि में पटना रहेगा मुख्यालय
जारी आदेश के अनुसार निलंबन अवधि के दौरान तीनों चिकित्सकों का मुख्यालय स्वास्थ्य विभाग, बिहार, पटना निर्धारित किया गया है। इस अवधि में उन्हें केवल जीवन निर्वाह भत्ता ही देय होगा। साथ ही स्वास्थ्य विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि मामले की विस्तृत जांच के लिए अलग से विभागीय कार्यवाही शुरू की जाएगी।

सरकार के अवर सचिव उपेंद्र राम द्वारा सक्षम प्राधिकार की स्वीकृति के बाद इस आदेश की आधिकारिक पुष्टि की गई है। विभागीय जांच के बाद दोषियों पर आगे की कार्रवाई भी तय की जाएगी।

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