गिद्धौर/जमुई (Gidhaur/Jamui), 1 फरवरी 2026, रविवार : गिद्धौर स्थित +2 महाराज चंद्रचूड़ विद्यामंदिर के प्रांगण में शनिवार को शिक्षा जगत का एक भावुक पल उस समय देखने को मिला, जब विद्यालय के प्रभारी प्रधानाध्यापक मो. मंजूर आलम के सेवानिवृत्त होने पर सम्मान सह विदाई समारोह का आयोजन किया गया। विद्यालय परिवार की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में शिक्षक, शिक्षकेत्तर कर्मी एवं अन्य गणमान्य उपस्थित रहे। समारोह के दौरान पूरे वातावरण में भावनात्मक माहौल बना रहा और विदाई के क्षणों में कई शिक्षकों की आंखें नम हो गईं।
मो. मंजूर आलम का शैक्षणिक सफर लगभग तीन दशकों तक चला, जिसे विद्यालय परिवार ने गर्व और सम्मान के साथ याद किया। उनके सेवाकाल के दो महत्वपूर्ण पड़ाव रहे। वर्ष 1994 से 2013 तक लगभग 19 वर्षों तक उन्होंने विद्यालय में सहायक शिक्षक के रूप में अपनी सेवाएं दीं, जबकि 1 अक्टूबर 2013 से 31 जनवरी 2026 तक लगभग 12 वर्षों तक उन्होंने प्रभारी प्रधानाध्यापक के पद की जिम्मेदारी संभाली। इस लंबे कार्यकाल के दौरान उन्होंने न केवल शिक्षा का प्रसार किया, बल्कि विद्यालय के अनुशासन, प्रशासनिक व्यवस्था और शैक्षणिक गुणवत्ता को भी नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया।
विदाई समारोह के दौरान वक्ताओं ने उनके व्यक्तित्व और कार्यशैली पर प्रकाश डालते हुए कहा कि मो. मंजूर आलम एक सरल, अनुशासनप्रिय और छात्रों के हितों के प्रति समर्पित शिक्षक रहे हैं। उनके नेतृत्व में विद्यालय में शैक्षणिक माहौल मजबूत हुआ और विद्यार्थियों में अध्ययन के प्रति रुचि बढ़ी। शिक्षक साथियों ने बताया कि वे हमेशा सहयोगी भावना के साथ कार्य करते रहे और विद्यालय को परिवार की तरह संचालित किया।
विद्यालय परिवार की ओर से मो. मंजूर आलम को पुष्प गुच्छ, अंगवस्त्र, स्मृति चिह्न एवं उपहार भेंट कर सम्मानित किया गया। सम्मान प्राप्त करते समय मो. मंजूर आलम भावुक हो उठे। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि यह विद्यालय उनके लिए केवल एक कार्यस्थल नहीं, बल्कि एक परिवार की तरह रहा है। लगभग 31 वर्षों की सेवा उनके जीवन की अमूल्य धरोहर है। उन्होंने कहा कि यहां के शिक्षकों, कर्मचारियों और छात्रों से मिला स्नेह और सम्मान उनके हृदय में सदैव जीवित रहेगा।
समारोह के अंत में उपस्थित सभी लोगों ने उनके उत्तम स्वास्थ्य, दीर्घायु एवं सुखद भविष्य की कामना की। कार्यक्रम का समापन इस भावपूर्ण संदेश के साथ हुआ कि एक सच्चा शिक्षक कभी सेवानिवृत्त नहीं होता, वह हमेशा अपने शिष्यों के दिलों और स्मृतियों में जीवित रहता है।








