मौरा/गिद्धौर। प्रखंड अंतर्गत मौरा बालू घाट को लेकर ग्रामीणों का विरोध थमने का नाम नहीं ले रहा है। कृषि योग्य भूमि को बंजर होने से बचाने की मांग को लेकर मौरा समेत आसपास के कई गांवों के किसान एवं ग्रामीण लगातार आंदोलनरत हैं। इसी क्रम में अब जीविका से जुड़ी महिलाओं, जिन्हें आम तौर पर “जीविका दीदियां” कहा जाता है, का विरोध प्रदर्शन भी खुलकर सामने आया है, जिससे आंदोलन को और अधिक मजबूती मिली है।
प्रदर्शनकारी ग्रामीणों का कहना है कि बालू घाट के संचालन से खेती योग्य जमीन को भारी नुकसान पहुंच रहा है। खेतों की उपजाऊ मिट्टी प्रभावित हो रही है, जिससे भविष्य में कृषि कार्य करना कठिन हो सकता है। इसी चिंता को लेकर किसानों और ग्रामीणों ने बालू बंदोबस्त घाट को तत्काल बंद करने की मांग तेज कर दी है।
इस विरोध प्रदर्शन में मौरा गांव की जीविका दीदियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। प्रदर्शन में प्रमुख रूप से चंपा देवी, नीतू कुमार, निर्मला देवी, कविता देवी, आरती देवी, मधु देवी, संजू देवी, मखनी देवी, हेमा देवी, सीता देवी, अरुणा देवी, रीता देवी और रेनू देवी शामिल रहीं। महिलाओं ने एक स्वर में कहा कि यदि बालू घाट का संचालन यूं ही जारी रहा तो उनकी खेती, आजीविका और परिवार का भविष्य संकट में पड़ जाएगा।
विरोध प्रदर्शन में स्थानीय जनप्रतिनिधि और ग्रामीण भी शामिल हुए। सरपंच अवधेश सिंह के साथ नूनधन झा, गोपाल झा, पिंडू दुबे, महादेव मंडल, देवेंद्र यादव, सुबोध यादव, राजेंद्र भादव, अशोक कुमार सिंह, सच्चितानंद मंडल, अनिल कुमार, अजय सिंह एवं अजीत झा समेत बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।
प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन से मांग की कि मौरा बालू घाट के संचालन पर रोक लगाई जाए और कृषि योग्य भूमि की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र कार्रवाई नहीं की गई तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। इस पूरे घटनाक्रम से क्षेत्र में बालू घाट को लेकर तनावपूर्ण माहौल बना हुआ है, वहीं प्रशासन की अगली कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।






