जमुई/बिहार। भारत की प्रथम महिला शिक्षिका एवं नारी शिक्षा की प्रणेता सावित्रीबाई फुले की जयंती के अवसर पर जमुई जिला मुख्यालय स्थित समग्र सेवा, सरयू सेवा सदन परिसर में “बालिका शिक्षा संकल्प सह सम्मान कार्यक्रम” का भव्य आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम स्वयंसेवी संस्था समग्र सेवा के तत्वावधान में आयोजित हुआ, जिसमें शिक्षा, जागरूकता और सामाजिक बदलाव का सशक्त संदेश दिया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. एस. एन. झा, डॉ. रिंकी एवं संस्था के सचिव मकेश्वर द्वारा संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलन कर किया गया। उद्घाटन के पश्चात सावित्रीबाई फुले के जीवन, संघर्ष और उनके शिक्षा आंदोलन पर प्रकाश डाला गया, जिससे उपस्थित बालिकाओं एवं अभिभावकों को प्रेरणा मिली।
इस अवसर पर संस्था के लक्षित गांवों से आई बालिकाओं ने चित्रकला, कहानी पाठ, नृत्य एवं संगीत जैसी मनमोहक प्रस्तुतियां दीं। साथ ही बाल साहित्य सह पुस्तक मेला का भी आयोजन किया गया, जहां बच्चों में पढ़ने-लिखने की रुचि विकसित करने का प्रयास किया गया। बालिकाओं की रचनात्मक प्रस्तुतियों ने दर्शकों का मन मोह लिया और पूरे वातावरण को उत्साह से भर दिया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डॉ. एस. एन. झा ने कहा कि सावित्रीबाई फुले ने महिलाओं को शिक्षा के माध्यम से सम्मान और अधिकार दिलाने के लिए जो संघर्ष किया, वह भारतीय समाज के लिए अमूल्य है। उन्होंने कहा कि समग्र सेवा संस्था भी उसी विचारधारा को आगे बढ़ाते हुए अति जरूरतमंद, अनामांकित एवं ड्रॉपआउट बालिकाओं को पुनः शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने का निरंतर प्रयास कर रही है।
डॉ. रिंकी ने अपने संबोधन में कहा कि सावित्रीबाई फुले केवल शिक्षा की प्रतीक नहीं थीं, बल्कि उन्होंने समाज में व्याप्त छुआछूत, बाल विवाह, सती प्रथा और विधवा विवाह निषेध जैसी कुरीतियों के खिलाफ भी निर्भीक आवाज उठाई। उनका संपूर्ण जीवन सामाजिक सुधार और महिला सशक्तिकरण को समर्पित रहा।
संस्था के सचिव मकेश्वर ने कहा कि सावित्रीबाई फुले का जीवन संघर्षों से भरा रहा, लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी। आज भले ही उनके निधन को एक सदी से अधिक समय बीत चुका हो, लेकिन उनका योगदान आज भी समाज में जीवंत है। उन्होंने उपस्थित बालिकाओं को कम से कम बीए तक शिक्षा प्राप्त करने के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि शिक्षा ही सशक्त भविष्य की कुंजी है।
इस अवसर पर संस्था द्वारा उपस्थित लगभग 200 बालिकाओं को कॉपी और कलम देकर सम्मानित किया गया। साथ ही बालिका शिक्षा संकल्प के तहत उन बालिकाओं को विशेष रूप से सम्मानित किया गया, जो सामाजिक कुरीतियों के कारण पढ़ाई छोड़ चुकी थीं और जिन्हें संस्था के प्रयासों से पुनः शिक्षा से जोड़ा गया है। संस्था के निरंतर प्रयासों से अब तक हजारों बालिकाएं उच्च शिक्षा की ओर अग्रसर हुई हैं और अपने गांव-टोलों में नि:शुल्क शिक्षा देने के लिए भी प्रेरित हो रही हैं।
कार्यक्रम के दौरान सभी बालिकाओं ने एक स्वर में संकल्प लिया— “हम पढ़ेंगे, पढ़ाएंगे, बीए पास करने से पहले शादी नहीं करेंगे।”
इस आयोजन में संस्था की कार्यकर्ता ज्ञानवती, बबीता कुमारी, मिशा भारती, खुशबू, पूनम कुमारी, सौरव सहित अन्य सहयोगी उपस्थित रहे और कार्यक्रम को सफल बनाने में सक्रिय भूमिका निभाई।







