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बुधवार, 29 मई 2024

रोहिणी नक्षत्र के तपन से गिद्धौर की सड़कें हुईं वीरान, चिकित्सक की सलाह - पानी ज्यादा पिएं

गिद्धौर/जमुई, (सुशांत साईं सुंदरम), 29 मई 2024, बुधवार। रोहिणी नक्षत्र में तपती गर्मी से गिद्धौर की सड़कें वीरान हो गई हैं। तेज गर्मी और लू की वजह से लोग घरों में दुबके हैं। फल-सब्जियों के दामों में बेतहाशा वृद्धि हुई है। चापानल का लेयर नीचे चला गया है। ग्रामीणों को भीषण गर्मी से परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। मौसम रिपोर्ट के अनुसार तापमान 43 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया है, जबकि तपिश 51 डिग्री सेल्सियस तक की महसूस की जा रही है। 
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ज्योतिषशास्त्र के अनुसार सूर्य शनिवार 25 मई को सुबह 03:15 मिनट पर रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश किए हैं। यह 2 जून रविवार तक नौ दिनों का नौतपा रहेगा. इसके साथ ही सूर्य देव 8 जून शनिवार को 1:04 मिनट तक रोहिणी नक्षत्र में रहेंगे, जिससे इन दिनों गर्मी प्रचंड रहेगी व पारा 48 डिग्री के पार कर सकता है।

मान्यता है कि सूर्य की गर्मी और रोहिणी नक्षत्र, जिसका स्वामी चंद्र है के जल तत्व के कारण यह मानसून का नौ दिनों न गर्भ आ जाता है और इसी कारण नौतपा को मानसून का गर्भकाल माना जाता है। ऐसे में जब सूर्य रोहिणी नक्षत्र में होता है तो उस समय चंद्रमा नौ नक्षत्रों में भ्रमण करते हैं।
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लोक मान्यता है कि अगर नौतपा के सभी 9 दिन पूरे तपें, तो आगे के दिनों में अच्छी बारिश होती है। देश में गर्मी अब अपना प्रचंड रूप दिखाने लगी है। जिसका प्रभाव गिद्धौर और आसपास के क्षेत्रों में भी दिख रहा है।

वहीं नौतपा में भीषण गर्मी से बचाव और स्वास्थ्य के देखभाल के लिए वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. चंद्रेश्वर सिंह ने कुछ बातों का ध्यान रखने की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि नौतपा के दौरान ज्यादा से ज्यादा पानी पिएं, ताकि शरीर में किसी तरह की परेशानी न हो। गर्भवती महिलाओं और बीमार परिजनों का खास ख्याल रखना है। अपनी सभी प्रकार की यात्रा, सफर और बाहर जाना कम से कम 2 जून तक टालें।

वहीं ज्योतिषाचार्य डॉ. विभूति नाथ झा ने कहा कि मान्यता यह भी है कि नौतपा के दौरान प्यासे को जल पिलाने से भगवान सूर्य की कृपा प्राप्त होती है। नौतपा के दौरान सूर्यदेव की उपासना करने से व्यक्ति के जीवन में सुख-समृद्धि और खुशहाली आती है। साथ ही समाज में मान-सम्मान भी बढ़ता है। यदि आपकी कुंडली में सूर्य की स्थिति कमजोर है उसको मजबूत करना चाहते हैं तो नौतपा के दौरान रोजाना सुबह सूर्य देव की अराधना करें और अर्घ्य दें। इसके अलावा आदित्य हृदय स्रोत का पाठ करना भी लाभकारी होता है।

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