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जमुई : पतनेश्वर नाथ मंदिर में हुई शिवलिंग की दूधकुशना, जयकारों से गूंजा परिसर

बरहट/जमुई (Barahat/Jamui), 3 अगस्त : सावन मास में शिव की आराधना करने का बड़ा महत्व है। भक्त भगवान शिव को साकार और निराकार रूप में पूजा अर्चना करते हैं। उनका लिंग रूप निराकार तथा मूर्ति रूप साकार बोधक है। इसलिए शिव भक्त उनके शगुन व निर्गुण दोनों रूप की पूजा करते हैं।

मान्यता है भगवान शंकर दयालु और औघरदानी है। उनका कल्याणकारी स्वभाव यह है कि भक्त के थोड़ी ही सेवा भाव से वे प्रसन्न होकर कल्याण कर देते हैं। इसी सेवा भाव से भगवान शिव ने समुद्र मंथन के समय निकलते हुए हलाहल विष का पान कर संसार का कल्याण किए थे।

सावन मास में शिव उपासना की सार्थकता तभी संभव है जब श्रद्धा और विश्वास के साथ शिव तत्व को प्राप्त करें। उक्त बातें बुधवार को पतनेश्वर नाथ मंदिर धाम में दूधकुशना के दौरान पंडित नीरज पांडेय व सुजीत पांडेय ने कही। दूधकुशना के दौरान शिवलिंग को घेर कर पूरे शिवलिंग को दूध से डुबो दिया गया।

बताया जाता है कि लगभग 125 लीटर दूध का दूधकुशना शिव भक्तों द्वारा किया गया। इस दौरान पूरा मंदिर परिसर हर-हर महादेव व जय शिवशंकर के जयकारों से गुंजायमान हो उठा। बताया गया कि श्रावण शुक्ल पक्ष षष्ठी को वैदिक मंत्रोचार के साथ भगवान शिव के शिवलिंग को डुबोने से भगवान प्रसन्न होते हैं। सभी प्रकार के समस्या का हल निकल आता है।