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शुक्रवार, 17 जून 2022

जमुई : अग्निपथ योजना के विरोध में सड़क पर उतरे अभ्यर्थी, कचहरी चौक पर किया प्रदर्शन

जमुई (Jamui), 17 जून
◆ रिपोर्ट : सुशांत साईं सुन्दरम
केंद्र सरकार की अग्निपथ योजना (Agnipath Scheme) के खिलाफ बिहार (Bihar) में तीसरे दिन भी उग्र प्रदर्शन जारी है। कई जिलों में जमकर बवाल हो रहा है। जमुई में कचहरी चौक और मुख्य सड़क पर जाम लगाया गया है। अभ्यर्थी सड़क पर उतर आए हैं। गाड़ियों का परिचालन बाधित कर दिया गया है। वहीं लखीसराय-किउल में प्रदर्शनकारी सुबह 6 बजे से ही ट्रैक पर डटे हुए हैं। रेलवे ने जहां-तहां ट्रेनों को रोक दिया है। कई ट्रेनें रद्द भी कर दी गई हैं।
जमुई में जोरदार तरीके से अभ्यर्थी अग्निपथ योजना के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। आक्रोशित युवाओं का कहना है कि महज 4 साल के लिए भर्ती किया जाना रोजगार के अधिकार का हनन करना है। प्रदर्शनकारियों ने इस दौरान विधायक, सांसद पर भी तंज कसते हुए कहा कि क्या किसी विधायक, सांसद और मुख्यमंत्री का बेटे सेना में भर्ती है। सेना में केवल गरीब किसान का बेटा है। सरकार इन लोगों के साथ नाइंसाफी कर रही है। इसे बर्दाश्त नहीं करेंगे। केन्द्र की मोदी सरकार युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रही है।

बता दें कि केंद्र सरकार ने 14 जून को सेना की तीनों शाखाओं थलसेना, नौसेना और वायुसेना में युवाओं की बड़ी संख्या में भर्ती के लिए अग्निपथ भर्ती योजना शुरू की है। इस स्कीम के तहत नौजवानों को 4 साल के लिए डिफेंस फोर्स में सेवा देनी होगी। माना जा रहा है कि सरकार ने यह कदम तनख्वाह और पेंशन का बजट कम करने के लिए उठाया है।
चार साल की नौकरी का विरोध
एक प्रदर्शनकारी अभ्यर्थी ने बताया, '2021 में ने सेना में नियुक्ति के लिए आवेदन मांगे गए थे। जिसमें कई जिलों के हजारों अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था। उनमें से जिन्होंने फिजिकल टेस्ट पास किए उनका मेडिकल हुआ था। मेडिकल होने के बाद अब एक साल से लिखित परीक्षा का इंतजार कर रहे हैं। अब तक परीक्षा नहीं ली गई । '
प्रदर्शनकारियों ने कहा, 'रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को इसका ऐलान किया था कि अग्निपथ स्कीम के तहत अग्निवीरों की नियुक्ति होगी, जिन्हें 4 साल के लिए सेना में नौकरी दी जाएगी। 4 साल बाद 75 फीसदी जवानों को 11 लाख रुपए देकर घर वापस कर दिया जाएगा। सिर्फ 25 फीसदी की सेवा में कुछ विस्तार होगा। इसी नए नियम को लेकर हंगामा व प्रदर्शन कर रहे हैं।'

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