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क्या आप जानते हैं आपका बैंक ऋण खाता एनपीए है? जानिए क्या होता है ये?

गिद्धौर/जमुई (Gidhaur/Jamui), 31 मई : 
अगर आपने किसी बैंक से ऋण लिया है और 90 दिनों के भीतर उसमें किसी भी प्रकार के भुगतान की प्रक्रिया शुरू नहीं की गई है, तो आपका खाता खराब हो सकता है। ऐसा छोटेलाल जी ने सिंहेश्वर जी को कहा।

सिंहेश्वर जी समाज के बहुत प्रतिष्ठित व्यक्ति हैं और समाज में उनका काफी ज्यादा रसूख भी है। उन्होंने विभिन्न बैंकों से कई प्रकार के ऋण ले रखे हैं और रीपेमेंट अनियमित तौर पर करने की उनकी आदत रही है।

अनियमित रीपेमेंट का मतलब की 1 महीने पैसे देना, 2-3 महीने पैसे नहीं देना है। इस तरीके से सिंहेश्वर जी के घर पर बराबर बैंक वालों का आना जाना रहता था। क्योंकि उनकी पेमेंट पैसे होने के बावजूद भी खराब रहती थी। ऐसे में ही एक दिन उन्हें बैंक वालों की तरफ से नोटिस प्राप्त होता है कि आपका खाता खराब हो चुका है, कृपया इसके ओवरड्यू को सही करें।

जब सिंहेश्वर जी ऋषिकेश जी के पास इस बात को लेकर पहुंचे तब ऋषिकेश जी ने उन्हें समझाया कि अगर आप कैश क्रेडिट या लोन में से कोई भी सुविधा बैंक से प्राप्त करते हैं, तो मानक अवधि के पश्चात आपका रिपेमेंट हर महीने बैंक शाखा को पहुंच जाना चाहिए। अगर ऐसा नहीं होता है तो आपका खाता खराब होने की संभावना शत-प्रतिशत होती है। समय पर ऋण नहीं चुकाने पर बैंक आप पर कानूनी कार्यवाही करने हेतु स्वतंत्र होता है।

उपरोक्त उदाहरण आज के परिपेक्ष्य में यथार्थ ही साबित होता है। जब गिद्धौर स्थित विभिन्न बैंकों का gidhaur.com के द्वारा समीक्षात्मक अवलोकन किया गया तो पाया गया कि किसी भी गिद्धौर शाखा में सम्पूर्ण रूप से सही से चलने वाले ऋण खातों की संख्या बहुत कम है। अधिकांशतः खाते खराब की श्रेणी में पड़े हुए हैं।

gidhaur.com पर प्रसारित यूको बैंक की गिद्धौर शाखा द्वारा वन टाइम सेटलमेंट से संबंधित खबर का अवलोकन किया गया, तब यह पाया गया कि समाज के लोगों में ऋण चुकाने की जागरूकता न के बराबर है। यही हाल कमोबेश गिद्धौर में स्थित इंडियन बैंक, बैंक ऑफ इंडिया, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, ग्रामीण बैंक गिद्धौर एवं सेवा व बैंक ऑफ बड़ोदा महुली शाखा का भी है।

आज के समय में जबकि बैंक में युवा वर्ग का वर्चस्व है और आगामी युवा पीढ़ी बैंक में नौकरी को सम्मानित दृष्टि से देखती है, वैसे समय में बैंकों के अंदर का यह दृश्य निश्चित ही भयावह है कि समाज का एक स्तर ऐसा भी है जो कि आने वाले पीढ़ियों को मिलने वाली ऋण सुविधाओं के ऊपर काली छाया के रूप में खड़ा है।

हम अपने इस पटल से सभी सम्मानित पाठकों से आग्रह करते हैं कि वे स्वयं एवं समाज को जागरूक बनाएं और बैंकों द्वारा मिलने वाली ऋण सुविधाओं के लाभ हेतु खुद को जागरूक करने के साथ-साथ ऋण मुक्ति एवं ऋण समझौतों के बारे में भी सोचकर उसपर कार्यान्वयन करने का कष्ट करें।