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जमुई में बोले प्रो. पासवान, साहस के सुमेरु और संकल्प के गिरिराज थे महाराणा प्रताप


Jamui / जमुई (बिभूति भूषण) :-

. महाराणा प्रताप साहस के सुमेरु और संकल्प के गिरिराज थे l मातृभूमि की रक्षा के लिए अपना जीवन अर्पित करने वाले महा राणा प्रताप  वीरता, पराक्रम, शौर्य और त्याग के प्रतीक थे l महाराणा प्रताप की जयंती के मौके पर जानकारी देते हुए प्रो. गौरी शंकर पासवान ने बताया कि महाराणा प्रताप एक ऐसे वीर योद्धा थे, जिनका वीरगाथा अमर है l उन्होंने अपनी सीमित साधनों के बावजूद भी मुगलों को नाकों चने चबाया था l  कई बार मुगलों को हराया भी है  18 जून 1576 को हल्दीघाटी का युद्ध मुगल बादशाह अकबर और महाराणा प्रताप के बीच लड़ा गया था  l यह युद्ध महाभारत की लड़ाई की तरह विनाशकारी था l कहा जाता है कि हल्दीघाटी के युद्ध में ना तो अकबर जीता था और न तो महाराणा प्रताप हारे थे  l राणा प्रताप के पास 20 हजार सैनिक थे ,तो अकबर के पास 85 हजार सैनिक थे l फिर भी राणा प्रताप ने हार नहीं मानी और सतत संघर्ष करते रहे l  कहते हैं अकबर ने राणा प्रताप से समझौता करने के लिए छह शांति दूत भेजा था, परंतु उन्होंने इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया l उन्होंने कहा कि मेवाड़ के महान राजा महाराणा प्रताप का जन्म 9 मई 1540 को हुआ था। किंतु हिंदू पंचांग के अनुसार 1540 में 9 मई को जेष्ठ शुक्ल  की तृतीया तिथि थी l इस वर्ष 13 जून को जेष्ठ शुक्ल तृतीया है l इसलिए  13 जून को संपूर्ण देश में महा राणा प्रताप की जयंती मनाई जा रही है l 

Edited by : Abhishek kr. Jha