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महानवमी : हाँ? ना? के कन्फ्यूजन के बीच गिद्धौर में हो ही गया बलिदान

गिद्धौर/जमुई (Gidhaur/Jamui) : कोरोना महामारी के बीच गिद्धौर के ऐतिहासिक दुर्गा पूजा में न तो पंडाल बना है और न ही किसी प्रकार की विशेष सजावट की गई है। लोगों में यह कन्फ्यूजन था कि पूजा किस तरह से होगी? यह सवाल बार बार पूछे जा रहे थे कि बलिदान दिया जाएगा या नहीं। लेकिन इसी कन्फ्यूजन के बीच गिद्धौर के दुर्गा मंदिर में रविवार को बलिदान भी दिया गया।
लोग सुबह से ही अपना-अपना पाठा लेकर पहुंचे थे। पंचमन्दिर के पास वाले सामुदायिक भवन में लोगों से रसीद काटा गया। जो लोग पहले पहुंचे थे वे अपने गांव वालों को फोन कर के सूचना देकर बुलवा लिए। न तो कोई बाजा-बत्ती और न ही किसी तरह की कोई घोषणा।

नए आने वाले लोग आपस में बतियाते दिखे।
पहला व्यक्ति : कत्ते के कटलै रसीद?
दूसरा व्यक्ति : एक नमरी।

रसीद कटवाकर मंदिर के पास लोग लाइन में लगे नजर आए। लाईन में लगे लोगों का भी रसीद शारदीय दुर्गा पूजा सह लक्ष्मी पूजा समिति के कार्यकर्ताओं ने काटा। दुर्भाग्य यह रहा कि इस दौरान न तो कोई मास्क पहने नजर आया और न ही सोशल डिस्टेंसिंग का पालन किया गया।

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