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गिद्धौर : केतरु नवादा का सत्यम दाने दाने को मोहताज, न माँ न बाप, सरकारी मदद की है आस

>> बीते 21 जुलाई को हुए बज्रपात ने छीन ली सत्यम के जीवन खुशी 

न्यूज़ डेस्क | अभिषेक कुमार झा】 :-

कच्छप गति में चल रहे सरकारी काम और उसकी नीति में कई लोग आर्थिक, शारीरिक और मानसिक पीड़ाओं से गुजरते हैं। ऐसा ही एक उदाहरण है गिद्धौर के केतरु नवादा गांव (Gidhaur/Ketru Nawada) का जहां बीते 21 जुलाई को कुदरत के कहर के रूप में हुए बज्रपात ने सूबो देवी के जीवन की बलि ले ली। इस घटना के बाद उक्त महिला के घर मे बचा एक मात्र 11 वर्षीय सत्यम आज बेसहाय जीवन व्यतीत कर रहा है। पिता के बाद अपनी मां को खोने वाले सत्यम के जख्मों पर सहायता की मरहम लगाने के लिए न तो जनप्रतिनिधियों में ही ततपरता देखी गयी और न ही कोई राजनीतिक सुरमा ही इनका हाल-चाल जानने पहुंचे हैं।


विदित हो, सेवा पंचायत के केतरु नवादा निवासी परतुल साव की पत्नी मृतक सुबो देवी नवादा बहियार में धान रोपण का कार्य कर रही थी कि इसी क्रम में हुए बज्रपात में उनकी मौत हो गई।  घटना 21 जुलाई 2020 की है। उक्त घटना में एक पुरुष और एक महिला भी घायल हुए हैं। महिला का बायां हाथ काम करना बन्द कर दिया है। उस दिन के हादसे को याद कर उक्त दोनों घायलों के रोंगटे खड़े जाते हैं।

मुआवजे के आस में बीत गया महीना -

बता दें, बज्रपात की घटना को लेकर उसी दिन गिद्धौर थाना में कांड संख्या 06/2020 के रूप में एफआईआर दर्ज कराई गई है। ग्रामीणों ने बताया है कि सरकार के आपदा प्रबंधन विभाग से बज्रपात से हुए मौत के मामले में मृतक के आश्रित को 04 लाख रुपय, तथा घायल हुए लोगों को लगभग 60 हजार रुपये मुआवजा देने का प्रावधान है, जो अब तक नही मिलने से परिवार आर्थिक परेशानी से जूझ रहा है। सत्यम अपने बहन के साथ किसी तरह अपना गुजारा कर रहा है।  वहीं, अनाज आपूर्ति के लिए राशन कार्ड न होने से 11 वर्षीय बालक सत्यम सरकारी लाभ के लिए दर दर भटक रहे हैं।

- पिता प्रेम के बिना बीत बचपन, अब छीन गया मां का साया -

 यहां यह बता दें कि इस घटना में मृतक के पति परतुल साव पहले से ही मानसिक विक्षिप्त हैं व वर्षों से गायब चल रहे हैं । इससे सत्यम का बालपन बिना पिता प्रेम का बीता। अब बज्रपात में मां के निधन के बाद अपने परिवार में वो अकेला सदस्य बचा है। इधर, घटना से मृतक महिला का इकलौता पुत्र सत्यम तमाम सरकारी तन्त्रों से आहत हो सदमे में है व सरकारी मुआवजा को लेकर सरकारी सूरमाओ से आस लगाये बैठा है।


 बोली अंचल अधिकारी


कार्यालय कर्मियों से घटना से जुड़ी जानाकरी ली जा रही है । कुछ काग़जात प्रक्रिया पूरी करने के बाद आश्रित परिवार को हरसंभव सहयोग किया जाएगा। “

रीता कुमारी, अंचलाधिकारी, गिद्धौर



-कैमरे के सामने छलका सत्यम का दर्द -

सत्यम ने बातचीत के क्रम में जब अपनी आपबीती सुनाई तो gidhaur.com के कैमरे पर उसका दर्द छलक उठा। सत्यम ने स्थानीय जनप्रतिनिधि से अपना पेट चलाने के लिए राशन कार्ड की मांग करते हुए बताया है कि उनकी मां ही एकमात्र सहारा था, जो  मेहनत मजदूरी करके अपने घरों को चलाया करती थी। भावुक स्वर में  11 वर्षीय बालक सत्यम ने बताया कि उसका वर्तमान हालात यह है  कि वह अपने पेट को भरने के लिए पास पड़ोस के घरों में छोटे-मोटे काम करने को विवश है । ऐसी हालत में यह विचारणीय प्रश्न बना हुआ यही कि 11 वर्षीय मासूम सत्यम के जख्मों पर मानवता का मरहम कौन लगाएगा ? 

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