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सोनो : शिक्षा सेवकों व तालिमी मरकजों को प्रारंभिक शिक्षक का दर्जा दिए जाने की मांग



Sono News (किशोर कुणाल)
 बिहार राज्य संविदा कर्मी शिक्षा सेवक संघ के जिलाध्यक्ष प्रकाश बौद्ध ने बिहार सरकार पर शिक्षा सेवकों व तालिमी मरकजों के साथ विश्वासघात करने का आरोप लगाया है। जिलाध्यक्ष ने बताया कि सूबे के विभिन्न प्रारंभिक विद्यालयों में अपनी सेवा दे रहे 28 हजार शिक्षा सेवक और तालिमी मरकज के साथ नीतीश सरकार सौतेला व्यवहार कर रही है। न तो उन्हें  एनआईओएस के माध्यम से दो वर्षीय प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जा रहा है और न ही उनकी सेवा पुस्तिका संधारित की जा रही है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2007-08 में नीतीश कुमार की सरकार ने ही महादलित एवं अल्पसंख्यक समाज के युवाओं को सूबे की शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने के उद्देश्य शिक्षा सेवक और तालिमी मरकज के पद पर बहाल की। मानदेय में कालांतर में वृद्धि भी की गई। शिक्षा सेवक/ तालिमी मरकज बच्चों को विद्यालय लाने, उन्हें पढ़ाने के साथ ही अक्षर आंचल योजना से जुड़कर निरक्षर महिलाओं को लगातार साक्षर कर रहे हैं। विभाग कई तरह के कार्य भी हमसे करवा रही है। पर महंगाई के अनुरूप हम लोगों को मानदेय नहीं मिल रहा है।हम हमेशा अपने बच्चों के भविष्य के लिए चिंतित रहते हैं। बिहार राज्य संविदा कर्मी शिक्षा सेवक संघ को तत्कालिन शिक्षा मंत्री अशोक चौधरी ने शिक्षा सेवक और तालिमी मरकज को प्रारंभिक शिक्षक में समायोजन करने का आश्वासन दिया था। हमें उम्मीद थी कि इस आश्वासन पर चुनावी वर्ष में पहल जरूर होगी,पर निदेशक जन शिक्षा ने पुनः 15 से 45 वर्ष के असाक्षर महिलाओं की पहचान कर शिक्षा सेवक व तालिमी मरकज को पठन-पाठन प्रारंभ करने का निर्देश दिया है। इस आदेश से हम शिक्षा सेवकों के प्रारंभिक शिक्षक में समायोजन की उम्मीद खत्म होती नजर आ रही है। जिलाध्यक्ष ने पुनः सरकार से शिक्षा सेवकों व तालिमी मरकजों को प्रारंभिक शिक्षक का दर्जा दिए जाने की मांग की है।

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