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गिद्धौर : मजदूरों के कदमों तले बौनी पड़ गयी सड़कें, आंखों से छलक रहा दर्द


गिद्धौर (धनन्जय कुमार 'आमोद') :- बड़ा गुरूर था सड़कों को लंबी होने का, पर श्रमिकों ने जब डग भरना शुरू किया तो पूरी सड़कें नाप डाली...
यह आलम है उन बेबस, लाचार , मजबूर मजदूरों की जो लॉकडाउन में दूसरे राज्यों में फंसे होने पर अपने घर जाने को अपनी पूरी ताकत लगा के हौसले के साथ अपने घर को एक-एक डग भरते जा रहे हैं।


इन मजदूरों के कदमों तले लंबी सड़कें भी बौना साबित हो रही है। कंधों पर बैग और परिवारिक जिम्मेदारी के बीच इनका एक एक कदम इनकी मंजिल को करीब ला रहा है। सरकारी महकमे पर तो नहीं, पर इन्हें अपने  दो टांगों पर भरोसा है। ये वही  टांगे हैं, जो भंवर के मझदार से  निकालने में इनका हमसफ़र बना।
हालांकि सरकार के द्वारा भी बस व ट्रेनों से प्रवासियों को घर भेजने की कवायद जारी है, पर गिद्धौर की सड़कों पर आज भी हजारों की संख्या में प्रवासी मजदूरों के कदम लपकते हुए उनके घर की ओर बढ़ रहे हैं, इनमे बच्चे भी हैं, बूढ़े भी, महिलाएं भी हैं, और युवा भी। इस चिलचिलाती धूप में भी इनके बुलंद हौसले के आगे तमाम सरकारी सुविधाएं खोखली साबित हो रही है।-

आप भी जानिए मजदूरों का हाल

सोमवार की सुबह हरियाणा के दामला से मजदूरों का जत्था गिद्धौर की सड़कों पर दिखा।  पूछने पर बताया कि लॉक डाउन घोषित होते ही, कम्पनी बन्द हो गयी, तो मालिक ने घर जाने की बात कह दी। मजदूरी भी नही मिला जिससे हमलोग के सामने भुखमरी का स्थिति उत्पन्न हो गई है। मजदूरों ने ठाना है कि चाहे कुछ भी हों जाये अब प्रदेश नही जाना है, बस घर पहुंच जाए, यहीं गुजर बसर कर लेंगे। कहा कि हरियाणा से चले हैं और झारखण्ड के गोड्डा तक जाना है। रास्ते मे सरकारी सुविधा तो नही, पर कुछ लोग रास्ते मे खाना-पीना दे देते थे। 13 दिन के सफर में जिंदगी ने कई तस्वीर  दिखाई है।